'बिहार में जीजा-साला, ससुर-दामाद आयोग का गठन', नीतीश कुमार की नियुक्तियों पर उठे सवाल, क्या है पूरा मामला?

Bihar News: चुनावी मौसम में सरकारें अक्सर फैसलों की रफ्तार बढ़ा देती हैं और बिहार भी इससे अछूता नहीं है। विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच नीतीश सरकार ने सवर्ण आयोग के पुनर्गठन के साथ-साथ अल्पसंख्यक आयोग और अनुसूचित जाति आयोग में बड़ा फेरबदल कर राजनीतिक संकेत साफ दे दिए हैं। हालांकि, असली सियासी संदेश अनुसूचित जाति आयोग की नई नियुक्तियों से निकलकर सामने आया है। इस बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सामाजिक संतुलन के साथ-साथ राजनीतिक परिवारों के समीकरण भी साधने की कोशिश की है। बिहार अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष बनाए गए हैं मृणाल पासवान जो चिराग पासवान के बहनोई हैं (रामविलास पासवान की पहली पत्नी के दामाद)। वहीं, उपाध्यक्ष बने हैं देवेंद्र कुमार मांझी, जो पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के दामाद हैं।

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RJD ने बताया जीजा-साला, ससुर-दामाद आयोग

इन दोनों पदों पर की गई नियुक्ति सिर्फ प्रतिनिधित्व का मामला नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से दो बड़े दलित राजनीतिक परिवारों को एक मंच पर लाने की कोशिश है। नीतीश कुमार ने 'एक तीर से कई निशाने' साधते हुए संकेत दिया है कि वे चुनावी बिसात पर अब हर चाल सोच-समझकर चल रहे हैं। वहीं नीतीश कुमार अपने इस फैसले के बाद एक बार फिर विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं। RJD ने नीतीश सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाते हुए सीएम नीतीश कुमार पर निशाना साधा है। RJD ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा कि, 'लोजपा, HAM, जेडीयू और भाजपा ने मिलकर जीजा-साला, ससुर-दामाद, बेटा-भतीजा आयोग का गठन किया! चुनाव से पहले झुनझुना आयोग भी बनाया। #Bihar #BiharPolitics'

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चुनाव से पहले सक्रिय हुई नीतीश सरकार

दरअसल, वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर जेडीयू की चुप्पी और रुख से मुस्लिम समाज में नाराजगी की खबरें सामने आई थीं। माना जा रहा है कि नीतीश कुमार ने इस नाराजगी को डैमेज कंट्रोल के जरिए साधने की कोशिश की है। इसी के साथ-साथ सरकार ने वर्षों से निष्क्रिय पड़े सवर्ण आयोग का भी पुनर्गठन कर दिया है। सवर्ण मतदाताओं की उपेक्षा के आरोपों को देखते हुए यह कदम भी चुनावी साल में संतुलन साधने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। इन सभी फैसलों को एक साथ देखें तो साफ है कि बिहार सरकार पूरी तरह चुनावी मोड में आ चुकी है। सामाजिक समीकरण, नाराजगी और जनधारणा - सबको साथ लेकर चलने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।

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