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Bihar Chunav 2025: ये ''Exit'' पोल है, "Exact" पोल नहीं! बिहार में क्यों गलत हो जाते हैं सर्वे? कारण समझिए

Exit Poll 2025 Result (Bihar Election 2025): बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का मतदान पूरा हो चुका है और अब सबकी निगाहें 14 नवंबर के नतीजों पर टिकी हैं। लेकिन उससे पहले एग्जिट पोल्स ने एक बार फिर सूबे की सियासत को गरमा दिया है। 10 से ज्यादा एजेंसियों के 'पोल ऑफ पोल्स' के मुताबिक इस बार एनडीए को 150 से ज्यादा सीटें मिल सकती हैं, जबकि महागठबंधन 85 से 90 सीटों पर सिमट सकता है। Axis My India जैसी बड़ी एजेंसियों ने भी एनडीए की सरकार बनने की भविष्यवाणी की है।

▶️ एग्जिट पोल में NDA आगे, लेकिन भरोसा कितना सही?

Axis My India के ताजा सर्वे के मुताबिक, बिहार की 243 विधानसभा सीटों में NDA को 121 से 141 सीटें मिलने की संभावना है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाला महागठबंधन 98 से 118 सीटें हासिल कर सकता है। RJD 67 से 76 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है, जबकि JDU को 56-62 और BJP को 50-56 सीटें मिलने का अनुमान है। प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी और असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम को दो-दो सीटें मिल सकती हैं। लेकिन सवाल यह है-क्या इन सर्वे के आंकड़ों पर आंख मूंदकर भरोसा किया जा सकता है?

Exit Poll 2025 Result Bihar Election 2025

अगर आप भी आंख बंद कर इन एग्जिट पोल पर भरोसा कर सकते हैं तो जरा सोचिए ये ''Exit'' पोल है, "Exact" पोल नहीं! पिछले कुछ चुनावों में एग्जिट पोल के आंकड़े ज्यादातर वक्त गलत साबित हुए हैं। बिहार के संदर्भ में तो ये अक्सर गलत साबित होते हैं। बिहार का चुनावी इतिहास तो कुछ और ही कहानी कहता है। ऐसे में आइए समझने की कोशिश करते हैं कि एग्जिट पोल के आंकड़े बिहार में गलत कैसे हो जाते हैं।

▶️पिछले बिहार चुनाव का सबक: जब सभी एग्जिट पोल्स बुरी तरह फेल हुए

पिछले तीन विधानसभा चुनावों (2010, 2015 और 2020) के रुझान बताते हैं कि एग्जिट पोल करने वाली एजेंसियां बिहार के मतदाताओं के असली मूड को ठीक से भांप नहीं पाईं। खासकर 2015 में ज्यादातर सर्वे में एनडीए (भाजपा गठबंधन) को बढ़त दी गई थी, लेकिन नतीजे आए तो महागठबंधन (राजद-जदयू-कांग्रेस) ने भारी बहुमत के साथ सबको चौंका दिया।

साल 2020 के विधानसभा चुनाव में लगभग सभी एग्जिट पोल्स ने तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन को विजेता बताया था। लेकिन नतीजों ने सबको चौंका दिया-नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए ने 125 सीटों के साथ सत्ता में वापसी की।

2020 के बिहार चुनाव में Today's Chanakya ने महागठबंधन को 180 सीटें और एनडीए को सिर्फ 55 सीटें दी थीं, जो पूरी तरह गलत साबित हुआ। India Today-Axis My India ने भी RJD गठबंधन की 139-161 सीटों की भविष्यवाणी की थी, जबकि एनडीए को 69-91 सीटें दी थीं। Times Now-CVoter और ABP-CVoter दोनों ने करीबी मुकाबला बताया था, लेकिन नतीजों में एनडीए ने स्पष्ट बहुमत ले लिया। सिर्फ दैनिक भास्कर का पोल थोड़ा सटीक निकला-उसने एनडीए को 120-127 सीटें दी थीं, जो असली नतीजों 125 सीटें से लगभग मेल खाती थीं।

▶️ आखिर बिहार में एग्जिट पोल क्यों हो जाते हैं गलत?

बिहार में एग्जिट पोल्स का ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है। वोट प्रतिशत का अनुमान कई बार ठीक बैठता है, लेकिन सीटों के हिसाब से हर बार समीकरण बिगड़ जाता है। इसके पीछे कई अहम कारण हैं।

🔹साइलेंट वोटर्स का असर

बिहार में एक बड़ा वर्ग "साइलेंट वोटर्स" का है, जो सर्वे में अपनी राजनीतिक पसंद जाहिर नहीं करता। ऐसे वोटर अकसर मतदान के वक्त अप्रत्याशित फैसला लेते हैं, जो पूरी तस्वीर बदल देता है। ऐसे वोटर वोट किसी और को देते हैं और सर्वे में पूछे जाने पर नाम किसी और का ले लेते हैं।

🔹माइग्रेंट वोटर्स की मुश्किल

बिहार के लाखों प्रवासी मजदूर देशभर में फैले हैं। कई लोग वोट डालने के बाद तुरंत अपने काम पर लौट जाते हैं। ऐसे में सर्वे एजेंसियों के लिए इन्हें सैंपल में शामिल करना लगभग असंभव होता है, जिससे डेटा अधूरा रह जाता है।

🔹जटिल जातीय समीकरण

बिहार की राजनीति जाति-आधारित वोटिंग पैटर्न पर टिकी है। यहां सवर्ण, ओबीसी, ईबीसी, एससी, एसटी और मुस्लिम वोट बैंक हर चुनाव में अलग-अलग तरह से शिफ्ट होते हैं। छोटे सैंपल साइज के कारण एजेंसियां इस बारीकी को पकड़ नहीं पातीं।

🔹महिला वोटर्स की भूमिका

बिहार में महिलाओं का वोटर टर्नआउट पुरुषों से लगातार अधिक रहा है। 2020 में जहां 59.69% महिलाओं ने वोट दिया था, वहीं पुरुषों का टर्नआउट सिर्फ 54.45% था। लेकिन महिलाएं सर्वे में खुलकर अपनी राय नहीं बतातीं, जिससे अनुमान बिगड़ जाता है।

▶️ एग्जिट पोल होता क्या है? (What is Exit Poll)

चुनाव के दौरान जनता का रुझान जानने के लिए दो तरह के सर्वे किए जाते हैं। वोटिंग से पहले होने वाले सर्वे को ओपिनियन पोल कहा जाता है और वोटिंग के दिन मतदाताओं से पूछे गए सर्वे को एग्जिट पोल। इसमें एजेंसियों के वॉलंटियर मतदान केंद्रों के बाहर वोट देकर लौट रहे लोगों से सवाल पूछते हैं कि उन्होंने किस पार्टी को वोट दिया। उन्हीं जवाबों के आधार पर नतीजों का अनुमान तैयार किया जाता है।

आमतौर पर एग्जिट पोल के परिणाम आखिरी चरण की वोटिंग खत्म होने के कुछ घंटे बाद जारी किए जाते हैं। ये सर्वे जनता का मूड भांपने की कोशिश तो करते हैं, लेकिन बिहार जैसे राज्य में जहां राजनीति जाति, भावना और क्षेत्रीय मुद्दों पर निर्भर करती है, वहां "Exit" और "Exact" के बीच का फर्क काफी बड़ा हो जाता है।

▶️ नतीजों से पहले अनुमान, लेकिन भरोसा संभलकर

2025 के एग्जिट पोल्स एक बार फिर एनडीए की वापसी की भविष्यवाणी कर रहे हैं, मगर बिहार का इतिहास बताता है कि यहां राजनीति हर बार गणित को मात देती है। इसलिए 14 नवंबर को जब असली नतीजे सामने आएंगे, तब ही तय होगा कि इस बार एग्जिट पोल सटीक निकले या फिर एक बार फिर बिहार ने सारे अनुमान पलट दिए।

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