Bihar Chunav: दूसरे चरण में बाहुबल का जलवा, कहीं बाहुबली की पत्नी आमने-सामने, कहीं बेटे ने थामी पिता की विरासत
Bihar Election 2025 Phase 2 (Bahubali Candidate): बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का दूसरा चरण बाहुबलियों और उनके परिवारों के लिए किसी अखाड़े से कम नहीं है। 11 नवंबर को 20 जिलों की 122 सीटों पर मतदान होगा, जहां कुल 1302 उम्मीदवार मैदान में हैं। लेकिन असली चर्चा उन चेहरों की है जिनकी पहचान राजनीति से ज्यादा बाहुबल और अपराधी छवि से जुड़ी रही है। कई जगहों पर पत्नियां आमने-सामने हैं, तो कहीं बेटों ने पिता की विरासत थाम ली है।
वारिसलीगंज में दो बाहुबली की पत्नी आमने-सामने
बिहार चुनाव 2025 में वारिसलीगंज सीट इस बार खास सुर्खियों में है, जहां बाहुबली राजनीति के दो घराने आमने-सामने हैं। यहां भाजपा से अरुणा देवी और राजद से अनीता देवी चुनाव लड़ रही हैं। दोनों ही उम्मीदवार बिहार के कुख्यात बाहुबलियों की पत्नियां हैं।

नवादा की वारिसलीगंज सीट इस बार सबसे हाई प्रोफाइल मुकाबलों में गिनी जा रही है। यहां भाजपा की उम्मीदवार अरुणा देवी, जो बाहुबली अखिलेश सिंह की पत्नी हैं, का सामना राजद प्रत्याशी अनिता देवी से है, जो कुख्यात अशोक महतो की पत्नी हैं। दोनों परिवारों के बीच पुरानी वर्चस्व की जंग अब चुनावी मैदान में उतर आई है। अरुणा देवी मौजूदा विधायक हैं, जबकि अनिता देवी ने 2024 लोकसभा चुनाव में मुंगेर से किस्मत आजमाई थी।
🔹 कौन हैं बाहुबली अशोक महतो की पत्नी अनीता देवी?
अनीता देवी, जेल ब्रेक कांड में 17 साल की सजा काट चुके अशोक महतो की पत्नी हैं। अशोक महतो का नाम नवादा, शेखपुरा और जमुई के इलाकों में सक्रिय 'महतो गिरोह' से जुड़ा रहा है। उनके जीवन पर आधारित वेब सीरीज़ 'खाकी: द बिहार चैप्टर' ने उन्हें फिर से सुर्खियों में ला दिया था। अशोक महतो चुनाव नहीं लड़ सकते, इसलिए इस बार उनकी जगह पत्नी अनीता मैदान में हैं। उन्होंने रेलवे सेंट्रल हॉस्पिटल की अपनी नौकरी छोड़कर राजनीति में कदम रखा।

🔹 कौन हैं बाहुबली अखिलेश सिंह की पत्नी अरुणा देवी?
वहीं भाजपा प्रत्याशी अरुणा देवी, 90 और 2000 के दशक के बाहुबली अखिलेश सिंह उर्फ अखिलेश सरदार की पत्नी हैं। अखिलेश का प्रभाव नवादा, शेखपुरा, जमुई और नालंदा तक फैला था। पिछले दो दशकों से वारिसलीगंज सीट पर इन्हीं दो परिवारों का दबदबा रहा है कभी अशोक महतो परिवार, तो कभी अखिलेश सिंह परिवार। इस बार दोनों घराने की महिलाएं सीधे टक्कर में हैं, जिससे मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।

🔹 नबीनगर में आनंद मोहन के बेटे चेतन की एंट्री
औरंगाबाद जिले की नबीनगर सीट पर इस बार बाहुबली नेता आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद को जदयू ने मैदान में उतारा है। चेतन 2020 में राजद के टिकट पर शिवहर से विधायक बने थे, लेकिन इस बार उन्होंने पार्टी बदली है। उनका मुकाबला राजद उम्मीदवार अमोध चंद्रवंशी से है। नबीनगर में मुकाबला सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि पीढ़ियों के संघर्ष की कहानी भी बन गया है।
🔹 बेलागंज में दो पुराने घरानों की टक्कर
गया जिले की बेलागंज सीट पर भी बाहुबली राजनीति का रंग साफ दिख रहा है। यहां राजद सांसद सुरेंद्र यादव के बेटे विश्वनाथ यादव मैदान में हैं। उनका सामना जदयू विधायक मनोरमा देवी से है, जो दिवंगत बाहुबली बिंदी यादव की पत्नी हैं। दोनों परिवार लंबे समय से स्थानीय राजनीति के प्रभावशाली चेहरे माने जाते हैं।
🔹 नवादा में राजबल्लभ यादव की पत्नी को जदयू का टिकट
नवादा सीट से जदयू ने विभा देवी, यानी बाहुबली राजबल्लभ यादव की पत्नी को उम्मीदवार बनाया है। उनका मुकाबला राजद के कौशल यादव से है। राजबल्लभ यादव पहले नाबालिग से रेप केस में जेल में थे, लेकिन बरी होने के बाद जदयू में शामिल हो गए। अब उनकी पत्नी के कंधों पर राजनीतिक पुनर्वास का दारोमदार है।
🔹 पहले चरण में भी छाया रहा बाहुबली प्रभाव
पहले चरण में भी बिहार की राजनीति में बाहुबली नेताओं का बोलबाला देखने को मिला। मोकामा से जदयू के अनंत सिंह, जिन्हें लोग "छोटे सरकार" कहते हैं, जेल में बंद रहते हुए भी चर्चा में बने रहे। दानापुर से राजद के विधायक रीतलाल यादव जेल में हैं, लेकिन उनका चुनाव प्रचार परिवार संभाल रहा है। वहीं सीवान के रघुनाथपुर में दिवंगत शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब पहली बार चुनावी मैदान में उतरे हैं, जिन पर पिता की विरासत बचाने का दबाव है। गोपालगंज के पप्पू पांडे, सारण के धूमल सिंह जैसे नामों ने भी पहले चरण में माहौल गर्म रखा था।
🔹 दूसरे चरण में बाहुबल और सियासत की मिली-जुली तस्वीर
दूसरे चरण के चुनाव में बिहार की राजनीति एक बार फिर यह दिखा रही है कि राज्य में बाहुबल और वोटबैंक की केमिस्ट्री अब भी खत्म नहीं हुई है। कई सीटों पर जातीय समीकरण के साथ बाहुबली परिवारों का प्रभाव निर्णायक साबित हो सकता है।
11 नवंबर को मतदान और 14 नवंबर को नतीजे साफ करेंगे कि क्या बाहुबलियों की ताकत इस बार भी बिहार की सियासत में असर दिखा पाती है या जनता नए चेहरों को मौका देती है।












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