कौन बनेगा NDA का मुख्यमंत्री? क्यों BJP नीतीश को दरकिनार नहीं कर पा रही, सीटों का गणित बताता है असली सच्चाई!

Bihar Election 2025 (Nitish Kumar CM face): बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, NDA के अंदर मुख्यमंत्री पद को लेकर सस्पेंस गहराता जा रहा है। महागठबंधन ने जहां तेजस्वी यादव को सीएम फेस घोषित कर चुनावी मैदान में स्पष्ट संदेश दे दिया है, वहीं NDA की तरफ से अब तक कोई चेहरा सामने नहीं आया है।

गृह मंत्री अमित शाह के बयान ने और बहस छेड़ दी कि "चुनाव के बाद विधायक दल तय करेगा कि सीएम कौन बनेगा।" इस एक लाइन ने ही पूरे बिहार में राजनीतिक हलचल मचा दी है। अब सवाल यही है क्या चुनाव के बाद बीजेपी नीतीश कुमार को किनारे कर अपना मुख्यमंत्री बनाएगी? या फिर उन्हें एक बार फिर "जनता का चेहरा" बनाकर सत्ता में भेजेगी? राजनीतिक समीकरणों और आंकड़ों की नजर से देखें तो बीजेपी के लिए नीतीश को दरकिनार करना आसान नहीं है। आइए समझते हैं क्यों।

Bihar Election 2025 Nitish Kumar CM face

🔹 71 सीटों का गणित तय करेगा फैसला

इस बार जेडीयू 101 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। इनमें से 71 सीटें ऐसी हैं, जहां नीतीश कुमार की जेडीयू का मुकाबला सीधा तेजस्वी यादव की आरजेडी और लेफ्ट दलों से है। यानी 70% से ज्यादा सीटों पर नीतीश और तेजस्वी आमने-सामने हैं। ये वही रणनीति है जो बिहार की राजनीति में सालों से देखी जाती है, नीतीश और लालू/तेजस्वी एक-दूसरे के खिलाफ ज्यादा सीटों पर लड़ें ताकि भाजपा पर निर्भरता कम रहे।

2020 के चुनाव में भी यही हुआ था। तब 71 सीटों पर दोनों में मुकाबला हुआ और उसमें से 48 सीटें तेजस्वी यादव जीत गए, जबकि जेडीयू केवल 21 सीटें ही निकाल पाई। यानी तेजस्वी की स्ट्राइक रेट 67.6% रही थी। इससे यह साफ है कि इन 71 सीटों के विधायक अगर जीतकर आएंगे, तो उनकी भाजपा के साथ निकटता बहुत सीमित होगी। यानी बाद में बीजेपी अगर मुख्यमंत्री बदलने की कोशिश करे तो नीतीश के पास अपने "वफादार विधायक" मौजूद रहेंगे।

🔹 चिराग और कुशवाहा के साथ आने से जेडीयू की पकड़ मजबूत

2020 में जब चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था, तब NDA को भारी नुकसान हुआ था। आंकड़ों के मुताबिक, उस वक्त जेडीयू को चिराग के कारण 36 सीटों और कुशवाहा के कारण 5 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा।

यानी कुल मिलाकर 41 सीटें सिर्फ इन दो नेताओं के अलग लड़ने की वजह से गईं।अब 2025 में दोनों नेता NDA में वापस आ चुके हैं। इसका सीधा फायदा जेडीयू को मिलेगा, क्योंकि ये दोनों ही पिछड़ा-दलित वोट बैंक में नीतीश के लिए बैकअप का काम करेंगे। अगर ये सीटें वापसी करती हैं, तो जेडीयू फिर से मजबूत स्थिति में होगी और तब बीजेपी के लिए नीतीश को "रिप्लेस" करना लगभग असंभव होगा।

🔹 चिराग की 13 सीटें NDA के लिए 'नो विन जोन'

NDA की तीसरी बड़ी पार्टी चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास) को इस बार 29 सीटें दी गई हैं। इसमें से 26 सीटें ऐसी हैं जहां 2020 में NDA हार गया था, और 13 सीटें तो ऐसी हैं जहां पिछले 15 साल से NDA नहीं जीता है।

यानी इन सीटों पर पार्टी की जीत सुनिश्चित नहीं है। अगर एलजेपी के खाते में बहुत कम सीटें आती हैं, तो जेडीयू और नीतीश की अहमियत स्वाभाविक रूप से बढ़ जाएगी। यही कारण है कि भाजपा चाहकर भी नीतीश को किनारे करने का जोखिम नहीं उठा सकती।

🔹 क्या बीजेपी बनाएगी 'अपना सीएम'? मुश्किल है समीकरण

कई राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बीजेपी के भीतर "अपना मुख्यमंत्री" बनाने की ख्वाहिश भले पुरानी हो, लेकिन इस बार वह समीकरण उतना आसान नहीं है। क्योंकि जेडीयू भले कम सीटों पर लड़े, लेकिन उसकी जीतने वाली सीटें RJD के खिलाफ होंगी, जिससे भाजपा के दबाव की गुंजाइश कम रह जाएगी।

अगर बीजेपी ने चुनाव बाद मुख्यमंत्री बदलने की कोशिश की, तो नीतीश के पास RJD में लौटने का विकल्प हमेशा खुला रहेगा। बिहार में राजनीतिक इतिहास गवाह है कि नीतीश कभी भी पाला बदलने में झिझके नहीं हैं।

14 नवंबर को नतीजे जो भी हों, लेकिन संकेत साफ है भाजपा की रणनीति चाहे जितनी आक्रामक क्यों न हो, नीतीश कुमार अभी भी NDA की राजनीति के "पावर बैलेंसर" बने हुए हैं। जेडीयू के पास इतनी सीटें भले न हों कि वह सरकार अकेले बना सके, लेकिन इतनी जरूर हैं कि बिना उनके बीजेपी का मुख्यमंत्री बनना लगभग नामुमकिन है।

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