Bihar: लैंड फॉर जॉब केस में आज ईडी के सामने तेजस्वी यादव की पेशी, जानें पूछताछ से पहले क्या बोले?
Bihar Land For Job Scam Case: लैंड फॉर जॉब स्कैम केस यानी नौकरी के बदले जमीन घोटाला मामले में बिहार के उपमुख्यमंत्री और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव की आज प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने पेशी है। ऐसे में ईडी के नए समन पर तेजस्वी यादव ने कहा कि यह ये एजेंसियां क्या करेंगी? उन पर भी दबाव है।
दरअसल, ईडी ने 'रेलवे में नौकरी के बदले जमीन' मामले की जांच में तेजस्वी यादव और उनके पिता आरजेडी प्रमुख लालू यादव को पूछताछ के लिए तलब किया था। तेजस्वी को 22 दिसंबर को पेश होने के लिए समन भेजा था, जिसे लेकर आज (शुक्रवार) उनको ईडी के सामने पेश होना है।

अपनी पेशी से पहले गुरुवार को तेजस्वी यादव ने पटना में मीडिया से बात करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह अब रूटीन हो गया है।
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ईडी के सामने पेश होने को लेकर तेजस्वी यादव ने कहा, "मैं हमेशा से जा रहा हूं, ये तो रूटीन है। मैं पहले भी गया हूं। 2017 से 2023 तक मैं नियमित रूप से जाता रहा हूं चाहे मुझे ईडी, इनकम टैक्स या सीबीआई ने बुलाया हो।"
#WATCH | Patna: On ED's summon, Bihar Deputy CM Tejashwi Yadav says, "I have been going since always, it's a routine. I have gone earlier as well. From 2017 to 2023, I have been going regularly whether ED, Income Tax or CBI called me. What would these agencies do, they are also… pic.twitter.com/hGCRw0Huz5
— ANI (@ANI) December 21, 2023
एजेंसियां के बहाने केंद्र पर निशाना
तेजस्वी यादव ने आगे कह कि ये एजेंसियां क्या करेंगी, उन पर भी दबाव है। यह अब एक रूटीन बन गया है। मैंने पहले भी कहा है एक बार मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में चुनाव संपन्न हो जाएं, तो ये एजेंसियां बिहार, झारखंड और दिल्ली में काम करेंगी।
अप्रैल में भी हुई थी ईडी के सामने पेशी
मालूम हो कि तेजस्वी यादव इससे पहले इस साल अप्रैल में ईडी के सामने पेश हुए थे। वहीं दिल्ली, बिहार सहित कई स्थानों पर तलाशी भी ली गई थी। हाल ही में सीबीआई ने पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और अन्य के खिलाफ लैंड फॉर जॉब्स कथित घोटाला मामले में आरोप पत्र दायर किया है।
क्या हैं आरोप?
बता दें कि सीबीआई ने 18 मई, 2022 को तत्कालीन केंद्रीय रेल मंत्री लालू यादव और उनकी पत्नी, दो बेटियों और अज्ञात लोक सेवकों और निजी व्यक्तियों सहित अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोप है कि 2004-2009 के दौरान तत्कालीन केंद्रीय रेल मंत्री ने अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर रेलवे के विभिन्न जोनों में समूह "डी" पदों पर प्रतिनियुक्तों की नियुक्ति के बदले में भूमि संपत्ति के हस्तांतरण आदि के रूप में आर्थिक लाभ हासिल किया था।












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