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बिहार चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका, कार्यकारी अध्यक्ष रहे इस नेता ने छोड़ा 'हाथ', JDU में हुए शामिल

Ashok Ram joins JDU, quits Congress: बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को करारा झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष रह चुके अशोक राम ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। अशोक राम सिर्फ एक विधायक नहीं, बल्कि दलित समुदाय में पार्टी के मजबूत चेहरे माने जाते रहे हैं।

वहीं अशोक राम रविवार (3 अगस्त) को ही नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू में शामिल हुए। उनके इस कदम ने न केवल कांग्रेस की रणनीतिक स्थिति को प्रभावित किया है, बल्कि आगामी चुनावों से पहले दलित वोट बैंक पर पकड़ को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

Ashok Ram joins JDU quits Congress

6 बार के विधायक रहे हैं

अशोक राम बिहार की राजनीति के एक पुराने और कद्दावर दलित नेता हैं। वे छह बार विधायक रह चुके हैं और कांग्रेस के बड़े चेहरों में गिने जाते हैं। अशोक राम बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष, राज्य सरकार में मंत्री, और कांग्रेस विधायक दल के नेता भी रह चुके हैं। साथ ही, वे कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य भी रहे हैं।

राजनीति में उनकी पहचान एक मजबूत दलित नेता के रूप में रही है। वे उस सामाजिक वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं जो बिहार की राजनीति में एक अहम भूमिका निभाता है। अशोक राम लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े रहे, लेकिन हालिया वर्षों में पार्टी के अंदर उन्हें दरकिनार किया जाने लगा।

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क्यों छोड़ा अशोक राम ने कांग्रेस?

हाशिये पर धकेलने का आरोप: कांग्रेस में वर्षों की सेवा के बावजूद अशोक राम को लगातार दरकिनार किया जा रहा था। जब कृष्णा अल्लावरू को बिहार कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया, तब से अशोक राम की स्थिति और भी कमजोर होती चली गई। उन्हें पार्टी के अहम फैसलों और कार्यक्रमों से अलग-थलग रखा गया।

जातीय संतुलन से असहमति: अशोक राम जिस जाति से आते हैं, उसी जाति के राजेश राम को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया, जबकि अशोक राम कहीं अधिक वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं। यह बात उन्हें और उनके समर्थकों को अखर गई।

राजनीतिक भविष्य की चिंता: लगातार उपेक्षा और संगठन में घटती भूमिका के चलते अशोक राम ने अन्य विकल्पों की तलाश शुरू की। उन्हें जेडीयू में वह स्पेस और सम्मान दिखा जिसकी उन्हें कांग्रेस में कमी महसूस हो रही थी।

दलित राजनीति की नई दिशा: अशोक राम का मानना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दलितों के लिए जमीन पर काम किया है। यही वजह है कि अब दलित समाज में कांग्रेस की बजाय जेडीयू की ओर झुकाव बढ़ रहा है, और वे इसी सामाजिक धारा के साथ चलना चाहते हैं।

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जेडीयू ने क्या कहा?

अशोक राम के जेडीयू में शामिल होने को लेकर पार्टी में उत्साह और सियासी आत्मविश्वास साफ दिखाई दे रहा है। जेडीयू नेताओं ने इसे सिर्फ एक दलित नेता की वापसी नहीं, बल्कि कांग्रेस और आरजेडी से मोहभंग की बड़ी मिसाल बताया है। बिहार सरकार में मंत्री और जेडीयू के दलित चेहरे अशोक चौधरी ने कहा, 'कांग्रेस में टिकट वितरण से लेकर संगठनात्मक कामकाज तक हर जगह अव्यवस्था है। कई वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार किया जा रहा है। ऐसे में स्वाभाविक है कि नेता अब विकल्प खोज रहे हैं।'

वहीं जेडीयू ने दावा करते हुए कहा कि, कांग्रेस और आरजेडी के कई बड़े नेता उनके संपर्क में हैं। फिलहाल पार्टी यह आकलन कर रही है कि किसे अपने साथ जोड़ा जाए और किसे नहीं।

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