Patna Hotels Price: बिहार चुनाव में पटना के होटल्स की डिमांड आसमान पर, 20 हजार तक पहुंचा एक रात का किराया
Patna Hotels Price: बिहार में जैसे-जैसे चुनावी पारा चढ़ रहा है, वैसे-वैसे राजधानी पटना की रौनक भी बढ़ती जा रही है। सड़कों पर पोस्टर, गलियों में प्रचार गाड़ियां और हर होटल में राजनीतिक हलचल, ऐसा नज़ारा शायद ही कभी देखने को मिलता है।
चुनावी मौसम ने पटना के होटल कारोबार को भी जोश से भर दिया है। अब हालत यह है कि शहर के बड़े होटल्स में एक भी कमरा खाली नहीं है। चाहे दशकों पुराना होटल मौर्य हो या नया ताज होटल, हर जगह 'हाउसफुल' का बोर्ड टंगा है। नेताओं से लेकर मीडिया कर्मियों तक, सबने यहां डेरा डाल रखा है।

बड़े होटल्स में कमरे फुल
पटना के पुराने और नामी होटल जैसे मौर्य, चाणक्य और हाल ही में खुले ताज होटल में एक भी कमरा खाली नहीं है। होटल मौर्य के कॉन्फ्रेंस हॉल और लॉबी अब राजनीतिक मीटिंग्स और न्यूज चैनलों के डिबेट सेट्स में बदल गए हैं। होटल प्रबंधन के अनुसार, कई राजनीतिक दल पहले से ही कमरे बुक करा लेते हैं ताकि आखिरी वक्त पर परेशानी न हो।
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कमरे की कीमत 20 हजार तक पहुंची
ऑनलाइन ट्रैवल पोर्टल्स के मुताबिक, ताज होटल में एक रात का किराया 18 हजार से 20 हजार रुपये तक जा पहुंचा है। IHCL ग्रुप के बजट होटल में भी सभी कमरे पहले से बुक हैं। यानी आम यात्रियों के लिए अब राजधानी में ठहरना मुश्किल हो गया है।
होटल इंडस्ट्री पर दबाव
पटना में होटल इंडस्ट्री मांग के मुकाबले अपनी क्षमता नहीं बढ़ा पाई है। होटल मौर्य और चाणक्य जैसे प्रतिष्ठित होटल करीब चार दशक पुराने हैं। राज्य सरकार के अधीन जो होटल हैं, वे इस समय मरम्मत के दौर से गुजर रहे हैं। 90 के दशक और शुरुआती 2000 के समय में खराब कानून-व्यवस्था के कारण नए होटल निवेश नहीं हुए। शराबबंदी के बाद भी होटल कारोबार को नुकसान पहुंचा, क्योंकि कई लोग अब डे ट्रिप में ही लौट जाते हैं।
सिर्फ पटना ही नहीं, गया, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे अन्य बड़े शहरों में भी अच्छे होटलों की भारी कमी है। यही कारण है कि बिहार अब भी पर्यटन और व्यवसायिक आयोजनों के मामले में पड़ोसी राज्यों से पीछे है।
तेजी से बढ़ती बिहार की अर्थव्यवस्था और निवेश की संभावनाओं को देखते हुए कुछ अंतरराष्ट्रीय होटल चेन राज्य में आने की योजना बना रही हैं। हालांकि, ये योजनाएं चुनाव परिणामों पर निर्भर करेंगी। फिलहाल, चुनावी हलचल ने पटना के होटल कारोबारियों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है, क्योंकि कमरों की किल्लत अब उनकी कमाई का बड़ा जरिया बन चुकी है।
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