Bihar Chunav Kissa CM Ka: गजब हैं बिहार के ये सीएम, बर्थडे पार्टी में पत्तल में बैठकर खाना खाते आए थे नजर!
Bihar Chunav Kissa CM Ka: राजनीति में सत्ता, शानो-शौकत और सुरक्षा के साथ चलना आम बात है। यूपी के पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव और मायावती तो अपने भव्य और शानदार जन्मदिन समारोह के लिए भी जाने जाते हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हमेशा से इन सबके बीच एक अलग मिसाल रहे हैं। उनका जीवन सादगी और अनुशासन का प्रतीक रहा है। उनके विपक्षियों ने भी कभी उन पर आलीशान जिंदगी जीने को लेकर तंज नहीं कसा। राजनीति में आने के बाद भी उनका जीवन बहुत सादा रहा है।
नीतीश कुमार पर उदय कांत की लिखी किताब 'नीतीश कुमार: अंतरंग दोस्तों की नजर से' में उनके जीवन, संघर्ष और व्यक्तित्व के अनछुए पहलुओं को देखने का नजरिया मिलता है। इस किताब में उनकी कैबिनेट में मंत्री रहे एक नेता के हवाले से खास प्रसंग का जिक्र है।

Bihar Chunav Kissa CM Ka: पत्तल में खाते दिखे थे नीतीश
किताब में नीतीश की कैबिनेट के मंत्री के हवाले से इस प्रसंग का जिक्र किया गया है। किताब में जिक्र किए गए प्रसंग के मुताबिक, मुख्यमंत्री बनने के बाद एक बार उनके जन्मदिन के अवसर पर उनके एक करीबी मंत्री उनसे मिलने पहुंचे। आम तौर पर नेताओं के जन्मदिन पर बड़ी दावत होती है। मंत्री को उम्मीद थी कि शायद ऐसा ही भव्य आयोजन होगा। हालांकि, जब वह सीएम आवास पहुंचे, तो हैरान रह गए। वहां कोई विशेष दावत या औपचारिक कार्यक्रम नहीं था। उन्होंने मंत्री को सादगी से अपने सरकारी आवास के एक कोने में आमंत्रित किया और पत्ते की थाली में खाना परोसा। दोनों वहीं सीढ़ियों पर बैठकर सादा भोजन करने लगे।
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मंत्री से मुस्कुराते हुए नीतीश कुमार ने कहा, 'नेता का भोजन जनता जैसा होना चाहिए। सादगी से रहना ही सच्ची सेवा है।' लगभग दो दशक से वह बिहार की सत्ता में शीर्ष पर हैं, लेकिन इसके बावजूद आज भी सादगी से रहते हैं। यहां तक कि उनका परिवार भी अब तक राजनीति में नहीं आया है और कभी मीडिया या सार्वजनिक जीवन में परिवार के सदस्य शामिल नहीं हुए।
Nitish Kumar के लिए यह चुनाव अग्निपरीक्षा
नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक सफर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। चुनावी हार और असफलताएं भी देखीं और प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी का स्वाद भी चखा। इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर वह राजनीति में आ गए और फिर सांसद, रेल मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री जैसी जिम्मेदारियां निभाईं। इस बार का बिहार चुनाव उनके लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। उनके सामने महागठबंधन को हराने की चुनौती है। इस बार प्रशांत किशोर की जनसुराज के मैदान में होने की वजह से मुकाबला त्रिकोणीय होता दिख रहा है।
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