बिहार: नीतीश शासन में 5 साल 4 बड़े हादसे, सैकड़ों मौतें, जिम्मेदार कौन?
मकर सक्रांति की शाम पटना के एनआईटी घाट के पास पतंगोत्सव के दौरान लोग गंगा में समा गए जिसमें 25 लोगों की मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे में कई लोगों के घर का चिराग बुझ गया तो कई की मांग सुनी हो गई।
पटना। पहली बार ही ऐसा नहीं हुआ है कि त्योहारों की ख़ुशी में दुख भरे आंसू निकले हो और त्योहारों की खुशी गम में बदल गई हो। इससे पहले भी कई ऐसे त्योहारों के मौसम में दर्दनाक हादसे हुए हादसे हुए हैं। जिसमें पूरे बिहारवासी को फूट-फूट कर रोते हुए देखा गया है। दरअसल, हर हादसा दिल दहलाने वाला था। उस वक्त को याद करके ही जहां बदन सिहर जाता हो तो जरा सोचिए उस वक्त का नजारा क्या होगा। लेकिन, हर हादसे के बाद बिहार की राजनीति में आरोप प्रत्यारोप का दौर फिर मौजूदा सरकार के द्वारा जांच का लंबा चौड़ा दावा। ये भी पढ़ें: बिहार नाव हादसा: आंखों में आंसू और अपनों की तलाश में भटकते लोग

हादसे से कुछ भी नहीं सीखी सरकार
अभी तक ना तो इस हादसे की जांच में किसी अधिकारी को दोषी ठहराया गया है और ना ही किसी को सजा दी गई। लेकिन, सबसे बड़ा सवाल अभी लोगों की जुबां पर है। क्या नीतीश सरकार इस हादसे से कुछ भी नहीं सीखी। हादसे में लोग काल के गाल में समाते गए और जांच के नाम पर अधिकारी उल्टे-सीधे दावे करते हुए मामले को ठंडा कर बस्ते में डालते गए। बता दें कि मकर सक्रांति की शाम पटना के एनआईटी घाट के पास पतंगोत्सव के दौरान लोग गंगा में समा गए जिसमें 25 लोगों के मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे में कई लोगों के घर का चिराग बुझ गया तो कई की मांग सुनी हो गई। जहां इस घटना से बिहारवासी रो रहे हैं। वहीं, इस हादसे की बात सरकार और प्रशासन अपनी नाकामी छिपाने के लिए कई तरह के हथकंडे अपना रहे हैं।
जिला प्रशासन अगर ध्यान देता तो शायद नहीं होता यह हादसा
जिला प्रशासन के द्वारा पटना के एनआईटी घाट पर उत्सव का आयोजन किया गया था। लेकिन इस आयोजन को लेकर जिला प्रशासन ने वैसी तैयारी नहीं की जो की जानी चाहिए थी। मकर सक्रांति की शाम पतंगोत्सव के दौरान 30 से 40 हजार लोग दियारा इलाके में गए थे। अगर सरकार के द्वारा इस तरह की व्यवस्था की जाती तो ये हादसा नहीं होता। हर बार जिला प्रशासन और सरकार की अनदेखी की वजह से हादसा होता है और जिसमें बेगुनाह लोग काल के गाल में समा जाते हैं। वहीं, इस हादसे से लातूर जिला प्रशासन कुछ सीखने को तैयार ही नहीं है।
कुछ ऐसे हादसे जिसने रुला दिया था पटना की धरती को
जिला प्रशासन की लापरवाही से घटित हुई कुछ ऐसी घटनाओं के बारे में जिसने पटना के साथ-साथ बिहार की धरती को हिला कर रख दिया था। सबसे पहले बात करते हैं भारतीय जनता पार्टी के द्वारा बिहार में की जाने वाली हुंकार रैली के बारे में। जिसमें पहली बार देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पटना आये थे। पटना में चल रहे उनके कार्यक्रम के दौरान गांधी मैदान में एक के बाद एक विस्फोट से पूरा शहर दहल गया था। जिसमें 9 मासूम लोगों की जान चली गई थी। 11 नवंबर 2012 का दिन तो याद ही होगा, इस दिन कई लोगों ने अपनी मां ,बहन, बहु, बेटी को खोया था। यह हादसा भी कुछ इसी तरह का था। पटना के ही अदालत घाट पर छठ पूजा के दौरान भगदड़ मची थी। जिसमें 18 लोगों की जान चली गई थी। ये भी पढ़ें: दर्दनाक नाव हादसे पर पीएम मोदी ने जताया दुख, पटना कार्यक्रम स्थगित
बता दें कि बिहार में 3 अक्टूबर 2014 पटना के ही गांधी मैदान में रावण दहन हादसा। इस हादसे को लेकर बिहार एक बार फिर रोने लगा था। एक-एक कर कुल 33 लोग काल के गाल में समा गए थे। हादसे के बाद सरकार के द्वारा फिर से वही लंबा चौड़ा जांच का दावा पेश किया गया और जांच में क्या सामने आया ये किसी को नहीं पता चला। फिर वर्षो बाद पता चला कि पटना में हुए इस हादसे में सरकार के ऑफिसर और पटना के एसएसपी मनु महाराज बरी हो गये।
हादसे के बाद अधिकारियों का ट्रांसफर कर निशाने से बचती है सरकार
सरकार की यह पुरानी नीति है कि जब भी कोई भी घटना घटती है तो जिला प्रशासन और जिला एसपी को ट्रांसफर कर विपक्ष और सूबे की जनता का मुह बंद कर देती है। फिर वर्षो तक जांच का हवाला देते हुए मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है और फिर कुछ समय बाद मामले में अधिकारियों को निर्दोष साबित करने की बात सामने आती है। यह बात हम नहीं कह रहे हैं बल्कि सरकार की कानून व्यवस्था कह रही है।
इस घटना के बाद भी कुछ इसी तरह का मंजर सामने आया था जिस तरह का मंजर आज नाव हादसे के रूप में सामने आया है। चारों तरफ सरकार की किरकिरी हो रही थी। जिसे देखते हुए सरकार ने मामले में पटना के एसएसपी मनु महाराज को दोषी करार देते हुए ट्रांसफर कर दिया था। मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की थी। मनु महाराज दूसरे जिले में अपनी ड्यूटी कर रहे थे तो यह जांच कमेटी इस घटना की जांच। फिर लोगों ने इस हादसे पर चर्चा करना ही छोड़ दिया और धीरे-धीरे मामला ठंडे बस्ते में चला गया। फिर से एसएसपी मनु महाराज को पटना का एसएसपी बना दिया गया। इन घटनाओं से सरकार ने न तो कोई सबक लिया और न ही कोई सीख ली। अगर कोई सबक लिया होता तो एनआईटी घाट पर इतना बड़ा हादसा नहीं होता। ये भी पढ़ें: पटना: नाव डूबने से 23 लोगों की मौत, PM मोदी ने किया मुआवजे का ऐलान
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