टूट की कगार पर पहुंची बिहार कांग्रेस, पार्टी के 14 विधायक बागी होने को तैयार

कांग्रेस के 14 विधायक अपना एक अलग ग्रुप बनाकर पार्टी से निकलने की तैयारी कर रहे हैं और नीतीश कुमार की पार्टी जदयू में शामिल होने का मन बना रहे हैं। उन्हें बस अपने पार्टी के 4 और विधायकों का इंतजार है।

पटना। बिहार के सियासी गलियारे में चल रही बिहार कांग्रेस के टूट की खबर अब हकीकत में बदलने वाली है। ऐसा कहा जा रहा है कि कांग्रेस के 14 विधायक अपना एक अलग ग्रुप बनाकर पार्टी से निकलने की तैयारी कर रहे हैं और नीतीश कुमार की पार्टी जदयू में शामिल होने का मन बना रहे हैं। उन्हें बस अपने पार्टी के चार और विधायकों का इंतजार है ताकि अपनी विधायकी बरकरार रखने के लिए वो दो तिहाई आंकड़े पार कर सकें। बिहार में कांग्रेस पार्टी के 27 विधायक हैं। इसलिए इन विधायकों को 4 और विधायक का इंतजार है जिसके बाद कुल 18 विधायक बिहार कांग्रेस से टूटकर बाहर निकल जाएंगे।

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उल्लेखनीय है कि बिहार कांग्रेस में टूट की खबर को लेकर पार्टी के आलाकमान ने बिहार कांग्रेस विधायक दल के नेता सदानंद सिंह और बिहार कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी को दिल्ली बुलाया था। जहां मीटिंग के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी के भीतर चल रहे डैमेज कंट्रोल को सुधारने की बात कही और दोनों नेताओं पर नाराजगी जाहिर करते हुए इसे रोकने को कहा था।

जानिए क्यों टूट की कगार पर पहुंची बिहार कांग्रेस...?

बता दें कि बिहार कांग्रेस में 27 विधायकों के साथ-साथ 6 विधान पार्षद हैं। जिसमें से विधान पार्षद अशोक चौधरी और मदन मोहन झा और विधायक अब्दुल जलील मस्तान और अवधेश कुमार बिहार में चल रहे महागठबंधन सरकार में मंत्री थे। तो कुछ विधायक को राज्य के विभिन्न बोर्ड और निगमों में जगह मिलने कि बात बताई जा रही थी। इसी बीच जदयू और राजद के बीच शुरू हुए मतभेद में बिहार में चल रही महागठबंधन की सरकार टूट गई। जिसके बाद सारे अनुमान धरे के धरे रह गए। बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं करने या पद नहीं मिलने की लालच के साथ-साथ कांग्रेस के कुछ विधायकों पर जातियों के वोटों का भी दबाब था जो महागठबंधन की जीत के बाद लालू प्रसाद यादव की सत्ता में वापसी के कारण यादवों के दबदबा से काफी बेचैन हो रहे थे। इसी कारण बिहार कांग्रेस की टूट की बात सामने आई थी।

नीतीश की छवि ने बचा लिया नहीं तो कब की टूट गई होती बिहार कांग्रेस!

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    वहीं इस मामले को लेकर अगर बिहार के राजनीतिक जानकारों की मानें तो उन लोगों का ऐसा कहना है कि बिहार में जब महागठबंधन बना था तभी ही इन विधायको के बीच निराशा का भाव उत्पन्न हो गया था। लेकिन नीतीश कुमार की छवि को देखते हुए इन लोगों ने धैर्य का रास्ता अपनाया पर अब वह भी खत्म हो गया है। नीतीश कुमार के महागठबंधन का साथ छोड़ते ही विधायकों की निराशा खुलकर सामने आने लगी है हालांकि जदयू और बीजेपी गठबंधन को बहुमत का समर्थन हासिल है। पर अगर बिहार कांग्रेस में फूट हुई तो नीतीश कुमार को विरोधियों से निपटने में ज्यादा आसानी होगी।

    BJP और जदयू कर रही थी पार्टी तोड़ने की कोशिश....

    वहीं कांग्रेस पार्टी ने ये आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार में कांग्रेस को जेडीयू और भारतीय जनता पार्टी तोड़ने की कोशिश कर रही है। पार्टी प्रवक्ता आनंद शर्मा ने कहा कि पार्टी एकजुट है। जदयू भाजपा ने पार्टी तोड़ने की कोशिश की थी पर उनकी कोशिश विफल रही। तो बिहार कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि बिहार कांग्रेस के कई विधायकों द्वारा पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखित शिकायत देते हुए बिहार कांग्रेस को पूरी बात बताई गई थी। जिसके बाद पार्टी के आलाकमान ने प्रदेश अध्यक्ष और विधायक दल के नेता को दिल्ली बुलाया और उसके साथ बातचीत करते हुए स्थिति सुधारने का आदेश दिया था।

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