AIMIM Bihar Politics: महागठबंधन में ओवैसी 'अछूत'? जानिए क्यों कांग्रेस और RJD ने किया किनारा

Owaisi Mahagathbandhan Entry: बिहार की राजनीति में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई। लेकिन कांग्रेस ने इस पेशकश पर न सिर्फ सख्त ऐतराज जताया, बल्कि इसे पूरी तरह से खारिज भी कर दिया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने AIMIM को सांप्रदायिक पार्टी बताते हुए कहा,जो पार्टी पर्दे के पीछे से बीजेपी की मदद करती हो, उसे सेक्युलर गठबंधन में कोई जगह नहीं मिलनी चाहिए।"

इस बयान के साथ कांग्रेस ने AIMIM की दावेदारी को न केवल खारिज किया, बल्कि आरजेडी और अन्य सहयोगियों को भी स्पष्ट संकेत दे दिया कि अगर विपक्ष को एकजुट दिखना है, तो उसे सांप्रदायिक छवि वाली पार्टियों से परहेज करना होगा। आरजेडी ने भी कांग्रेस का साथ देते हुए AIMIM पर तीखा हमला बोला।

Owaisi Mahagathbandhan Entry

अखिलेश सिंह ने ओवैसी पर लगाए गंभीर आरोप

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और बिहार के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने AIMIM को सांप्रदायिक पार्टी करार देते हुए कहा, AIMIM जैसी पार्टी, जो हमेशा से बीजेपी की मदद करती रही है, उसके लिए विपक्षी सेक्युलर गठबंधन में कोई जगह नहीं हो सकती। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि AIMIM का असली उद्देश्य सेक्युलर वोटों में सेंध लगाकर भाजपा को फायदा पहुंचाना है। कुल मिलाकर कांग्रेस ने साफ संकेत दिया है कि उसे AIMIM पर कोई भरोसा नहीं है और वह ओवैसी की पार्टी को विपक्षी एकता में शामिल करने के पक्ष में नहीं है।

RJD और कांग्रेस दोनों की एक जैसी प्रतिक्रिया

आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने भी कांग्रेस के बातों का समर्थन करते हुए कहा, AIMIM बार-बार यह साबित कर चुकी है कि वह बीजेपी की 'बी टीम' बनकर काम करती है। ओवैसी की पार्टी का ट्रैक रिकॉर्ड यही रहा है कि वह हर बार सांप्रदायिक ताकतों को फायदा पहुंचाती है। उन्होंने यह भी कहा, हम हैदराबाद चुनाव लड़ने नहीं जाते, तो ओवैसी बिहार क्यों आते हैं? अगर वे वाकई सेक्युलर ताकतों की मदद करना चाहते हैं, तो उन्हें बिहार में चुनाव नहीं लड़ना चाहिए।

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महागठबंधन के लिए 'अछूत' क्यों हैं ओवैसी?

AIMIM को महागठबंधन (INDIA Bloc) में शामिल न करने के पीछे विपक्षी दलों के राजनीतिक, वैचारिक और रणनीतिक तीन बड़े कारण हैं। आइए समझते हैं कि क्यों असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी को लेकर विपक्ष इतना सख्त रुख अपना रहा है

1. 'बीजेपी की बी-टीम' वाली छवि

कांग्रेस और आरजेडी जैसी पार्टियों का आरोप है कि AIMIM हर बार बीजेपी को अप्रत्यक्ष फायदा पहुंचाती है। चुनावों में मुस्लिम वोटों को अलग कर, वह सेक्युलर वोटों का बंटवारा करती है, जिससे बीजेपी को सीधा लाभ होता है।

2. विचारधारा में टकराव

महागठबंधन का मकसद है धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय की राजनीति को मजबूत करना। वहीं AIMIM पर अक्सर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करने का आरोप लगता है। इससे महागठबंधन की 'सेक्युलर' छवि को नुकसान पहुंच सकता है।

3. स्थानीय समीकरण और रणनीति

बिहार जैसे राज्यों में जहां महागठबंधन की ताकत पिछड़े, दलित और मुस्लिम वोट बैंक में है, वहां AIMIM के आने से मुस्लिम वोटों में बिखराव की आशंका होती है। विपक्ष नहीं चाहता कि इन वोटों का कोई हिस्सा AIMIM के जरिए अलग हो और अंततः NDA को फायदा मिले।

4. ओवैसी की आक्रामक छवि और नेतृत्व टकराव

ओवैसी खुद को राष्ट्रीय नेता के तौर पर पेश करते हैं, जबकि महागठबंधन पहले से ही कई बड़े नेताओं और दलों का जमावड़ा है। ऐसे में उनकी एंट्री से नेतृत्व और सीट शेयरिंग को लेकर अंदरूनी विवाद बढ़ सकते हैं।

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