Anant Singh: बिहार के बाहुबली अनंत सिंह किस जाति से हैं? बड़े भाई भी थे विधायक, ‘छोटे सरकार' की अनसुनी कहानी
Anant Singh Biography: भारत की राजनीति में नेताओं का सफर उनकी जाति और सामाजिक पृष्ठभूमि से गहराई तक जुड़ा होता है। खासकर बिहार जैसे राज्यों में यह समीकरण और भी अहम हो जाते हैं, जहां हर विधानसभा सीट पर जातीय संतुलन ही तय करता है कि किसके पक्ष में हवा बहेगी। वनइंडिया हिंदी की खास सीरीज "जाति की पाती", आपको उन नेताओं की कहानी बताएगा, जिनकी जाति और पारिवारिक जड़ों ने उनके राजनीतिक करियर की दिशा तय की। आज की कड़ी में जिक्र है बिहार के बाहुबली और छोटे सरकार कहे जाने वाले नेता अनंत कुमार सिंह का।
बिहार की राजनीति में बाहुबलियों की भूमिका हमेशा से चर्चा का विषय रही है। इनमें सबसे बड़ा नाम है अनंत कुमार सिंह का, जिन्हें लोग प्यार से "अनंत दा" और "छोटे सरकार" भी कहते हैं। उनका सफर जितना विवादित रहा, उतना ही दिलचस्प भी। अनंत सिंह जेडीयू की टिकट पर मोकामा से चुनाव लड़े और फिर से मोकाम के किंग बन गए। अनंत कुमार सिंह मोकामा विधानसभा चुनाव 28 हजार वोटों से जीत गए हैं। उन्होंने RJD उम्मीदवार वीणा देवी को करारी हार दी है। अनंत सिंह वोटिंग से पहले दुलारचंद याजव हत्याकांड में गिरफ्तार किए गए। उन्होंने जेल में रहकर चुनाव जीता है। ऐसे आइए जानते हैं अनंत सिंह की जाति, पारिवारिक पृष्ठभूमि और राजनीति में उनकी पकड़ की पूरी कहानी।

भूमिहार जाति से आते हैं अनंत सिंह (Anant singh Caste)
अनंत सिंह का जन्म 1 जुलाई 1961 को पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल के नदमां गांव में हुआ। वे भूमिहार जाति से ताल्लुक रखते हैं। बिहार की कुल आबादी में भूमिहारों की संख्या करीब 2.86 प्रतिशत है। हालांकि यह आंकड़ा छोटा लगता है, लेकिन राजनीति में इनकी पकड़ बेहद मजबूत है। अनंत सिंह की छवि अपनी जाति में "रॉबिनहुड" जैसी रही है। यही वजह है कि जब भी वे चुनाव मैदान में उतरते हैं, भूमिहार मतदाता बड़ी संख्या में उनके साथ खड़े दिखाई देते हैं।
भूमिहार समाज में अनंत सिंह की पकड़ किसी से छिपी नहीं है। मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ते समय उन्हें भूमिहार वोटर्स का बड़ा समर्थन मिलता रहा है। माना जा रहा है कि इस बार भी उनका झुकाव जेडीयू और एनडीए के पक्ष में रहेगा। हालांकि, एक समय पर भूमिहार मतदाता नीतीश कुमार से नाराज हो गए थे, लेकिन अब उनकी नाराजगी काफी हद तक कम होती दिख रही है।

राजनीति में भाई से मिली एंट्री (Anant Singh Political Career)
अनंत सिंह चार भाइयों में सबसे छोटे हैं। उनके दो बड़े भाइयों-फाजो सिंह और बीरंची सिंह की हत्या हो चुकी है। जबकि बड़े भाई दिलीप सिंह की मौत बीमारी से हुई। पिता चंद्रदीप सिंह किसान थे। पारिवारिक त्रासदियों के बावजूद अनंत सिंह राजनीति की दुनिया में अपने लिए जगह बनाते गए।
अनंत सिंह की पहचान दबंग के तौर पर पहले से ही बन चुकी थी। लेकिन राजनीति में उनका पहला कदम उनके बड़े भाई दिलीप सिंह के जरिए हुआ। दिलीप सिंह 1990 और 1995 में मोकामा से विधायक बने। हालांकि 2000 का चुनाव वे हार गए। इसके बाद परिवार की राजनीतिक विरासत संभालने के लिए अनंत सिंह मैदान में उतरे और 2005 से लगातार इस सीट पर दबदबा बनाए रखा।
अनंत सिंह ने 2005 के विधानसभा चुनाव से अपनी सक्रिय राजनीतिक पारी की शुरुआत की। मोकामा सीट से उनका दबदबा इतना रहा कि वह लगातार चार बार विधायक चुने गए। फरवरी 2005 और अक्टूबर 2005 के साथ-साथ 2010 का चुनाव उन्होंने जेडीयू के टिकट पर जीता, जबकि 2015 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरकर भी अपनी जीत बरकरार रखी।

'छोटे सरकार' की छवि और बाहुबली नेता पर दर्जनों मामले दर्ज
अनंत सिंह को "छोटे सरकार" क्यों कहा जाता है, इसके पीछे भी किस्से हैं। एक बार उन्होंने पटना की सड़कों पर बग्घी में घूमते हुए खुद का वीडियो बनवाया। इस वीडियो के बैकग्राउंड में मशहूर गायक उदित नारायण का गाया गाना "छोटे सरकार" बज रहा था। इसके बाद से यह नाम उनकी पहचान बन गया।
उनकी दबंगई की कहानियां भी मशहूर हैं। हत्या, अपहरण, रंगदारी और जमीन कब्जाने जैसे कई मामलों में उनका नाम सामने आया। 2020 के चुनाव में दाखिल किए गए हलफनामे के मुताबिक, उन पर 38 आपराधिक मामले दर्ज हैं। बावजूद इसके मोकामा क्षेत्र के लोग उन्हें 'दादा' कहकर पुकारते हैं और खुलकर समर्थन भी करते हैं।
नीतीश कुमार से दोस्ती और राजनीति में मजबूती
अनंत सिंह की ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2004 के लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार खुद उन्हें अपने साथ जोड़ने के लिए आगे आए। बाढ़ में हुई एक रैली में अनंत सिंह ने नीतीश को चांदी के सिक्कों से तुलवा दिया था। भले ही नीतीश चुनाव हार गए, लेकिन यहीं से दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई।
2005 से 2015 के बीच अनंत सिंह की संपत्ति में जबरदस्त इजाफा हुआ। 2005 में जहां वे महज 3.40 लाख रुपये की संपत्ति घोषित करते थे, वहीं 2015 तक उनकी संपत्ति 28 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई।

अनंत सिंह के शौक भी बड़े, सनक भी अलग
अनंत सिंह सिर्फ राजनीति और बाहुबली छवि के लिए ही नहीं, बल्कि अपने अनोखे शौकों के लिए भी जाने जाते हैं। उन्हें घोड़ों का शौक है और कहते हैं कि अगर कोई घोड़ा पसंद आ जाए तो उसे किसी भी कीमत पर हासिल कर लेते हैं। एक बार उन्होंने लालू प्रसाद यादव का पसंदीदा घोड़ा भी किसी और के जरिए खरीद लिया था। लग्जरी गाड़ियों का भी उन्हें खासा शौक रहा है। हाल ही में उन्होंने ढाई करोड़ की कार ली है, जो चर्चा में रहा है।
राजनीति और अपराध का कॉकटेल
अनंत सिंह की पहचान हमेशा राजनीति और अपराध के बीच के संतुलन से जुड़ी रही। 2007 में जब उन पर एक महिला की हत्या और रेप का आरोप लगा, तो इस पर सवाल करने वाले पत्रकारों से उन्होंने बदसलूकी कर दी थी। यही वजह है कि मीडिया में उन्हें अक्सर विवादों में घिरा नेता बताया जाता है।
इसके बावजूद, मोकामा में उनका जलवा बरकरार रहा। स्थानीय लोग कहते हैं कि वे रात में घरों से बाहर निकलने से डरते थे, लेकिन जब बात अनंत दा की आती है तो वही लोग कहते हैं-"कुछ भी हो जाए, वोट तो हम दादा को ही देंगे।"

'छोटे सरकार' की अनसुनी कहानी
अनंत सिंह की कहानी सिर्फ बाहुबली नेता की नहीं, बल्कि उस राजनीति की भी है जिसमें जाति समीकरण, दबंगई और करिश्माई छवि सब मिलकर सत्ता का रास्ता बनाते हैं। भूमिहारों के वो बाहुबली नेता हैं तो विरोधियों के लिए खौफ का नाम।
उनकी जिंदगी उतार-चढ़ाव से भरी रही है-कभी जेल की सलाखों के पीछे, तो कभी विधानसभा में जनता की आवाज बनकर। यही कारण है कि आज भी जब मोकामा की गलियों में चुनावी चर्चा होती है, तो सबसे पहले नाम आता है "छोटे सरकार" का। अब देखना होगा कि इस चुनाव में क्या जनता उनका ऐसे सी सपोर्ट करेगी।












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