Bihar Chunav में NDA अब Amit Shah के भरोसे? जानकी मंदिर के बहाने 'चाणक्य' का चुनावी समर में संग्राम का ऐलान!
Amit Shah Bihar Chunav: बिहार विधानसभा चुनाव में अब कुछ महीने ही बचे हैं। सभी राजनीतिक दल और दोनों प्रमुख गठबंधन अपनी चुनावी तैयारियों, प्रचार योजना और उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया में जुट गए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक के बाद एक कई योजनाओं का ऐलान कर रहे हैं। इधर मिथिलांचल को बड़ी सौगात देते हुए जानकी मंदिर की आधारशिला भी रखी गई है और इसके शिलान्यास का जिम्मा अमित शाह को सौंपा गया है। माना जा रहा है कि बिहार चुनाव के लिए पार्टी और एनडीए (NDA) को जीत तक पहुंचाने के लिए उन्होंने चुनाव की जिम्मेदारी ले ली है।
Amit Shah ने जानकी मंदिर स्थापना को बताया अहम कदम
बिहार के सीतामढ़ी में लंबे समय से देवी सीता के मंदिर की मांग की जा रही थी। गृहमंत्री अमित शाह ने इसे मिथिलांचल और बिहार के लोगों के लिए गौरव बताया है। इस मंदिर का शिलान्यास नीतीश कुमार का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। इसका शिलान्यास शाह करेंगे और इसके पीछे प्रमुख सियासी संकेत भी माने जा रहे हैं। राजीनितक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या एनडीए के एक और दुर्ग को बचाने का जिम्मा उन्होंने अपने हाथ में ले लिया है?

मिथिलांचल की 60 सीटों पर Amit Shah का खास फोकस
बिहार के मिथिलांचल इलाके में 60 सीटें आती हैं और पिछले चुनाव में NDA ने 40 सीटें जीती थीं। सूत्रों के मुताबिक, इस बार भी विधानसभा चुनाव में पार्टी की रणनीति तय करने से लेकर उम्मीदवारों के चयन में खुद शाह अपने स्तर पर स्क्रूटनी करेंगे। इसके लिए उन्होंने बिहार को सीटवार कई इलाकों में बांटा है जिसमें सीमांचल, मिथिलांचल, दक्षिणी बिहार जैसे इलाके हैं। मिथिलांचल एनडीए का मजबूत गढ़ है और शाह का खास फोकस है कि इस बार इस क्षेत्र में पिछली बार के प्रदर्शन को और बेहतर करने का लक्ष्य उन्होंने तय किया है। इसे ध्यान में रखते हुए जानकी मंदिर शिलान्यास एक अहम कदम है।
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बता दें कि पीएम मोदी ने भी मिथिलांचल इलाके का कई बार दौरा किया है। पहलगाम हमले के बाद मधुबनी से ही पीएम ने आतंक के खिलाफ पूरी दुनिया को संदेश दिया था। पीएम मोदी ने दरभंगा एयरपोर्ट और एम्स जैसी सौगात इस इलाके को दी है।
बिहार विधानसभा चुनाव में दिखेगी अमित शाह की सक्रियता
चुनावी राजनीति के धुरंधर अमित शाह एक बार फिर बिहार चुनाव की कमान अपने हाथ में ले रहे हैं। हिंदी पट्टी के इस राज्य में पार्टी के लिए जीत जरूरी है, क्योंकि इसका असर दूसरे राज्यों के चुनाव तक पड़ सकता है। बिहार बीजेपी के नेता गुपचुप अंदाज में इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि इस बार के चुनाव में भी शाह ही केंद्रीय भूमिका में रहेंगे।
बिहार में पार्टी की जीत और अच्छे प्रदर्शन का असर सिर्फ प्रदेश की राजनीति तक नहीं रहेगा। इसका असर अगले साल होने वाले बंगाल चुनाव पर भी पड़ेगा। नीतीश कुमार भले ही अब कह रहे हों कि वह एनडीए छोड़कर नहीं जाएंगे, लेकिन उनके इतिहास को देखते हुए बीजेपी हाईकमान सतर्क है। पार्टी अपने दूसरे गठबंधन के दलों के साथ अपने प्रदर्शन पर फोकस कर रही है, ताकि नीतीश कुमार के पास पलटी मारने का स्कोप न बचे।
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