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'पाकिस्तान नेहरू की गलती', Amit Shah का कांग्रेस पर हमला, संसद में उठाया POK का मुद्दा

Amit Shah POK statement: संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार, 29 जुलाई को जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। विपक्ष की हो हल्ला और केंद्र पर आरोपों के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कांग्रेस और विशेष रूप से उसके नेताओं-पंडित जवाहरलाल नेहरू, सोनिया गांधी और राहुल गांधी-पर तीखा हमला बोला।

उन्होंने कांग्रेस की विदेश नीति को "कमजोर" करार देते हुए इसे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए लंबे समय से खतरा बताया। शाह ने कांग्रेस की चाइन पॉलिसी पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी की चीन के साथ की नजदीकियों पर कड़ा प्रहार बोला।

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Amit Shah का नेहरू की विरासत पर सीधा हमला

अमित शाह ने सबसे पहले भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को निशाने पर लिया और कहा, "POK (पाक अधिकृत कश्मीर) सिर्फ नेहरू जी की वजह से मौजूद है। अगर 1960 में उन्होंने पाकिस्तान को सिंधु नदी का 80% पानी न दे दिया होता, तो हालात कुछ और होते। 1971 में शिमला समझौते के दौरान कांग्रेस पीओके के मुद्दे को पूरी तरह भूल गई। अगर उन्होंने तब ही पीओके को वापस भारत में मिला लिया होता, तो आज हमें आतंकवाद के शिविरों पर सर्जिकल स्ट्राइक करने की जरूरत नहीं पड़ती।"

उन्होंने कहा कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने "आकाशवाणी पर भाषण देते हुए असम को अलविदा तक कह दिया था"। शाह ने इस बयान के ज़रिए कांग्रेस की उस समय की 'समर्पण की नीति' पर सवाल उठाया।

राहुल गांधी की चीन से 'निकटता' पर तंज

अमित शाह ने डोकलाम विवाद के समय राहुल गांधी की चीन के राजदूत से मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा, "जब हमारे जवान डोकलाम में चीनी सैनिकों का सामना कर रहे थे, तब राहुल गांधी चीन के राजदूत से मिल रहे थे। यह चीन प्रेम तीन पीढ़ियों से चला आ रहा है - नेहरू, सोनिया गांधी और अब राहुल गांधी तक।"

गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की प्रतिष्ठा को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने बताया कि "पीएम मोदी पूरी कोशिश कर रहे हैं कि भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की स्थायी सदस्यता मिले।"

पाकिस्तानी आतंकियों पर ऑपरेशन 'महादेव' की जानकारी

शाह ने सदन को यह भी बताया कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में शामिल लश्कर-ए-तैयबा के तीन पाकिस्तानी आतंकियों को 28 जुलाई को श्रीनगर के पास एक मुठभेड़ में मार गिराया गया। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई "ऑपरेशन महादेव" के तहत की गई और यह भारत की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा है।

BJP हमें दुश्मन ना समझें: विपक्ष का पलटवार

शाह के भाषण के बाद विपक्ष की ओर से द्रमुक सांसद कनिमोळी ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा, "बीजेपी को नेहरू जी की याद कांग्रेस से भी ज़्यादा आती है। आप हर मुद्दे पर नेहरू को जिम्मेदार ठहराते हैं। अब तो ऐसा लगता है कि आपके हर भाषण की शुरुआत और अंत नेहरू जी पर होता है।" उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि "देश को जोड़ने की कोशिश कीजिए, विपक्ष को दुश्मन मत समझिए।"

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमित शाह का यह बयान केवल अतीत की नीतियों की आलोचना नहीं, बल्कि आने वाले चुनावों के लिए राष्ट्रवाद और सुरक्षा को केंद्र में रखने की रणनीति है। यह बयान स्पष्ट करता है कि भाजपा, कांग्रेस की 'कमजोर विदेश नीति' और 'नेहरू परिवार' की 'चीन-पाक नीति' को 2029 तक के राजनीतिक विमर्श में बनाए रखना चाहती है।

अमित शाह का लोकसभा में दिया गया यह भाषण न सिर्फ कांग्रेस पर तीखा हमला था, बल्कि इसके ज़रिए उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रवाद और सुरक्षा पर आधारित एजेंडे को एक बार फिर स्पष्ट कर दिया। दूसरी तरफ, विपक्ष ने इसे "नेहरू फोबिया" करार देते हुए सरकार से अधिक समावेशी दृष्टिकोण की मांग की है।

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