आदिवासी किसके साथ ? और कन्या विवाह योजना से किसको मिलेगा फायदा
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बार फिर कन्या विवाह योजना का शुभारंभ कर दिया। इसके साथ ही प्रदेश में सियासत का दौर भी शुरू हो गया है।
भोपाल, 21 अप्रैल। मध्य प्रदेश में भले ही विधानसभा चुनाव 2023 में होने हैं, लेकिन सियासी दलों की नजर अभी से वोट बैंक पर है। राज्य में बड़ा वोट बैंक महिलाएं और बुजुर्ग हैं। अब इन्हें रिझाने की शिवराज सरकार ने कोशिशें तेज कर दी हैं। यही कारण है कि 19 अप्रैल 2022 को मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना फिर शुरू कर दी गई है। और गुरूवार को सीहोर जिले के नसरूल्लागंज से कन्या विवाह योजना का फिर से शुभारंभ हुआ है।

कन्या विवाह योजना पर सियासत
कन्या विवाह योजना का पहला कार्यक्रम सीहोर जिले से गुरुवार की शाम को शुरू हो रही है। जिसमें शिवराज सिंह शामिल हो रहे हैं। कोरोना काल में स्थगित रही यह योजना संशोधित स्वरूप में फिर से शुरू की जा रही है। राज्य में शिवराज सिंह चौहान द्वारा बतौर मुख्यमंत्री शुरू की गई महिलाओं से जुड़ी योजनाओं ने उन्हें नई पहचान दिलाने के साथ-साथ बेटियों का मामा और महिलाओं का भाई बना दिया। लगभग डेढ साल सत्ता से बाहर रहने के बाद सत्ता में हुई वापसी के बाद एक बार फिर उनका ध्यान इस वर्ग पर है। चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग का कहना है कि कांग्रेस के पास अब कार्यकर्ता नहीं बचे हैं। कन्या विवाह योजना में कांग्रेस के भ्रष्टाचार का आरोप लगाने पर मंत्री विश्वास सारंग ने पलटवार करते हुए कहा कि गरीबों के हित की योजनाओं से कांग्रेस के पेट में दर्द होता है। कांग्रेस ने गरीबों के हित की हर योजना को बंद किया था। कांग्रेस की सरकार ने कन्या विवाह योजना के नाम पर ढकोसले तो बहुत किए लेकिन एक भी लाभार्थी को पैसा नहीं मिला।

कांग्रेस ने क्यों कहा इसे चुनावी योजना
शिवराज सरकार ने कन्या विवाह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की 18 या उससे ज्यादा उम्र की लड़कियों के लिए शुरू की थी। इसमें लड़कियों के सामूहिक विवाह होते हैं और विवाह करने वाले जोड़ों को सरकार आर्थिक रूप से मदद करती है। योजना के अंतर्गत राज्य के गरीब निराश्रित, निर्धन, जरूरतमंद परिवारों की बेटियों,विधवा महिलाओं,तलाकशुदा महिलाओं की शादी के लिए राज्य सरकार 51 हज़ार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करती थी, जिसे अब बढ़ाकर 55 हजार कर दिया गया है। योजना का लाभ लेने के लिए लाभार्थियों का आयु प्रमाण पत्र और मूल निवासी प्रमाण पत्र लिया जाता है। वहीं कांग्रेस से चुनावी योजना कह रही है।
आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने कसी कमर
मध्य प्रदेश में 2023 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर भाजपा सरकार ने अभी से कमर कस ली है। राज्य में एक बड़ा वोट बैंक महिलाएं और बुजुर्ग हैं। इसी के चलते 19 अप्रैल को तीर्थ दर्शन योजना फिर से शुरू कर दी गई। वहीं, आज गुरुवार को सीहोर जिले के नसरूल्लागंज में सामूहिक विवाह कार्यक्रम से मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का पुन: शुभारंभ हो रहा है। इस बार हितग्राही बेटियों को 55 हजार रुपए दिए जाएंगे।

आदिवासी वोट बैक को लेकर सियासत
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के जंबूरी मैदान में 22 अप्रैल को तेंदूपत्ता संग्राहकों को बोनस वितरण और वन समितियों का सम्मेलन होने वाला है। इस सम्मेलन में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह सहित कई अन्य जनप्रतिनिधि भी हिस्सा लेने वाले हैं। हालांकि इस कार्यक्रम में आदिवासी वर्ग के तमाम लोग मौजूद रहेंगे। मध्यप्रदेश में 2023 का विधानसभा चुनाव है जिसके चलते दोनों ही राजनीति पार्टी आदिवासी वर्ग को साधने में जुट गए है।

भोपाल में अमित शाह के दौरे क्या हैं मायने
अमित शाह के इस दौरे को काफी अहम माना जा रहा है। इससे पहले आदिवासियों को साधने के लिए उसी जंबूरी मैदान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नवंबर महीने में आदिवासी गौरव दिवस में शामिल हुए थे। मध्य प्रदेश में आदिवासी वर्ग के लिए 47 सीटें आरक्षित हैं। 2013 में हुए विधान सभा चुनाव में 47 में से बीजेपी को 32 सीटों पर जीत मिली थी। जबकि कांग्रेस को केवल 15 सीट मिली थीं। 2018 में हुए विधान सभा चुनाव में ये आंकड़ा पलट गया और बीजेपी के खाते में 16 सीट रह गईं जबकि कांग्रेस को 30 सीट मिली थीं। बीजेपी अब इस गैप को भरने की कवायद में जुटी है। हालांकि बीजेपी के मंत्री विश्वास सारंग कहना है कि बीजेपी पार्टी हमेशा सही आदिवासी वर्ग के लोगों के साथ खड़ी है और तमाम योजनाएं ला रही है, जिससे आदिवासी वर्ग के लोगों को लाभ मिल सके। कांग्रेस पार्टी वोटों की राजनीति करती है जबकि बीजेपी पार्टी सभी वर्गों को एक साथ लेकर विकास करने की बात करती है।

आदिवासी वर्ग किस पर करेगा भरोसा ?
प्रदेश में 15 महीने के बाद विधानसभा चुनाव है जिसको लेकर दोनों ही राजनीति दल आदिवासी वर्ग को साधने में जुट गई है। क्योंकि प्रदेश में आदिवासी वर्ग का वोट बैंक सबसे ज्यादा है। जिसके चलते जहां एक और प्रदेश सरकार तमाम योजनाएं शुरू कर आदिवासी वर्ग को साधने की कोशिश कर रही है। तो वहीं कांग्रेस पार्टी आदिवासी वर्ग का हितेषी अपने आपको बताती नजर आ रही है। हालांकि 2018 के चुनावी परिणाम को देखते हुए इस बार बीजेपी पार्टी का पूरा फोकस आदिवासी वोटरों को साधने में है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि चुनाव नजदीक हैं जिसके चलते बीजेपी सरकार तमाम योजनाएं लाकर आदिवासी वर्ग को साधने में जुट गई है। हालांकि आदिवासी वर्ग के लोग हमेशा से ही कांग्रेस के साथ है।












Click it and Unblock the Notifications