सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सिविल जज भर्ती 2022 पर हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक, पुराने नियमों से होगी भर्ती
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सिविल जज, जूनियर डिवीजन (प्रवेश स्तर) भर्ती परीक्षा 2022 को लेकर मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 13 जून 2024 के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें सिविल जज भर्ती के लिए संशोधित नियमों को लागू करते हुए कुछ उम्मीदवारों को अयोग्य ठहराया गया था।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएस चंदुरकर की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि 2022 की भर्ती प्रक्रिया पुराने भर्ती नियमों के अनुसार ही पूरी की जाएगी। इस फैसले ने सैकड़ों उम्मीदवारों को राहत दी है, जो संशोधित नियमों के कारण भर्ती प्रक्रिया से बाहर होने की कगार पर थे।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश: संशोधित नियम लागू नहीं होंगे
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के 13 जून 2024 के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा (भर्ती एवं सेवा शर्तें) नियम, 1994 में 23 जून 2023 को किए गए संशोधन 2022 की भर्ती पर लागू नहीं होंगे। खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा:
"पुनर्विचार अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए हाईकोर्ट का 13 जून का आदेश रद्द किया जाता है। 2023 के संशोधित नियम, जिसमें 3 साल की निरंतर प्रैक्टिस या 70% अंकों के साथ LLB डिग्री की शर्त शामिल है, 2022 की भर्ती पर लागू नहीं होंगे। अपील स्वीकार की जाती है।"
इसके साथ ही, कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि भर्ती प्रक्रिया को पुराने नियमों के आधार पर आगे बढ़ाया जाए, जिसमें प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के परिणामों को संशोधित नियमों की बजाय मूल नियमों के आधार पर तय किया जाएगा।
मामला क्या है? हाईकोर्ट का आदेश और संशोधित नियम
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 13 जून 2024 को एक आदेश जारी किया था, जिसमें सिविल जज, जूनियर डिवीजन (प्रवेश स्तर) भर्ती 2022 के लिए संशोधित भर्ती नियम लागू करने का निर्देश दिया गया था। इन संशोधित नियमों के तहत:
उम्मीदवारों के पास वकील के रूप में लगातार 3 वर्षों का अनुभव होना अनिवार्य था, या
उन्हें उत्कृष्ट लॉ ग्रेजुएट होना चाहिए, जिसका मतलब था कि उन्होंने पहले प्रयास में सभी परीक्षाएं उत्तीर्ण की हों और सामान्य/OBC श्रेणी के लिए कम से कम 70% अंक और SC/ST श्रेणी के लिए 50% अंक प्राप्त किए हों।
हाईकोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि जिन उम्मीदवारों ने प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण की थी, लेकिन संशोधित नियमों के तहत अयोग्य पाए गए, उन्हें भर्ती प्रक्रिया से बाहर किया जाए। इस आदेश ने उन सैकड़ों उम्मीदवारों को प्रभावित किया, जो प्रारंभिक परीक्षा पास कर चुके थे और मुख्य परीक्षा में शामिल हो रहे थे।
भर्ती नियमों का इतिहास और विवाद
मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा (भर्ती एवं सेवा शर्तें) नियम, 1994 के तहत सिविल जज भर्ती की प्रक्रिया शुरू हुई थी। 2022 में भर्ती विज्ञापन जारी होने के बाद प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की गई, जिसके परिणाम 10 मार्च 2024 को घोषित किए गए। उस समय भर्ती पुराने नियमों के आधार पर शुरू हुई थी। लेकिन 23 जून 2023 को मध्य प्रदेश सरकार ने भर्ती नियमों में संशोधन कर नए मानदंड लागू किए, जिनमें 3 साल की प्रैक्टिस और 70%/50% अंकों की शर्त शामिल थी।
इन संशोधित नियमों को हाईकोर्ट में रिट याचिका (15150/2023) के जरिए चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिसंबर 2023 को कुछ उम्मीदवारों को अस्थायी रूप से प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा में बैठने की अनुमति दी थी, लेकिन यह अनुमति हाईकोर्ट में लंबित याचिकाओं के परिणाम के अधीन थी। 1 अप्रैल 2024 को हाईकोर्ट ने संशोधित नियमों की वैधता को बरकरार रखा, जिसके बाद 26 अप्रैल 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
हालांकि, एक अन्य रिट याचिका में प्रारंभिक परीक्षा के परिणामों को रद्द करने और संशोधित नियमों के आधार पर पुनर्मूल्यांकन की मांग की गई। हाईकोर्ट ने 7 मई 2024 को इस याचिका को खारिज कर दिया, लेकिन बाद में एक्टिंग चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस अमर नाथ की खंडपीठ ने 7 मई के आदेश को त्रुटिपूर्ण बताते हुए वापस ले लिया। इस खंडपीठ ने 13 जून 2024 को नए आदेश जारी किए, जिसमें संशोधित नियमों के आधार पर कट-ऑफ की पुनर्गणना और मुख्य परीक्षा दोबारा आयोजित करने का निर्देश दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप: क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के 13 जून 2024 के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियमों में बदलाव करना अनुचित है। कोर्ट ने इसे "प्रॉस्पेक्टिव नियम" (भविष्य में लागू होने वाला नियम) माना और कहा कि 2022 की भर्ती पर पुराने नियम ही लागू होंगे। कोर्ट ने निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया:
निष्पक्षता: भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद नए नियम लागू करना उन उम्मीदवारों के साथ अन्याय है, जो पुराने नियमों के आधार पर परीक्षा में शामिल हुए।
पुनर्गणना रद्द: हाईकोर्ट का कट-ऑफ की पुनर्गणना और मुख्य परीक्षा दोबारा आयोजित करने का आदेश रद्द किया गया।
पुराने नियम लागू: 2022 की भर्ती प्रक्रिया मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा नियम, 1994 के मूल प्रावधानों के आधार पर पूरी होगी।
उम्मीदवारों पर प्रभाव
इस फैसले से उन सैकड़ों उम्मीदवारों को राहत मिली है, जो संशोधित नियमों (3 साल की प्रैक्टिस या 70%/50% अंकों की शर्त) को पूरा नहीं कर पाए थे, लेकिन प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा में शामिल हुए थे। अब उनकी उम्मीदवारी पुराने नियमों के आधार पर वैध मानी जाएगी। यह फैसला खासकर उन उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनके पास प्रैक्टिस का अनुभव कम था या जिनके LLB में 70% से कम अंक थे।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) और हाईकोर्ट प्रशासन को भर्ती प्रक्रिया को पुराने नियमों के आधार पर आगे बढ़ाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी करने होंगे। प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के परिणामों को पुनर्जनन की आवश्यकता नहीं होगी, और जो उम्मीदवार पहले ही उत्तीर्ण हो चुके हैं, उनकी उम्मीदवारी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
इसके अलावा, यह फैसला भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं के लिए भी एक मिसाल कायम करता है। यह सुनिश्चित करता है कि भर्ती शुरू होने के बाद नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता, जिससे उम्मीदवारों को अनुचित नुकसान न हो।
यह मामला न केवल मध्य प्रदेश की न्यायिक भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है, बल्कि यह देश भर में सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता और निष्पक्षता के सवाल को भी उठाता है। कई बार भर्ती नियमों में मध्य प्रक्रिया में बदलाव से उम्मीदवारों का भरोसा टूटता है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उम्मीदवारों के अधिकारों की रक्षा करता है और प्रशासन को नियमों के दुरुपयोग से रोकता है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला अन्य राज्यों में भी समान मामलों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है। एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि भर्ती नियमों में बदलाव प्रॉस्पेक्टिव होना चाहिए, रेट्रोस्पेक्टिव नहीं। यह उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी जीत है।"
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