Vijaypur Seat News: मुकेश मल्होत्रा की विधायकी बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने क्यों पलटा हाईकोर्ट का फैसला, जानिए
Supreme Court Decision: मध्य प्रदेश की विजयपुर विधानसभा सीट पर लंबे समय से चल रहे सियासी और कानूनी विवाद में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए स्थिति को पूरी तरह बदल दिया।
अदालत ने मुकेश मल्होत्रा की विधायकी को बरकरार रखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ग्वालियर बेंच के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया गया था। इस निर्णय के बाद न सिर्फ विजयपुर सीट बल्कि पूरे प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों पलटा हाईकोर्ट का फैसला?
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने मुकेश मल्होत्रा की ओर से प्रभावी दलीलें पेश कीं। उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले की कानूनी वैधता और प्रक्रिया पर सवाल उठाए। दलीलों को सुनने के बाद जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की डबल बेंच ने माना कि मामले में अंतिम निर्णय से पहले यथास्थिति बनाए रखना जरूरी है। इसी आधार पर हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए मल्होत्रा को अंतरिम राहत दी गई।
राहत के साथ सख्त शर्तें भी लागू
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा को विधायक बने रहने की अनुमति दी है, लेकिन यह राहत कुछ अहम शर्तों के साथ दी गई है, जो अंतिम फैसले तक लागू रहेंगी।
पहली शर्त के तहत मुकेश मल्होत्रा को वोटिंग का अधिकार नहीं दिया गया है। इसका मतलब है कि वे राज्यसभा चुनाव में मतदान नहीं कर सकेंगे और जून में होने वाले चुनाव में उनकी भूमिका सीमित रहेगी।
दूसरी बड़ी शर्त यह है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं सुना देता, तब तक उन्हें विधायक के रूप में मिलने वाला वेतन और भत्ते नहीं दिए जाएंगे। इस तरह अदालत ने संतुलन बनाते हुए एक ओर विधायकी बरकरार रखी, तो दूसरी ओर अधिकारों पर आंशिक रोक भी लगाई।
अगली सुनवाई 23 जुलाई को
वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने जानकारी दी कि इस मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को तय की गई है। इस दिन कोर्ट में विस्तृत सुनवाई के बाद अंतिम निर्णय की दिशा तय हो सकती है। फिलहाल तब तक का यह अंतरिम आदेश ही लागू रहेगा।
राजनीति में बयानबाजी तेज
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र की जीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और चुनाव आयोग ने जनादेश को पलटने की कोशिश की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सच्चाई को कायम रखा।
उन्होंने कहा कि विजयपुर की जनता ने मुकेश मल्होत्रा को चुना था और यह फैसला उसी जनमत का सम्मान है। साथ ही उन्होंने विवेक तन्खा का आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने अदालत में मजबूती से पक्ष रखा।
लोकतंत्र और न्याय की बड़ी परीक्षा
विजयपुर सीट का यह मामला अब केवल एक चुनावी विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था, न्यायिक प्रक्रिया और संवैधानिक मूल्यों की परीक्षा बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने जहां एक ओर तत्काल राहत दी है, वहीं अंतिम निर्णय तक अनिश्चितता भी बरकरार रखी है।
फिलहाल मुकेश मल्होत्रा विधायक बने रहेंगे, लेकिन सीमित अधिकारों के साथ। अब सभी की नजरें 23 जुलाई की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस हाई-प्रोफाइल मामले का अंतिम फैसला सामने आएगा। यह निर्णय न केवल विजयपुर सीट, बल्कि मध्य प्रदेश की राजनीति की दिशा और दशा भी तय कर सकता है।












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