सिंधिया कर रहे संयम की सियासत, आगामी चुनावी अग्निपरीक्षा के लिए BJP के दिग्गजों से मेल-मिलाप जारी
भोपाल, 29 अगस्त। कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने के बाद नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अब समन्वय व संयम की सियासत के दांव चलने लगे हैं। यह अब तक कई मौकों पर देखा भी जा चुका है। ऐसे में आने वाला चुनावी साल सिंधिया के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा। उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस छोड़कर भाजपा में विधायकों को फिर से टिकट दिलाने की होगी। ऐसे में कई सीटों पर समीकरण भाजपा नेताओं से उलझना तय माना जा रहा है।

सियासी गतिविधियों को लेकर शिवराज से भी मिले
सिंधिया ने रविवार देर शाम भोपाल में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक मुलाकात में निकाय चुनाव परिणाम सहित आने वाली सियासी गतिविधियों को लेकर चर्चा हुई। सिंधिया ने शुरुआत से भाजपा के दिग्गज नेताओं से मेल-मुलाकात का सिलसिला शुरू किया था। नगरीय निकाय चुनाव के टिकटों को छोड़ दें तो उससे पहले हर बार सिंधिया खेमा बाकी भाजपा खेमे पर भारी पड़ा है।
निकाय चुनाव में सिंधिया समर्थकों को नहीं मिला था ज्यादा टिकट
निकाय चुनाव में टिकट के मामले में सिंधिया समर्थकों को ज्यादा जगह नहीं मिली। बावजूद सिंधिया ने संयम के साथ चुनावी शिरकत की। वहीं, ग्वालियर में उनकी पसंद का टिकट नहीं मिला, लेकिन खुले तौर पर कोई भी विरोध या विवाद नहीं होने दिया। इसके अलावा वह चुनाव प्रचार में भी उतरे और ग्वालियर से उज्जैन-इंदौर तक वोट मांगे। वहीं, बीते दिनों सिंधिया इंदौर में महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के निवास पर पुत्र महानआर्यमन को लेकर पहुंचे।
RSS में पैठ बनाने के लिए नागपुर भी गए
सिंधिया, आरएसएस में पैठ बढ़ाने पर खूब काम कर रहे हैं। यही वजह है कि वह बीते दिनों नागपुर में संघ मुख्यालय व भोपाल, दिल्ली में भी संघ कार्यालय पर गए। इस दौरान उन्होंने संघ पदाधिकारियों से मेल-मुलाकात की। भाजपा की मराठा लॉबी, युवा वर्ग और पार्टी से असंतुष्ट खेमे को भी सिंधिया ने समर्थन दिया।
शिवराज कैबिनेट में दबदबा बरकरार
शिवराज कैबिनेट में सिंधिया खेमे का दबदबा बरकरार है। पहले मंत्रिमंडल गठन में उन्होंने 5 में से 2 मंत्री बनवाएं। वहीं, मंत्रिमंडल विस्तार में फिर उनको अहमियत मिली और उन्होंने करीब 9 मंत्री बनवाएं। इसके अलावा विभाग के बंटवारे में भी सिंधिया की चली। उन्होंने अपने समर्थकों को अच्छे विभाग दिलवाए।












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