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जानिए रायसेन में धान के रेट पर कैसे हुआ बवाल, 4000 के वादे पर 3000 की खरीदी से भड़के किसानों लगाया जाम

Raisen News: रायसेन जिले में धान की सरकारी खरीदी को लेकर किसानों का गुस्सा आखिरकार सड़कों पर फूट पड़ा। सोमवार और मंगलवार को सैकड़ों किसानों ने भोपाल-सागर तिराहे पर करीब 4 घंटे तक चक्का जाम कर दिया।

किसानों का आरोप है कि सरकार ने चुनाव के दौरान 4000 रुपये प्रति क्विंटल धान खरीदी का वादा किया था, लेकिन हकीकत में खरीदी केंद्रों पर 3000 से 3200 रुपये प्रति क्विंटल ही दिए जा रहे हैं। इससे किसानों की लागत तक नहीं निकल पा रही है।

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सुबह से दोपहर तक चले इस आंदोलन ने न सिर्फ प्रशासन को हिला दिया, बल्कि हाईवे पर घंटों तक यातायात ठप रहा। अधिकारियों के आश्वासन के बाद ही किसानों ने जाम खोला, लेकिन चेतावनी भी दे दी-"समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र होगा।"

4 घंटे हाईवे ठप: चक्का जाम का पूरा घटनाक्रम

सुबह करीब 10 बजे रायसेन, सुल्तानपुर, बेगमगंज और आसपास के गांवों से किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली, बाइक और पैदल भोपाल-सागर तिराहे पर पहुंचने लगे। कुछ ही देर में सैकड़ों किसान सड़क पर बैठ गए और वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी।

ट्रैक्टर-ट्रॉली से सड़क जाम

  • नारे: "4000 दो, वादा निभाओ", "किसान नहीं मरेगा, शोषण नहीं सहेगा"
  • एम्बुलेंस और यात्री वाहन तक फंसे
  • दोपहर 2 बजे तक हाईवे रहा बंद

हाईवे के दोनों ओर वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं। यात्री परेशान रहे, वहीं किसानों ने साफ कहा कि जब तक सुनवाई नहीं होगी, सड़क नहीं खुलेगी।

किसानों का सीधा आरोप: वादा 4000 का, खरीदी 3000 पर

किसानों का कहना है कि धान की खेती अब फायदे का सौदा नहीं रह गई है। खाद, बीज, डीजल, मजदूरी-हर चीज महंगी हो चुकी है, लेकिन धान के दाम वहीं अटके हैं।

किसानों की प्रमुख शिकायतें:

  • चुनाव में 4000 रुपये प्रति क्विंटल का वादा
  • खरीदी केंद्रों पर 3000-3200 रुपये ही मिल रहे
  • ग्रेडिंग के नाम पर अच्छे धान को भी घटिया बताकर रेट कम
  • वजन में कटौती और भुगतान में देरी
  • लागत करीब 3500 रुपये प्रति क्विंटल, नुकसान तय

एक किसान ने गुस्से में कहा, "धान उगाना अब घाटे का सौदा बन गया है। सरकार किसान हितैषी होने का दावा करती है, लेकिन खरीदी केंद्रों पर सच्चाई कुछ और ही है।"

प्रशासन मौके पर पहुंचा, तब खुला जाम

करीब चार घंटे बाद SDM, DSP, तहसीलदार और खाद्य विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। किसानों से लंबी बातचीत हुई। अधिकारियों ने माना कि कई जगहों पर खरीदी को लेकर शिकायतें आई हैं।

प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया:

खरीदी केंद्रों की जांच कराई जाएगी

ग्रेडिंग में गड़बड़ी पर कार्रवाई होगी

किसानों की मांग उच्च स्तर तक भेजी जाएगी

इसके बाद किसानों ने दोपहर करीब 2 बजे चक्का जाम खत्म किया, लेकिन साफ चेतावनी दी कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो दोबारा आंदोलन होगा।

धान खरीदी को लेकर MP में क्या है स्थिति?

  • केंद्र सरकार का MSP (2025-26): 2300-2400 रुपये/क्विंटल
  • राज्य सरकार द्वारा बोनस जोड़कर ऊंचे दाम का दावा
  • किसानों का कहना: 4000 रुपये का वादा सिर्फ कागजों तक
  • खरीदी शुरू: दिसंबर 2025
  • मुख्य समस्याएं: रेट कम, ग्रेडिंग विवाद, भुगतान में देरी

कृषि विभाग का कहना है कि खरीदी सुचारू रूप से चल रही है और शिकायतों पर कार्रवाई की जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत किसानों के आक्रोश में साफ दिख रही है।

आगे क्या? फिर भड़क सकता है किसान आंदोलन

धान के दाम को लेकर रायसेन में हुआ यह चक्का जाम संकेत है कि अगर सरकार ने जल्द ठोस फैसला नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में किसान आंदोलन और तेज हो सकता है। रबी सीजन की बुवाई से पहले धान बेचकर किसान गेहूं की तैयारी करते हैं, लेकिन कम दाम ने उनकी कमर तोड़ दी है।

अब नजरें प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं- क्या वाकई किसानों को 4000 रुपये का हक मिलेगा या फिर आंदोलन की आग और फैलेगी?

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