MP News: इंदौर के MYH में नवजातों की मौत पर बवाल, राहुल गांधी ने कहा- 'हादसा नहीं, हत्या', प्रशासन का अलग दावा
मध्यप्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, महाराजा यशवंतराव अस्पताल (MYH) की नवजात गहन देखभाल इकाई (NICU) में दो नवजातों पर चूहों के हमले और उनकी बाद में मौत ने पूरे देश में हलचल मचा दी है। इस घटना पर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने इसे हादसा नहीं, बल्कि "सीधी-सीधी हत्या" करार दिया और मध्य प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार पर गरीबों से स्वास्थ्य का अधिकार छीनने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, स्थानीय प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन ने दावा किया है कि बच्चों की मौत चूहों के काटने से नहीं, बल्कि अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण हुई। इस बीच, पोस्टमॉर्टम को लेकर पुलिस के परस्पर विरोधी बयानों ने मामले को और जटिल बना दिया है।

राहुल गांधी का गंभीर आरोप: 'यह हादसा नहीं, हत्या है'
राहुल गांधी ने 4 सितंबर 2025 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस घटना पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा, "इंदौर में मध्यप्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में दो नवजात शिशुओं की चूहों के काटने से मौत...यह कोई दुर्घटना नहीं, यह सीधी-सीधी हत्या है। यह घटना इतनी भयावह, अमानवीय और असंवेदनशील है कि इसे सुनकर रूह भी कांप जाए।"
राहुल ने मध्यप्रदेश सरकार और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकारी अस्पताल अब गरीबों के लिए जीवनदायी नहीं, बल्कि "मौत के अड्डे" बन चुके हैं। उन्होंने लिखा, "एक मां की गोद से उसका बच्चा छिन गया, सिर्फ इसलिए क्योंकि सरकार ने अपनी सबसे बुनियादी जिम्मेदारी नहीं निभाई। हेल्थ सेक्टर को जानबूझकर प्राइवेट हाथों में सौंपा गया - जहां इलाज अब सिर्फ अमीरों के लिए रह गया है, और गरीबों के लिए सरकारी अस्पताल अब जीवनदायी नहीं, मौत के अड्डे बन चुके हैं।"
राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को निशाने पर लेते हुए कहा, "PM मोदी और MP के मुख्यमंत्री को शर्म से सिर झुका लेना चाहिए। आपकी सरकार ने देश के करोड़ों गरीबों से स्वास्थ्य का अधिकार छीन लिया है। अब मां की गोद से बच्चे तक छिनने लगे हैं।"
क्या है पूरा मामला?
महाराजा यशवंतराव अस्पताल (MYH), इंदौर में 2 और 3 सितंबर 2025 को नवजात गहन देखभाल इकाई (NICU) में दो नवजातों पर चूहों ने हमला किया। दोनों बच्चों की बाद में मौत हो गई। इस घटना ने अस्पताल की स्वच्छता और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
पहली घटना: 2 सितंबर को एक नवजात, जो खंडवा के पास एक गांव की रहने वाली लक्ष्मीबाई का बच्चा था, पर चूहों ने हमला किया। बच्चे के सिर और कंधे पर चोटें आईं और उसी दिन उसकी मौत हो गई। web:1
दूसरी घटना: 3 सितंबर को देवास की रहने वाली रेहाना के नवजात पर चूहों ने हमला किया, जिसके बाद उसकी भी मौत हो गई। web:1
सीसीटीवी फुटेज में एनआईसीयू में चूहों के घूमने की पुष्टि हुई, जिसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और लोगों में आक्रोश फैल गया। web:1 web:6
प्रशासन का दावा: 'मौत का कारण चूहों का काटना नहीं'
इंदौर के कलेक्टर आशीष सिंह और MYH के सुपरिटेंडेंट डॉ अशोक यादव ने दावा किया कि दोनों नवजातों की मौत चूहों के काटने से नहीं हुई। web:1 web:4
रेहाना का बच्चा: प्रशासन के अनुसार, रेहाना के नवजात को जन्मजात स्वास्थ्य समस्याएं थीं और वह 1.6 किलोग्राम वजन के साथ वेंटिलेटर पर था। परिजनों ने पोस्टमॉर्टम से इनकार कर दिया, इसलिए मौत का सटीक कारण स्पष्ट नहीं हो सका।
लक्ष्मीबाई का बच्चा: इस बच्चे को उसके माता-पिता ने गंभीर हालत में अस्पताल में छोड़ दिया था। प्रशासन ने इसे "अज्ञात" शव के रूप में पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा, लेकिन बाद में यह दावा किया कि पोस्टमॉर्टम में चूहों के काटने से मौत की पुष्टि नहीं हुई।
हालांकि, सूत्रों से पता चला कि लक्ष्मीबाई के बच्चे का पोस्टमॉर्टम हुआ ही नहीं है, जिसने प्रशासन के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पोस्टमॉर्टम को लेकर पुलिस के परस्पर विरोधी बयान
पहला दावा: MYH पुलिस चौकी के पुलिसकर्मी नूर सिंह मोरे ने कहा कि लक्ष्मीबाई के बच्चे का शव "अज्ञात" के रूप में दर्ज किया गया और मंगलवार को ही पोस्टमॉर्टम हो चुका है। शव को गुरुवार को अंतिम संस्कार के लिए एनजीओ को सौंप दिया जाएगा।
दूसरा दावा: संयोगितागंज थाने के टीआई अरविंद खत्री ने देर रात पुष्टि की कि बच्चे का पोस्टमॉर्टम अभी नहीं हुआ है। यदि परिजन नहीं मिले, तो गुरुवार को पोस्टमॉर्टम के बाद शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
इन विरोधाभासी बयानों ने प्रशासन की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।
प्रशासनिक कार्रवाई: जांच शुरू, कर्मचारी निलंबित
इस घटना के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने त्वरित कदम उठाए हैं:
चिकित्सा शिक्षा आयुक्त तरुण राठी ने इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज का दौरा किया और डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया, MYH अधीक्षक डॉ. अशोक यादव और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की।
- अस्पताल की नर्सिंग सुपरिटेंडेंट को हटा दिया गया और दो नर्सिंग स्टाफ को निलंबित कर दिया गया।
- पेस्ट कंट्रोल एजेंसी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया और उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
- डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए एक हाई-पावर कमेटी गठित की है।
अस्पताल में चूहों का आतंक: पुरानी समस्या
MYH में चूहों की समस्या कोई नई बात नहीं है। 1984 में चूहों की समस्या के कारण अस्पताल को पूरी तरह खाली करना पड़ा था। 2014 में भी मरीजों को चूहों के काटने की शिकायतों के बाद इंदौर कलेक्टर ने जांच की थी।अस्पताल प्रबंधन ने स्वीकार किया कि पिछले पांच सालों में कोई पेस्ट कंट्रोल नहीं हुआ था। डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि भारी बारिश और जलभराव के कारण चूहे पाइपों के रास्ते अस्पताल में घुसे।
जन स्वास्थ अभियान की शिकायत
जन स्वास्थ अभियान ने इस घटना को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के समक्ष उठाया है। संगठन ने अस्पताल की खराब स्वच्छता और प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए इसे "लापरवाही का चरम" बताया।
मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल
यह घटना मध्यप्रदेश के सरकारी स्वास्थ्य ढांचे की बदहाली को उजागर करती है। राहुल गांधी ने इसे गरीबों के स्वास्थ्य अधिकारों पर हमला करार दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में स्वच्छता, बुनियादी सुविधाओं, और प्रबंधन की कमी लंबे समय से एक गंभीर समस्या बनी हुई है। MYH जैसे बड़े अस्पताल में चूहों का एनआईसीयू में घुसना और नवजातों पर हमला करना इस बात का प्रमाण है कि व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं।












Click it and Unblock the Notifications