भोपाल बाइपास पर NHAI का 'अजूबा': 50 मीटर सड़क धंसने से बड़ा हादसा टला, भ्रष्टाचार का काला चेहरा उजागर
MP News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सड़क निर्माण की लापरवाही ने एक बार फिर सिर उठाया है। सोमवार दोपहर करीब 12 से 1 बजे के बीच इंदौर-होशंगाबाद-जबलपुर-जयपुर-मंडला-सागर को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण गुप्ता बाइपास (भोपाल बाइपास) पर 50 मीटर लंबा हिस्सा धंस गया। रेलवे ट्रैक के पास बिलखिरिया की ओर से आने वाले ग्राम कल्याणपुर के पास यह हादसा हुआ, जहां करीब 20 फीट गहरा गड्ढा बन गया।
गनीमत रही कि घटना के समय कोई वाहन या व्यक्ति वहां से गुजर नहीं रहा था, वरना बड़ी जनहानि हो सकती थी। यह घटना लोक निर्माण विभाग के कुख्यात '90 डिग्री ब्रिज' (ऐशबाग ओवरब्रिज) के डिजाइन फेलियर के बाद NHAI (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के निर्माण की पोल खोल रही है, जो भ्रष्टाचार के चरम को दर्शाती है।

विपक्ष ने इसे "भाजपा सरकार की लापरवाही" बताते हुए CBI जांच की मांग की है, जबकि NHAI ने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि सड़क MPRDC (मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) के दायरे में आती है। यह हादसा न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे देश में इंफ्रास्ट्रक्चर की खराब गुणवत्ता और भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर कर रहा है।
घटना के तुरंत बाद भोपाल-इंदौर NH-46 पर ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया गया। स्थानीय प्रशासन ने इलाके को सील कर दिया, और इंजीनियरों की टीम जांच में जुटी है। विशेषज्ञों का मानना है कि घटिया सामग्री और डिजाइन की कमी से ऐसा हुआ।
घटना का पूरा घटनाक्रम: दोपहर का धसाव, ट्रैफिक जाम और तत्काल कार्रवाई
घटना भोपाल के थाना सुखिसेवनिया अंतर्गत बिलखिरिया की ओर से ग्राम कल्याणपुर के पास रेलवे ब्रिज से मात्र 100 मीटर आगे हुई। मंडीदीप से ईदखेड़ी की ओर जाने वाला यह ब्रिज हिस्सा अचानक धंस गया। दोपहर करीब 12:30 बजे तेज धमाके जैसी आवाज के साथ सड़क का 50 मीटर लंबा और 20 फीट चौड़ा हिस्सा धंस गया, जिससे करीब 20 फीट गहरा गड्ढा बन गया। स्थानीय निवासी रामेश्वर सिंह ने बताया, "हम ब्रिज पार कर चुके थे, बस 5 मिनट बाद ही धसाव हुआ। अगर कोई ट्रक होता, तो सब खत्म।"
घटना की सूचना मिलते ही भोपाल कलेक्टर ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई। NHAI और MPRDC की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। ट्रैफिक को डायवर्ट कर बैरागढ़ और हबीबगंज की ओर मोड़ दिया गया। शाम तक इलाके में भारी जाम लग गया। पुलिस ने चेतावनी जारी की कि भारी वाहनों को वैकल्पिक रूट से भेजा जा रहा है। कलेक्टर ने कहा, "कोई जानमाल का नुकसान नहीं, लेकिन जांच तेज है।"
90 डिग्री ब्रिज से NHAI फेलियर तक: मध्य प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर का काला इतिहास
यह घटना मध्य प्रदेश के सड़क निर्माण की लापरवाही का नया अध्याय है। लोक निर्माण विभाग का '90 डिग्री ब्रिज' (ऐशबाग रेलवे ओवरब्रिज) पहले ही मेमे का विषय बन चुका है। जून 2025 में इसका डिजाइन फेलियर सामने आया, जब 90 डिग्री का तीखा मोड़ दुर्घटनाओं का कारण बना। CM मोहन यादव ने 7 इंजीनियरों को सस्पेंड किया, और NHAI को जांच सौंपी। PWD मंत्री राकेश सिंह ने कहा था, "यह गंभीर लापरवाही है।"
अब गुप्ता बाइपास पर NHAI का 'अजूबा'। यह बाइपास 2018 में MPRDC के तहत बनाया गया था, लेकिन NHAI के डिजाइन और क्वालिटी चेक की जिम्मेदारी थी। NHAI ने बयान जारी कर कहा, "यह सड़क हमारे दायरे में नहीं, MPRDC की है।" लेकिन स्थानीय इंजीनियरों का कहना है कि NHAI ने टेंडर और सुपरविजन किया था। विशेषज्ञ डॉ. आरके शर्मा ने कहा, "घटिया कंक्रीट और जल निकासी की कमी से धसाव होता है। भ्रष्टाचार से सामग्री में कटौती आम है।"
भ्रष्टाचार का चरम: NHAI-MPRDC में सेटिंग, कटौती का खेल
यह हादसा भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर करता है। NHAI पर आरोप है कि टेंडर में कमीशन, घटिया सामग्री और सुपरविजन की अनदेखी आम है। RTI कार्यकर्ता अजय दुबे ने कहा, "मप्र में 500 करोड़ के प्रोजेक्ट में 20% कटौती होती है।" 2024 में CAG रिपोर्ट में NHAI के 15% प्रोजेक्ट घटिया पाए गए। विपक्ष नेता जीतू पटवारी ने कहा, "90 डिग्री ब्रिज के बाद बाइपास धसाव - भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर। CBI जांच हो।" CM मोहन यादव ने कहा, "जांच होगी, दोषी सजा पाएंगे।"












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