MP News: वक्फ बिल पर बवाल, मंत्री विश्वास सारंग का तंज- बिना पढ़े विरोध करना गलत, फिलिस्तीन बैनर से उन्माद
मध्य प्रदेश के सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने वक्फ संशोधन बिल 2024 के विरोध में काली पट्टी बांधकर नमाज पढ़ने और फिलिस्तीन के समर्थन में बैनर दिखाने को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
रविवार को भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने इस विरोध को समाज में विभाजन पैदा करने की साजिश करार दिया और कहा कि बिना बिल को समझे इसका विरोध करना पूरी तरह गलत है। साथ ही, उन्होंने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी पर भी निशाना साधा और फिलिस्तीन के मुद्दे को लेकर उनकी चुप्पी पर सवाल उठाए।

"वक्फ संपत्तियों का फायदा आम मुसलमानों को नहीं"
मंत्री सारंग ने वक्फ संशोधन बिल के विरोध पर अपनी बात रखते हुए कहा, "जो लोग काली पट्टी बांधकर नमाज पढ़ रहे हैं, वे पहले बिल को पढ़ें। बिना समझे विरोध करना न तो तर्कसंगत है और न ही समाज के हित में। वक्फ संपत्तियों का लाभ आज तक आम मुसलमानों को नहीं मिला। इनका फायदा सिर्फ कुछ अमीर मुस्लिम नेता और अवैध कब्जा करने वाले उठाते रहे हैं। यह बिल गरीब मुसलमानों के हित में है, जिसे पारदर्शी और प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है।" उन्होंने दावा किया कि विरोध के पीछे राजनीतिक स्वार्थ छिपा है, जो समाज को बांटने का काम कर रहा है।
"फिलिस्तीन बैनर फिरकापरस्ती की कोशिश"
ईद के मौके पर कुछ जगहों पर फिलिस्तीन के समर्थन में बैनर और नारे देखे गए, जिस पर सारंग ने सख्त आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, "फिलिस्तीन के नाम पर बैनर लहराना और नमाज के दौरान उन्माद फैलाने की कोशिश करना फिरकापरस्ती को बढ़ावा देना है। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह देश की एकता और शांति के खिलाफ है।" सारंग ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जोड़ते हुए कहा कि कुछ लोग धार्मिक भावनाओं को भड़काकर अपना उल्लू सीधा करना चाहते हैं।
प्रियंका गांधी पर तंज: "बांग्लादेश के हिंदुओं पर चुप्पी क्यों?"
सारंग ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा, "प्रियंका गांधी संसद में फिलिस्तीन का बैग लेकर भावनाएं भड़काने का काम करती हैं, लेकिन जब बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार होता है, तब उन्हें समर्थन में बैग उठाने की फुर्सत नहीं मिलती। यह दोहरा रवैया कांग्रेस की असलियत दिखाता है।" उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह सिर्फ वोट बैंक की राजनीति के लिए ऐसे मुद्दों को हवा देती है, जबकि देशहित उनके लिए मायने नहीं रखता।
वक्फ बिल पर विवाद और विरोध
वक्फ संशोधन बिल 2024 को लेकर देशभर में बहस छिड़ी हुई है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सहित कई संगठनों ने इसका विरोध किया है और इसे मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर हमला बताया है। हाल ही में रमजान के आखिरी जुमे और ईद की नमाज के दौरान कई शहरों में लोगों ने काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज किया था। वहीं, केंद्र सरकार और बीजेपी का कहना है कि यह बिल वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता लाने और गरीब मुसलमानों के हितों की रक्षा के लिए है।
"विरोध राजनीति से प्रेरित"
सारंग ने आगे कहा कि वक्फ बिल का विरोध करने वाले लोग न तो इसके प्रावधानों को समझ रहे हैं और न ही समाज के हित की चिंता कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "यह विरोध राजनीति से प्रेरित है। कुछ लोग अपने निजी फायदे के लिए मुस्लिम समाज को गुमराह कर रहे हैं। सरकार का मकसद वक्फ संपत्तियों का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना है, ताकि इसका लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचे।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस बिल को लेकर संसद में चर्चा हो चुकी है और इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा गया है, जहां हर पहलू पर विचार होगा।
भोपाल में गरमाई सियासत
सारंग के इस बयान ने भोपाल में सियासी माहौल को और गर्मा दिया है। विपक्षी दलों ने इसे बीजेपी की "ध्रुवीकरण की रणनीति" करार दिया है, जबकि बीजेपी समर्थकों का कहना है कि यह बयान वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को उजागर करता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बहस होने की संभावना है, खासकर जब संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होगा और वक्फ बिल पर JPC की रिपोर्ट सामने आएगी।












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