MP News: एमपी में ₹5 लाख करोड़ का कर्ज! बजट से ज्यादा हुआ उधार, विकास या कर्ज का दलदल, जानिए पूरी खबर
MP News: मध्य प्रदेश, जिसे देश का 'हृदय प्रदेश' कहा जाता है, आज अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर गंभीर बहस के केंद्र में है। एक ओर सरकार विकास, कल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचे के विस्तार को कर्ज का औचित्य बता रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे प्रदेश को "कर्ज के दलदल" में धकेलने का आरोप लगा रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि पहली बार राज्य का कुल कर्ज उसके वार्षिक बजट से भी अधिक हो गया है।
बजट से ज्यादा कर्ज: पहली बार बनी ऐसी स्थिति
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि प्रदेश का अनुमानित बजट जहां लगभग ₹4.65 लाख करोड़ है, वहीं कुल कर्ज का आंकड़ा ₹5 लाख करोड़ के पार पहुंच चुका है। यह स्थिति प्रदेश की वित्तीय सेहत के लिए चिंताजनक मानी जा रही है। विपक्ष का कहना है कि जनता के टैक्स से जुटाई गई राशि अब विकास कार्यों से ज्यादा कर्ज की किस्तें और ब्याज चुकाने में खर्च हो रही है।

आंकड़ों की जुबानी कर्ज का बढ़ता बोझ
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2007 में मध्य प्रदेश पर कुल कर्ज ₹52,731 करोड़ था, जो बढ़ते-बढ़ते 2026 तक ₹5.31 लाख करोड़ के करीब पहुंच गया। यानी करीब दो दशकों में कर्ज दस गुना से भी ज्यादा बढ़ गया है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य का बकाया कर्ज ₹4.64 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है, जो बजट से लगभग ₹43,000 करोड़ अधिक है। इसका सीधा असर आम नागरिक पर पड़ रहा है-प्रदेश के हर निवासी पर औसतन ₹50,000 से अधिक का कर्ज है।
नीति आयोग का अनुमान है कि 2026-27 तक कर्ज-GSDP अनुपात 28.6% तक पहुंच सकता है, जो तय सीमा से काफी ज्यादा है। वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार, राज्यों को राजकोषीय घाटा GSDP के 3% के भीतर रखना चाहिए, लेकिन मध्य प्रदेश इस सीमा से बाहर जाता दिख रहा है।
लगातार बढ़ता उधार
सरकार द्वारा हाल के महीनों में लगातार कर्ज लिया गया है। अकेले फरवरी 2026 में दो बार ₹5,000 करोड़ का कर्ज लिया गया, जबकि पूरे वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा ₹67,300 करोड़ तक पहुंच सकता है। कर्ज पर ब्याज चुकाने में ही सालाना लगभग ₹27,000 करोड़ खर्च हो रहे हैं।
सरकार का पक्ष: "विकास के लिए जरूरी निवेश"
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार का कहना है कि लिया गया कर्ज प्रदेश के विकास, बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और जनकल्याण योजनाओं के लिए जरूरी है। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के अनुसार, 2026-27 का बजट जन-केंद्रित और समावेशी होगा।
सरकार की प्रमुख योजना लाड़ली बहना योजना है, जिसके तहत महिलाओं को ₹1,500 प्रतिमाह सहायता दी जाती है। इस योजना पर हर महीने लगभग ₹1,600 करोड़ खर्च हो रहे हैं, जिसका बड़ा हिस्सा उधार से पूरा किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इससे महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण हुआ है।
केंद्र से कम हिस्सेदारी, बढ़ी चुनौती
केंद्र सरकार से मिलने वाले कर हिस्से में कमी (7.85% से घटकर 7.35%) के कारण मध्य प्रदेश को ₹2,314 करोड़ का नुकसान हुआ है। इसके बावजूद सरकार का कहना है कि केंद्रीय बजट 2026-27 में कृषि, युवा रोजगार और महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी गई है, जिससे राज्य को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
विपक्ष का सवाल: "कर्ज का पैसा कहां जा रहा है?"
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि कर्ज का बड़ा हिस्सा वास्तविक विकास की बजाय राजनीतिक आयोजनों, प्रचार, हवाई यात्राओं और फ्रीबीज पर खर्च हो रहा है। पूर्व वित्त मंत्री राघवजी ने चेतावनी दी कि बजट से ज्यादा कर्ज राज्य की आर्थिक सेहत के लिए खतरनाक संकेत है।
सोशल मीडिया पर भी सरकार की आलोचना तेज है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या प्रदेश अब "EMI पर चल रहा है"? सीपीआई(एम) सहित अन्य दलों का कहना है कि किसान, मजदूर और ग्रामीण महिलाओं के लिए योजनाओं में कटौती हो रही है, जबकि कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है।
विशेषज्ञों की राय और भविष्य की राह
आर्थिक विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर कर्ज का उपयोग उत्पादक क्षेत्रों-जैसे उद्योग, रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा-में किया जाए, तो यह दीर्घकालिक विकास का आधार बन सकता है। लेकिन यदि कर्ज का इस्तेमाल अल्पकालिक राजनीतिक लाभ के लिए हुआ, तो यह राज्य को गंभीर वित्तीय संकट में डाल सकता है।
आईसीआरए और अन्य एजेंसियों की रिपोर्ट सुझाव देती हैं कि 2027-31 तक राज्यों को 3% GSDP सीमा में लौटना होगा, अन्यथा वित्तीय संतुलन बिगड़ सकता है।
जनता की मांग: पारदर्शिता और जवाबदेही
प्रदेश की जनता अब सरकार से यह जानना चाहती है कि कर्ज का हर रुपया कहां खर्च हो रहा है। विशेषज्ञों की सलाह है कि सरकार को कर्ज उपयोग पर पारदर्शी श्वेत पत्र जारी करना चाहिए। सही दिशा में निवेश हुआ तो मध्य प्रदेश 2030 तक $350 बिलियन इकोनॉमी बनने की क्षमता रखता है, लेकिन गलत नीतियां इसे और गहरे कर्ज में धकेल सकती हैं। अंततः सवाल यही है-क्या यह कर्ज मध्य प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा, या आने वाली पीढ़ियों पर बोझ बनकर रह जाएगा? इसका जवाब आने वाला बजट सत्र और सरकार की नीतियां तय करेंगी।
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