छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड: 22 बच्चों की मौत के बाद MP में 32 कंपनियों की जांच, जानिए कैसे 7 पर मिली गंभीर खामियां
MP News: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में कथित तौर पर कोल्डरिफ (Coldrif) कफ सिरप पीने से 22 बच्चों की दर्दनाक मौत के बाद राज्य की दवा निर्माण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह घटना अक्टूबर 2025 में शुरू हुई, जब सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) नामक जहरीले रसायन की मौजूदगी की पुष्टि हुई, जो किडनी फेलियर का कारण बना।
तमिलनाडु की स्रेसन फार्मास्यूटिकल्स द्वारा निर्मित इस सिरप ने न केवल छिंदवाड़ा, बल्कि बैतूल और पंधुरना जैसे इलाकों में तबाही मचाई। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तत्काल प्रतिबंध लगाया, लेकिन अब खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (MPFDA) ने राज्य की सभी 32 सिरप निर्माण कंपनियों की व्यापक जांच शुरू की है।

अब तक 7 कंपनियों की जांच पूरी हुई, जिनमें से 5 पर उत्पादन रोकने के नोटिस जारी हो चुके हैं, जबकि एक ने स्वयं लाइसेंस सरेंडर कर दिया। लेकिन संसाधनों की कमी से जांच प्रक्रिया सुस्त है, जिससे बाजार में नकली दवाओं का खतरा बरकरार है।
छिंदवाड़ा में मौतों का सिलसिला
अक्टूबर 2025 की शुरुआत में छिंदवाड़ा जिले के परासिया क्षेत्र में 5 वर्ष से कम उम्र के 17 बच्चों की मौत किडनी फेलियर से हो गई। जांच में पाया गया कि सभी ने कोल्डरिफ सिरप का सेवन किया था, जो तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित स्रेसन फार्मास्यूटिकल्स द्वारा बनाया गया था। तमिलनाडु ड्रग कंट्रोल की रिपोर्ट में सिरप के बैच SR-13 (मई 2025 निर्मित) में 48.6% DEG पाया गया, जो एंटीफ्रीज और ब्रेक फ्लूइड में इस्तेमाल होने वाला जहरीला रसायन है। 10 अक्टूबर तक मौतों का आंकड़ा 22 पहुंच गया, जिसमें नागपुर के अस्पतालों में इलाज के दौरान दो और बच्चे शामिल हुए।
मध्य प्रदेश पुलिस ने विशेष जांच टीम (SIT) गठित की, जिसने सिरप के निर्माता जी. रंगनाथन को चेन्नई से गिरफ्तार किया। परासिया के सरकारी बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी को भी गिरफ्तार किया गया, जिन्होंने सिरप लिखा था। कुल 6 गिरफ्तारियां हुईं, जिसमें मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव, वितरक और फार्मासिस्ट शामिल हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वैश्विक अलर्ट जारी किया, और सिरप को मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पुदुच्चेरी, पश्चिम बंगाल और दिल्ली में प्रतिबंधित कर दिया गया।
जांच अभियान: 32 कंपनियों पर नजर, 7 में गंभीर अनियमितताएं
MPFDA ने केंद्रीय औषधि विभाग (सब-जोन इंदौर) के सहयोग से 32 सिरप निर्माण इकाइयों की जांच शुरू की। शुरुआती 7 कंपनियों में निर्माण मानकों का उल्लंघन पाया गया, जैसे अनियमित कच्चे माल का उपयोग, लेबलिंग की कमी और गुणवत्ता नियंत्रण की अनदेखी। इससे 5 कंपनियों को नोटिस जारी कर उत्पादन रोका गया, जबकि इंदौर की एडकॉन लैब ने लाइसेंस सरेंडर कर दिया। विलक्योर का लाइसेंस पूरी तरह निरस्त हो चुका है। शेष 25 कंपनियों की जांच तेजी से चल रही है, लेकिन संसाधनों की कमी बाधा बनी हुई है।
संसाधनों की कमी: बाजार में नकली दवाओं का खतरा
मध्य प्रदेश फूड एंड ड्रग अथॉरिटी (MPFDA) के पास पर्याप्त लैब सुविधाएं और स्टाफ नहीं है। ईदगाह हिल्स की लैब में सैंपल जमा हो रहे हैं, लेकिन रिपोर्ट आने में हफ्तों लग जाते हैं। ड्रग कंट्रोलर दिनेश श्रीवास्तव ने कहा, "जांच प्रक्रिया लगातार जारी है। सीमित संसाधनों के कारण रिपोर्ट्स में समय लगता है, लेकिन हम जरूरी कदम उठा रहे हैं।" विशेषज्ञों का कहना है कि यह कमी बाजार में नकली दवाओं को बढ़ावा दे रही है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तमिलनाडु अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया, जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चेन्नई में 7 स्थानों पर छापे मारे। कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा, दावा किया कि निरीक्षण की कमी से यह हादसा हुआ।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
मुख्यमंत्री मोहन यादव: "तमिलनाडु अधिकारियों की लापरवाही से बिहार के बच्चे मारे गए। कड़ी कार्रवाई होगी।"
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह: "सरकार की नाकामी। दवा नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत करें।"
डॉ. प्रवीण सोनी के समर्थक: रिहाई की मांग, लेकिन प्रशासन ने खारिज किया।
WHO: "भारतीय सिरपों में DEG की मौजूदगी वैश्विक खतरा। सख्त मानक लागू करें।"
आगे की राह: सुधार की जरूरत
सरकार ने राज्य स्तर पर दवा लाइसेंसिंग सख्त करने का वादा किया है। लेकिन संसाधन बढ़ाने और त्वरित जांच के बिना समस्या बनी रहेगी। यह कांड 2023 के उत्तर प्रदेश कफ सिरप कांड की याद दिलाता है, जहां 20 बच्चों की मौत हुई थी। मध्य प्रदेश को अब दवा सुरक्षा पर राष्ट्रीय स्तर का ध्यान देना होगा।












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