Bhopal News: मध्य प्रदेश में अतिथि शिक्षकों का आंदोलन, गांधी जयंती पर प्रदर्शन, कई टीचर हुए बेहोश
मध्य प्रदेश के अतिथि शिक्षक नियमितीकरण की मांग को लेकर एक बार फिर आंदोलित हो गए हैं। गांधी जयंती के दिन प्रदेश भर से बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक भोपाल के अंबेडकर मैदान पर एकत्रित हुए। इस दौरान कई शिक्षकों के बेहोश होने की भी सूचना है।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी, जिसके चलते पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। अतिथि शिक्षकों ने स्कूल शिक्षा मंत्री के बयान पर तंज कसते हुए "कब्जा करने आए हैं, कब्जा करके जाएंगे" के नारे लगाए।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आंदोलन गैरकानूनी बताकर गोली चलाने की चेतावनी भी दी, हालांकि कुछ ही देर बाद यह बैनर हटा लिया गया।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस आंदोलन में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी भी शामिल हुए। उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए सरकार से अतिथि शिक्षकों की मांगों को शीघ्र पूरा करने की अपील की।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी X प्लेटफॉर्म पर लिखा, "मुख्यमंत्री जी से आग्रह करता हूं कि अतिथि शिक्षकों की मांगों को स्वीकार करें। यह मांगें पिछली बीजेपी सरकार के वादों का हिस्सा हैं। चुनाव से पहले बीजेपी ने जो वादे किए थे, उन्हें पूरा करें।"
भविष्य की दिशा
इस प्रदर्शन ने सरकार के सामने एक बार फिर अतिथि शिक्षकों की मांगों को उजागर किया है। सरकार को इस आंदोलन का ध्यानपूर्वक विचार करना होगा, ताकि शिक्षकों की समस्याओं का समाधान किया जा सके और शैक्षणिक संस्थाओं में स्थिरता बनी रहे।

प्रदेश अध्यक्ष का दृढ़ संकल्प: अतिथि शिक्षक संघ ने आमरण अनशन की चेतावनी दी
अतिथि शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष केसी पवार ने स्पष्ट किया है कि वे सरकार के साथ अपनी मांगों के स्थायीकरण के लिए पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा, "पिछली बार सरकार ने हमें गुमराह कर दिया था, और हम उनकी बातों में आ गए थे। इस बार हम अपना स्थायीकरण लेकर जाएंगे। अगर सरकार अपना रुख स्पष्ट नहीं करती है तो हम आमरण अनशन पर बैठेंगे।"
स्वास्थ्य की चिंता
पवार ने यह भी बताया कि प्रदर्शन के दौरान कई लोगों की तबीयत बिगड़ रही है। उन्होंने कहा, "यहां तापमान ज्यादा है, और मेरी तबीयत भी कुछ गड़बड़ लग रही है। लेकिन, सरकार की तरफ से अभी तक कोई नहीं आया है।"
सरकार से अपील
अध्यक्ष ने सरकार से जल्दी से जल्दी उनकी मांगों को सुनने की अपील की। उन्होंने कहा, "मैं पीछे नहीं हटने वाला हूं। मैं यहीं आमरण अनशन पर बैठूंगा। मैं अतिथि शिक्षकों के लिए जान देने के लिए तैयार हूं, लेकिन आप लोग किसी तरह का नियम कानून न तोड़े। मुख्यमंत्री जी, जल्द ही हमारी मांगों पर निर्णय लें। हम यहां से वापस जाने वाले नहीं हैं।"
आंदोलन की दिशा
यह स्पष्ट है कि अतिथि शिक्षक संघ का यह आंदोलन अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। यदि सरकार उनकी मांगों का शीघ्र समाधान नहीं करती, तो इससे स्थिति और गंभीर हो सकती है। संघ ने यह संकल्प लिया है कि वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगे, और इसके लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।












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