लोकायुक्त ने कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी को रंगे हाथों पकड़ा, 50 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार, जानिए पूरा मामला
मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही सख्ती की मुहिम को एक और झटका लगा है। महानिदेशक लोकायुक्त डॉ. योगेश देशमुख के निर्देश पर इंदौर लोकायुक्त इकाई की ट्रैप टीम ने आज अलीराजपुर जिले में एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी को रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी कनिष्ठ जिला आपूर्ति अधिकारी रामा अवास्या ने एक उचित मूल्य दुकान संचालिका से 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी, जो एफआईआर दर्ज करने की धमकी देकर वसूली जा रही थी। यह घटना न केवल खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ी करती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे व्यापारियों की मुश्किलों को भी उजागर करती है।

उचित मूल्य दुकान का पंचनामा और रिश्वत की मांग
यह मामला अलीराजपुर जिले के ग्रामीण इलाके से जुड़ा है, जहां छोटे किसान और व्यापारी अपनी आजीविका चलाने के लिए सरकारी योजनाओं पर निर्भर रहते हैं। पीड़ित आवेदक कमलेश संगाडिया (उम्र 35 वर्ष), जो खेतीबाड़ी का व्यवसाय करते हैं, ग्राम बरझर (शामलाकुण्ड), तहसील चन्द्रशेखर आजाद नगर (भाभरा), जिला अलीराजपुर के निवासी हैं। कमलेश की पत्नी कमिला संगाडिया उसी इलाके में शासकीय उचित मूल्य की दुकान (कोड नंबर 4906022) संचालित करती हैं। यह दुकान गरीबों को सस्ते दामों पर राशन उपलब्ध कराने का माध्यम है, लेकिन कभी-कभी निरीक्षण के नाम पर अधिकारी इन दुकानदारों को परेशान करते हैं।
घटना की शुरुआत 20 अगस्त 2025 को हुई, जब आरोपी रामा अवास्या (उम्र 43 वर्ष), जो कनिष्ठ जिला आपूर्ति अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं, ने कमिला की दुकान का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पंचनामा तैयार किया, जिसमें कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया गया। पंचनामा के आधार पर आरोपी ने एफआईआर दर्ज करने की धमकी देकर 5 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की। यह रकम दुकान की अनियमितताओं को छिपाने और आगे की जांच से बचाने के लिए मांगी गई थी। डर के मारे कमलेश ने शुरुआत में कुछ रकम देने की कोशिश की, लेकिन आरोपी ने 50 हजार रुपये तुरंत देने का दबाव बनाया।
कमलेश ने इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई और 24 सितंबर 2025 को इंदौर लोकायुक्त कार्यालय के पुलिस अधीक्षक (विपक्ष) श्री राजेश सहाय को शिकायत दर्ज कराई। शिकायत की प्रारंभिक जांच में बात सही पाई गई, जिसके बाद महानिदेशक लोकायुक्त डॉ. योगेश देशमुख के सख्त निर्देश पर तत्काल ट्रैप कार्रवाई का फैसला लिया गया। डॉ. देशमुख ने हाल ही में प्रदेश स्तर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति की घोषणा की थी, और यह कार्रवाई उसी का हिस्सा है।
रंगे हाथों गिरफ्तारी और टीम की भूमिका
ट्रैप टीम का गठन होते ही इंदौर लोकायुक्त इकाई ने फर्जी रिश्वत राशि (50 हजार रुपये) के साथ कमलेश को आरोपी से मिलने भेजा। कार्रवाई आज दोपहर अलीराजपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में आरोपी के कार्यालय के बाहर हुई। आरोपी रामा अवास्या ने रिश्वत की रकम स्वीकारते ही ट्रैप टीम के सदस्यों द्वारा घेर लिए गए। रिश्वत लेने के तुरंत बाद 'फिनाइल टेस्ट' किया गया, जो पॉजिटिव आया, और आरोपी को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया।
ट्रैप टीम में कार्यवाहक निरीक्षक श्री सचिन पटेरिया, कार्यवाहक प्रभारी आरक्षक विवेक मिश्रा, आरक्षक श्री विजय कुमार, आरक्षक श्री कमलेश परिहार और आरक्षक अनिल परमार शामिल थे। टीम ने पूरे ऑपरेशन को गोपनीय रखा और आरोपी के कार्यालय में छापा मारकर दस्तावेज जब्त किए। आरोपी का वर्तमान निवास तलावफलिया, दाहोद नाका, अलीराजपुर है, जबकि उनका मूल गृह ग्राम पिछौड़ी, पोस्ट सोनदूल, तहसील व जिला बड़वानी है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को इंदौर लोकायुक्त थाने में रखा गया है, और पूछताछ जारी है।
खाद्य विभाग में लंबा अनुभव, लेकिन अब सलाखों के पीछे
आरोपी रामा अवास्या पिता बद्रीलाल अवास्या मध्य प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग में कनिष्ठ जिला आपूर्ति अधिकारी के पद पर तैनात थे। वे अलीराजपुर कलेक्ट्रेट परिसर के जिला आपूर्ति अधिकारी कार्यालय में कार्यरत थे। विभाग में उनका अनुभव 15-20 वर्ष का बताया जा रहा है, और वे उचित मूल्य दुकानों के निरीक्षण व लाइसेंसिंग से जुड़े मामलों को संभालते थे। लेकिन आज की कार्रवाई ने उनकी छवि को धूमिल कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, आरोपी पर पहले भी छोटे-मोटे भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे, लेकिन साक्ष्य न होने से बच निकलते थे। अब इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 की धारा 7 (लोक सेवक द्वारा रिश्वत लेना) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है, जो 7 वर्ष तक की सश्रम कारावास की सजा का प्रावधान रखती है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की मुहिम: आंकड़े और प्रभाव
मध्य प्रदेश लोकायुक्त संगठन ने 2025 में अब तक 150 से अधिक ट्रैप कार्रवाइयां की हैं, जिनमें ज्यादातर निचले स्तर के अधिकारी शामिल हैं। महानिदेशक डॉ. योगेश देशमुख ने जुलाई 2025 में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, "भ्रष्टाचार राज्य की प्रगति में सबसे बड़ा रोड़ा है। हम हर शिकायत को गंभीरता से लेंगे और दोषियों को सलाखों के पीछे पहुंचाएंगे।" इंदौर इकाई ने इस वर्ष 40 से अधिक मामलों में सफल ट्रैप किए हैं, जो इंदौर, उज्जैन और होशंगाबाद संभागों को कवर करती है।
यह कार्रवाई ग्रामीण मध्य प्रदेश में उचित मूल्य दुकानों से जुड़े भ्रष्टाचार पर नजर रखने की जरूरत को रेखांकित करती है। अलीराजपुर जैसे आदिवासी बहुल जिले में, जहां लोग सरकारी योजनाओं पर निर्भर हैं, ऐसी घटनाएं गरीबों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मॉनिटरिंग और जन जागरूकता से इन अपराधों को रोका जा सकता है।
पीड़ित का बयान और आगे की कार्रवाई
पीड़ित कमलेश संगाडिया ने लोकायुक्त टीम को दिए बयान में कहा, "हमारी दुकान से गरीब परिवार राशन लेते हैं। आरोपी ने पंचनामा बनाकर हमारा जीवन तबाह करने की कोशिश की। लोकायुक्त ने न्याय दिया, अब हम बेझिझक काम जारी रखेंगे।" ट्रैप के बाद स्थानीय प्रशासन ने दुकान का दोबारा निरीक्षण किया, जिसमें कोई बड़ी अनियमितता नहीं पाई गई। आरोपी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की जाएगी, और जांच में अन्य शामिल लोगों का भी पता लगाया जा रहा है।
राज्य स्तर पर प्रभाव: भ्रष्टाचार मुक्त मध्य प्रदेश की दिशा में कदम
यह गिरफ्तारी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की 'भ्रष्टाचार मुक्त मध्य प्रदेश' अभियान का हिस्सा है। हाल ही में बालाघाट में किसान बोनस वितरण कार्यक्रम के दौरान भी सीएम ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती का ऐलान किया था। विपक्ष ने इसे सराहा है, लेकिन मांग की है कि उच्च अधिकारियों पर भी नजर रखी जाए। लोकायुक्त संगठन ने शिकायतकर्ताओं के लिए हेल्पलाइन नंबर (0755-2559025) जारी किया है, ताकि कोई भी भ्रष्टाचार की शिकायत सीधे दर्ज करा सके।
यह घटना न केवल एक अधिकारी की गिरफ्तारी है, बल्कि सिस्टम में सुधार की मांग भी है। ग्रामीण क्षेत्रों में निरीक्षण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की जरूरत है, ताकि छोटे व्यापारी सुरक्षित रहें। पुलिस और लोकायुक्त की इस सफल कार्रवाई से अन्य अधिकारियों में भय का माहौल है, जो भ्रष्टाचार रोकने में सहायक सिद्ध होगी।
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