MP धार भोजशाला पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला—बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा भी, शुक्रवार को नमाज भी; जानिए समय
MP Dhar Bhojshala: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित विवादित भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण और संतुलित फैसला सुनाया है। कोर्ट ने बसंत पंचमी के अवसर पर हिंदू समुदाय को सरस्वती पूजा की अनुमति दी है, वहीं शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय को नमाज अदा करने का अधिकार भी बरकरार रखा है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब 23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन पड़ रहे हैं, जिससे दोनों समुदायों के धार्मिक आयोजनों में टकराव की आशंका जताई जा रही थी।

2003 की व्यवस्था को ही रखा गया आधार
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की 7 अप्रैल 2003 की व्यवस्था को फिलहाल लागू रखने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भोजशाला की धार्मिक पहचान से जुड़ा अंतिम फैसला मुख्य याचिका की सुनवाई के बाद ही किया जाएगा। फिलहाल शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यथास्थिति बनाए रखना जरूरी है।
किस याचिका पर आया सुप्रीम कोर्ट का आदेश
यह फैसला हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर सुनाया गया है, जिसमें मांग की गई थी कि बसंत पंचमी के दिन हिंदुओं को पूरे दिन पूजा का अधिकार दिया जाए और शुक्रवार की नमाज पर रोक लगाई जाए। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस मांग को फिलहाल स्वीकार नहीं किया और दोनों समुदायों को समयबद्ध तरीके से धार्मिक गतिविधियों की अनुमति देने का आदेश दिया।
बसंत पंचमी पर पूजा का तय समय
कोर्ट के निर्देशानुसार बसंत पंचमी के दिन हिंदू समुदाय को सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक भोजशाला परिसर में सरस्वती पूजा और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करने की अनुमति दी गई है। इस दौरान अखंड पूजा की जा सकेगी, लेकिन परिसर में किसी भी तरह के स्थायी निर्माण, संरचना में बदलाव या नई मूर्ति स्थापित करने पर सख्त रोक रहेगी।
शुक्रवार को नमाज की अनुमति भी बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार के दिन दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज अदा करने की अनुमति दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस समय के दौरान किसी भी प्रकार का हिंदू धार्मिक अनुष्ठान नहीं होगा, ताकि दोनों समुदायों के बीच किसी तरह का तनाव उत्पन्न न हो।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के निर्देश
कोर्ट ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन को सख्त सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। भोजशाला परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस, CRPF और ASI की संयुक्त तैनाती रहेगी। पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी और सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को ही प्रवेश की अनुमति होगी। किसी भी प्रकार की अफवाह, उकसावे या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भोजशाला का ऐतिहासिक और धार्मिक विवाद
धार की भोजशाला को लेकर विवाद दशकों पुराना है। हिंदू समाज इसे 11वीं शताब्दी में परमार वंश के राजा भोज द्वारा निर्मित देवी वाग्देवी यानी सरस्वती का मंदिर मानता है, जहां कभी शिक्षा का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। वहीं मुस्लिम समुदाय इसे कमल मौला मस्जिद के रूप में देखता है, जहां लंबे समय से नमाज अदा की जाती रही है।
विवाद की पृष्ठभूमि और ASI की भूमिका
1990 के दशक में भोजशाला को लेकर विवाद और गहराया था। वर्ष 1997 में प्रतिबंध हटाए गए और बाद में 2003 में ASI ने आदेश जारी कर हिंदुओं को मंगलवार और बसंत पंचमी पर पूजा तथा मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी। वर्ष 2024 में ASI द्वारा किए गए सर्वे की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है, जिसको लेकर दोनों पक्षों में असंतोष बना हुआ है।
फैसले पर हिंदू संगठनों की प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर हिंदू संगठनों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के वकील विष्णु शंकर जैन ने इसे आंशिक जीत बताते हुए कहा कि वे मुख्य याचिका पर जल्द सुनवाई और पूरे दिन पूजा के अधिकार की मांग जारी रखेंगे। विश्व हिंदू परिषद ने फैसले का स्वागत करते हुए भोजशाला को मंदिर घोषित करने की मांग दोहराई है।
मुस्लिम समुदाय ने बताया संतुलित फैसला
कमल मौला मस्जिद वेलफेयर सोसाइटी के प्रतिनिधियों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को संतुलित और न्यायसंगत बताया है। उन्होंने कहा कि नमाज का अधिकार बनाए रखना जरूरी है और मुस्लिम समाज शांति बनाए रखते हुए अदालत के आदेश का पालन करेगा।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आईं सामने
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। वहीं विपक्षी कांग्रेस ने कहा कि यह मामला संवेदनशील है और सरकार को सभी पक्षों से संवाद बढ़ाना चाहिए।
धार में हाई अलर्ट, प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद
बसंत पंचमी और शुक्रवार के मद्देनजर धार जिले में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। प्रशासन के अनुसार करीब 2,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। जरूरत पड़ने पर इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित की जा सकती हैं। भोपाल से वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचकर पूरे हालात पर नजर रखे हुए हैं।
विशेषज्ञों की राय: अस्थायी समाधान
विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला अस्थायी है। असली विवाद भोजशाला की धार्मिक पहचान को लेकर है, जिस पर अंतिम निर्णय आने में अभी समय लग सकता है। फिलहाल कोर्ट का उद्देश्य शांति बनाए रखना और किसी भी टकराव से बचाव करना है।
शांति और संयम की अपील
प्रशासन ने धार और आसपास के इलाकों के लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें। 23 जनवरी को पूरे प्रदेश की नजरें धार पर रहेंगी, जहां यह परीक्षा होगी कि सौहार्द और संयम कैसे कायम रहता है।
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