IAS अवि प्रसाद ने तीसरी बार क्यों रचाई शादी, पहले की दो पूर्व पत्नियां भी कलेक्टर, जानिए पूरा मामला
IAS Avi Prasad: मध्य प्रदेश प्रशासनिक सेवा के गलियारों में एक बार फिर निजी जीवन की एक खबर ने पेशेवर चर्चाओं को पीछे छोड़ दिया है। 2014 बैच के चर्चित आईएएस अधिकारी अवि प्रसाद ने तीसरी बार विवाह कर नई पारी की शुरुआत की है। उनकी नई जीवनसाथी अंकिता धाकरे हैं-2017 बैच की आईएएस अधिकारी, जो वर्तमान में राज्य मंत्रालय (प्रशासनिक सेवा) में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत हैं।
विवाह 11 फरवरी 2026 को कूनो नेशनल पार्क के एक होटल में सादगीपूर्ण और निजी समारोह में संपन्न हुआ। परिवार और बेहद करीबी लोगों की मौजूदगी में हुई यह शादी देखते-देखते प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई।

इस चर्चा की वजह सिर्फ विवाह नहीं, बल्कि वह दुर्लभ संयोग है-जहां अवि प्रसाद की तीनों पत्नियां आईएएस अधिकारी रही हैं और उनकी दो पूर्व पत्नियां वर्तमान में जिलों की कलेक्टर हैं। यही कारण है कि यह खबर फाइलों से निकलकर सोशल मीडिया और अफसरों के व्हाट्सएप समूहों तक तेजी से फैल गई।
संवेदनशील अफसर की पहचान
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के मूल निवासी अवि प्रसाद ने यूपीएससी में ऑल इंडिया रैंक 13 हासिल कर 2014 में सिविल सेवा में प्रवेश किया था। सिविल सेवा से पहले वे रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) में कार्यरत रहे। मध्य प्रदेश कैडर में आने के बाद उन्होंने कई जिलों में कलेक्टर के रूप में जिम्मेदारी संभाली। कुपोषण, शिक्षा और सामाजिक योजनाओं के क्रियान्वयन में उनकी संवेदनशील कार्यशैली की व्यापक सराहना हुई। वर्तमान में वे मध्य प्रदेश रोजगार गारंटी परिषद के सीईओ के रूप में कार्यरत हैं। पारिवारिक पृष्ठभूमि भी राजनीति से जुड़ी रही-उनके दादा तंबेश्वर प्रसाद पूर्व मंत्री रह चुके हैं।
तीन विवाह, तीन अध्याय
पहला अध्याय: 2014 बैच की ही बैचमेट रिजू बाफना से विवाह। यह रिश्ता ज्यादा समय नहीं चला और तलाक के साथ समाप्त हुआ। रिजू बाफना वर्तमान में शाजापुर जिले की कलेक्टर हैं।
दूसरा अध्याय: 2016 बैच की आईएएस अधिकारी मिशा सिंह (मूल रूप से आंध्र प्रदेश कैडर) से विवाह। करीब चार वर्षों तक चला यह रिश्ता भी तलाक पर खत्म हुआ। मिशा सिंह वर्तमान में रतलाम जिले की कलेक्टर हैं।
तीसरा अध्याय: 2017 बैच की अंकिता धाकरे से विवाह। अशोकनगर की रहने वाली अंकिता वर्तमान में राज्य सचिवालय में डिप्टी सेक्रेटरी हैं। कूनो नेशनल पार्क में हुआ यह विवाह निजी रखा गया-न कोई भव्यता, न राजनीतिक जमावड़ा।
निजी जीवन बनाम सार्वजनिक पद
खबर सामने आते ही दो तरह की प्रतिक्रियाएं उभर आईं। एक वर्ग इसे पूरी तरह निजी मामला बताकर निजता के सम्मान की बात कर रहा है। वहीं दूसरा वर्ग इसे आईएएस समुदाय में उभरते 'कैरियर-फोकस्ड रिश्तों' की मिसाल के तौर पर देख रहा है। कुछ अनौपचारिक चर्चाओं में "तीसरी बार किस्मत आजमाने" जैसे जुमले भी सुनाई दिए, हालांकि प्रशासनिक नियमों और आचरण संहिता के अनुसार निजी जीवन के ऐसे निर्णय व्यक्तिगत माने जाते हैं।
राजनीतिक स्तर पर फिलहाल कोई बड़ा विवाद या आरोप सामने नहीं आया है। न ही इस मामले को किसी तरह के प्रशासनिक पक्षपात या नियम उल्लंघन से जोड़कर देखा जा रहा है। फिर भी, यह घटना आईएएस जैसे प्रतिष्ठित पद पर बैठे अधिकारियों के निजी जीवन को लेकर सार्वजनिक जिज्ञासा को जरूर रेखांकित करती है।

संतुलन की चुनौती
अवि प्रसाद की कार्यक्षमता और प्रशासनिक योगदान पर अब भी कोई सवाल नहीं है। लेकिन निजी जीवन की इस खबर ने उन्हें एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। मध्य प्रदेश प्रशासन में यह मामला इसलिए भी दुर्लभ है क्योंकि एक ही अधिकारी के जीवन से जुड़ी तीनों जीवनसाथियां आईएएस हों और दो पूर्व पत्नियां वर्तमान में कलेक्टर के पद पर कार्यरत हों।
पहली और दूसरी शादी को लेकर क्या कहा जा रहा?
सूत्रों के अनुसार, अवि प्रसाद की पहले भी दो शादियां हो चुकी हैं। दोनों रिश्तों में अलग-अलग कारणों से दूरी आई और कानूनी प्रक्रियाएं भी चलीं। हालांकि आधिकारिक तौर पर सभी विवरण सार्वजनिक नहीं हैं, लेकिन बताया जाता है कि पारिवारिक मतभेद और व्यक्तिगत कारणों ने रिश्तों को प्रभावित किया।
तीसरी शादी क्यों?
करीबी सूत्रों का कहना है कि अवि प्रसाद और अंकिता धाकरे लंबे समय से एक-दूसरे को जानते थे और आपसी सहमति से विवाह का निर्णय लिया गया। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि दोनों ने निजी कारणों और भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया।
क्या कानूनी या प्रशासनिक सवाल उठे?
ऐसे मामलों में अक्सर सेवा नियमों और वैवाहिक स्थिति की जानकारी देने की प्रक्रिया पर चर्चा होती है। यदि किसी सरकारी अधिकारी की एक से अधिक शादियां होती हैं, तो संबंधित नियमों के तहत अनुमति और जानकारी देना जरूरी होता है। फिलहाल इस मामले में आधिकारिक स्तर पर कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।
सोशल मीडिया पर बहस
सोशल मीडिया पर इस खबर को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं-कुछ लोग इसे निजी मामला बता रहे हैं, तो कुछ पारदर्शिता और नियमों की बात कर रहे हैं।












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