Bhopal News: बांग्लादेश में हालात कैसे, भोपाल लौटी MBBS की छात्रा ने बताई आपबीती, आर्मी ने की मदद
बांग्लादेश में हालात कितने खराब है इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाए जा सकता है कि भारत की रहने वाली एमबीबीएस की छात्रा सबिया खान को भारत आने के लिए सेना की मदद लेनी पड़ी।
राजधानी भोपाल पहुंची सबिया ने वन इंडिया हिंदी को बताया कि बांग्लादेश का माहौल 4 अगस्त को पूरी तरह खराब हो गया था। इसके बाद ही हमने वहां से निकलने का पूरा प्रयास किया और भारत पहुंच गए। सबिया ने बताया कि भारतीय उच्च आयोग ने हम 22 छात्रों की मदद की, वरना वह भारत नहीं पहुंच पाते। क्योंकि बांग्लादेश में प्रदर्शनकारी छात्र हिंसक हो गए थे। ऐसी हालत में हम पर अटैक भी हो सकता था।

बता दे सबिया खान भोपाल में वार्ड क्रमांक 14 के पार्षद साबीर खान पठान की बेटी हैं। वह बांग्लादेश में एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए गई हुई थी, लेकिन बांग्लादेश में बिगड़े हालात के चलते उन्हें भारत में वापसी करना पड़ी। सबिया का कहना है कि अगर बांग्लादेश में हाल सुधरे तो वह फिर से पढ़ाई करने जाएंगी। उन्होंने विस्तार से बताया कि बांग्लादेश में किस प्रकार के हालात है और भारत आते समय उनके साथ क्या-क्या घटना हुई।
साबिया ने बताया कि बांग्लादेश की राजधानी ढाका से 50 किलोमीटर दूर, मिर्जापुर जिले के कुमुदनी महिला मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के अंतिम वर्ष की छात्रा हैं। 17 जुलाई से बांग्लादेश में स्थिति बिगड़ने लगी थी। उस रात से पूरे देश में कर्फ्यू लागू कर दिया गया और आंतरिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इंटरनेट बंद कर दिया गया था।
हालांकि, ढाका में हालात ज्यादा खराब थे, लेकिन चिट्टगांव जैसे दूरवर्ती क्षेत्रों में स्थिति कुछ बेहतर थी और अन्य छोटे स्थानों पर माहौल सामान्य था। कर्फ्यू के दौरान, उन्होंने भारतीय उच्चायोग की हेल्पलाइन के माध्यम से संपर्क बनाए रखा। 4 अगस्त को जब बांग्लादेश की स्थिति पूरी तरह बिगड़ गई, तब भारतीय उच्चायोग की सहायता से 22 भारतीय छात्राओं का एक समूह 6 अगस्त को ढाका से नई दिल्ली के लिए उड़ान भरने में सफल रहा और सुरक्षित रूप से भारत पहुंच गया। साबिया ने कहा कि स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि लगने लगा था कि वे घर नहीं लौट पाएंगी।

कॉलेज प्रबंधन ने बहुत सहयोग किया
साबिया ने बताया कि बांग्लादेश की खराब स्थिति के बावजूद, कॉलेज प्रबंधन ने बहुत सहयोग किया। उन्होंने समय-समय पर सूचनाएं और नोटिस प्रदान किए, जिससे हम हर परिस्थिति से अवगत रह सके। स्थानीय फोन सेवाएं चालू थीं, जिससे हम भारतीय उच्चायोग के संपर्क में बने रहे। कॉलेज प्रबंधन ने तीन कैब की व्यवस्था की, जिनके माध्यम से हमें मिर्जापुर स्थित कॉलेज परिसर से ढाका एयरपोर्ट तक पहुंचाया। 5 अगस्त की रात 11 बजे से साढ़े 12 बजे तक, हमने मिर्जापुर से 50 किमी का रास्ता पुलिस की पेट्रोलिंग वाहन के साथ तय किया। यह सुविधा भारतीय उच्चायोग के सहयोग से प्राप्त हुई थी।
फ्लाइट्स रद्द होने पर उच्चायोग ने की मदद
एयरपोर्ट पहुंचने के बाद हमें पता चला कि सभी फ्लाइट्स रद्द कर दी गई हैं। हमारी फ्लाइट, जो 6 अगस्त की सुबह 10 बजे थी, रद्द हो चुकी थी। हमने एयरपोर्ट पर ही रहकर उच्चायोग से संपर्क बनाए रखा। अंततः, भारतीय उच्चायोग ने नई दिल्ली के लिए एक नई फ्लाइट की व्यवस्था की, जिसके माध्यम से हम 6 अगस्त को सुरक्षित रूप से भारत पहुंच गए।












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