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Mahakumbh 2025: महाकुंभ वाली हर्षा रिछारिया साध्वी नहीं, भोपाल में माता-पिता ने मीडिया को बताई पूरी सच्चाई

Bhopal News: हर्षा रिछारिया, जो पिछले कुछ समय से अपने अध्यात्मिक रुझान और समाजसेवा के कारण चर्चा में रही हैं, उनके बारे में एक नई और दिलचस्प जानकारी सामने आई है।

हर्षा को सोशल मीडिया पर 'सुंदर साध्वी' के रूप में पहचाना जा रहा था, लेकिन अब यह स्पष्ट हो चुका है कि वह साध्वी नहीं, बल्कि स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज की शिष्या हैं।

Harsha Richhariya Mahakumbh 2025 Not a Sadhvi an ordinary girl parents gave information

साध्वी के कपड़ों में देखकर मां रो पड़ी थीं

हर्षा की मां, किरण रिछारिया, ने मीडिया से बातचीत में बताया कि जब उन्होंने पहली बार अपनी बेटी को साध्वी के कपड़ों में देखा, तो वह रो पड़ी थीं। हालांकि, हर्षा ने उन्हें समझाया कि वह साध्वी नहीं हैं और न ही संन्यास लेने का उनका कोई इरादा है। उन्होंने अपनी मां को बताया कि वह स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज की शिष्या हैं और केवल एक अध्यात्मिक रास्ते पर चल रही हैं, न कि संन्यास का जीवन जीने का कोई विचार उनके मन में है।

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समाजसेवा और एनजीओ की शुरुआत

हर्षा ने केदारनाथ यात्रा के बाद अध्यात्म की ओर अपना रुझान बढ़ाया, जैसा कि उनके पिता दिनेश रिछारिया ने बताया। यात्रा के बाद हर्षा ने समाजसेवा के प्रति अपनी रुचि जताई और अपने एनजीओ की शुरुआत की। उनके पिता ने यह भी कहा कि हर्षा का उद्देश्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाना और दूसरों की मदद करना है।

साध्वी नहीं, एक साधारण लड़की- पिता

हर्षा रिछारिया के पिता दिनेश रिछारिया ने स्पष्ट किया कि हर्षा ने कभी संन्यास नहीं लिया है और वह केवल धर्म और भक्ति में रुचि रखती हैं।

केदारनाथ यात्रा और समाजसेवा की ओर रुझान

हर्षा के पिता ने बताया कि हर्षा ने कुछ साल पहले केदारनाथ यात्रा की थी, और इसके बाद से उनका रुझान अध्यात्म की ओर बढ़ा। हर्षा ने अपनी इच्छा जाहिर की थी कि वह समाजसेवा करना चाहती हैं, और इसके लिए उन्होंने अपना एक एनजीओ भी शुरू किया है। दिनेश रिछारिया ने यह भी कहा कि हर्षा ने कभी संन्यास का निर्णय नहीं लिया है और वह एक सामान्य लड़की हैं जो ईश्वर भक्ति में लीन हैं।

ट्रोलिंग पर परिवार की अपील

हर्षा को लेकर सोशल मीडिया पर कई बार गलतफहमियां और ट्रोलिंग हो चुकी है। कई लोग उन्हें साध्वी समझकर उनका मजाक उड़ाते हैं। इस पर दिनेश रिछारिया ने अपील करते हुए कहा कि लोग हर्षा को साध्वी कहकर ट्रोल करना बंद करें। उन्होंने कहा, "हर्षा ने संन्यास नहीं लिया है, वह सिर्फ एक सामान्य लड़की है जो धर्म और भक्ति में रुचि रखती है।"

शादी की तैयारियां

जहां हर्षा के अध्यात्मिक रुझान को लेकर चर्चा हो रही है, वहीं उनके परिवार ने शादी को लेकर भी तैयारियां शुरू कर दी हैं। हर्षा की मां किरण रिछारिया ने कहा कि जब वे दूसरों की बेटियों को शादी के जोड़े में देखती हैं, तो अपनी बेटी को क्यों नहीं पहनाएंगी। उन्होंने बताया कि हर्षा ने अब तक किसी लड़के को पसंद करने की बात नहीं की है, लेकिन परिवार उनकी शादी के लिए पूरी तरह से तैयारियों में जुट गया है।

हर्षा को लेकर इतनी चर्चा क्यों, क्या है पूरा मामला

दरअसल, प्रयागराज महाकुंभ में हर्षा रिछारिया के रथ पर बैठने को लेकर विवाद ने तूल पकड़ लिया था। 14 जनवरी को निरंजनी अखाड़े की पेशवाई में 30 वर्षीय मॉडल हर्षा रिछारिया को संतों के साथ रथ पर देखा गया था, जिसके बाद धार्मिक और समाजिक नेताओं से विरोधी प्रतिक्रियाएं आ शुरू हो गई थी।

स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने इसे गलत कदम बताते हुए कहा कि धर्म को इस तरह के प्रदर्शन का हिस्सा बनाना खतरनाक हो सकता है और इससे समाज में गलत संदेश फैलता है। उन्होंने कहा कि साधु-संतों को इस तरह की घटनाओं से बचना चाहिए, क्योंकि इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। यह एक ऐसी परंपरा है जो सनातन धर्म की मर्यादा को प्रभावित कर सकती है।

हर्षा रिछारिया ने खुद को किया स्पष्ट

इस विवाद के बीच, हर्षा रिछारिया ने खुद को स्पष्ट करते हुए कहा कि वह साध्वी नहीं हैं। महाकुंभ के दौरान पत्रकारों द्वारा साध्वी बनने को लेकर सवाल पूछे गए, तो उन्होंने जवाब दिया कि उन्होंने सुकून की तलाश में यह जीवन चुना है और वह वह सब छोड़ चुकी हैं जो उन्हें आकर्षित करता था। हर्षा ने कहा कि वह केवल दीक्षा ग्रहण कर रही हैं, संन्यास नहीं लिया है।

इसके बावजूद, हर्षा सोशल मीडिया और ट्रोलर्स के निशाने पर आ गईं। कुछ मीडिया चैनलों ने उन्हें 'सुंदर साध्वी' का नाम दिया था, जिसके बाद उन्होंने खुद को साध्वी से अधिक एक साधारण लड़की के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य समाजसेवा करना और भक्ति में लीन रहना है, और वह धर्म के रास्ते पर चलने का प्रयास कर रही हैं।

हर्षा रिछारिया ने भक्ति और ग्लैमर के बीच के रिश्ते पर स्पष्ट विचार साझा करते हुए कहा कि दोनों में कोई विरोधाभास नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी पुरानी तस्वीरों के बारे में भी कोई छिपाव नहीं किया है। यदि वह चाहतीं तो उन्हें डिलीट कर सकती थीं, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया क्योंकि यह उनके जीवन की यात्रा का हिस्सा है। हर्षा ने युवाओं को यह संदेश देने का प्रयास किया कि किसी भी मार्ग से आप भगवान की ओर बढ़ सकते हैं और यह यात्रा व्यक्तिगत होती है। वह अपने फैसले से पूरी तरह खुश हैं और इसे अपनी यात्रा का अभिन्न हिस्सा मानती हैं।

इसके अलावा, हर्षा ने बताया कि डेढ़ साल पहले उन्हें गुरुदेव से आशीर्वाद मिला था, जिन्होंने उन्हें भक्ति और काम दोनों को साथ में संभालने की सलाह दी थी। हालांकि, हर्षा ने खुद से निर्णय लिया कि वह अपने पेशेवर जीवन को छोड़कर पूरी तरह से भक्ति में समर्पित होंगी। हर्षा ने इस फैसले को अपनी आत्मिक शांति और संतुष्टि का कारण बताया और कहा कि वह इस रास्ते पर चलकर पूरी तरह से खुश हैं।

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