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Bhopal News: खटलापुरा मंदिर के पास छोटे झील पर अतिक्रमण, NGT का नोटिस जारी, वकील संभव सोगानी ने उठाया मामला

Bhopal News: राजधानी भोपाल में लगातार जिलो के किनारे अतिक्रमण बढ़ रहा है लेकिन नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी इस और कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसी को देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता अभिषेक घाड़गे ने एनजीटी में याचिका दाखिल की थी, जिसके बाद एनजीटी ने SDM शहर व्रत (जहांगीराबाद) और अतिक्रमण के आरोपी मनोज उर्फ मन्नू को नोटिस जारी किया है।

इस मामले में हाई कोर्ट के अधिवक्ता संभव सोगानी ने वन इंडिया से बातचीत में बताया कि छोटी झील के किनारे आरोपी मनोज उर्फ़ मन्नू लगातार शेड का निर्माण कर रहा है। जबकि तलाब किनारे इस तरह का निर्माण नहीं किया जा सकता। निगम के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे थे, तभी उनकी तरफ से एनजीटी में याचिका दाखिल की गई थी, जिस पर अब सुनवाई होना है, इसी को लेकर शहर एसडीएम और आरोपी को नोटिस जारी किया गया है।

Encroachment on small lake of Khatlapura temple NGT notice issue lawyer Sambhav Sogani raised matter

क्या है पूरा मामला

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    खटलापुरा मंदिर के पास छोटे झील पर अतिक्रमण, NGT का नोटिस जारी, वकील संभव सोगानी ने उठाया मामला

    दरअसल, राजधानी भोपाल के छोटे तालाब में स्थित खटलापुरा मंदिर के पास अपने आप को महंत बताने वाले मनोज उर्फ़ मन्नू ने तालाब के किनारे तीन शेड का निर्माण कर लिया। वार्ड क्रमांक 34 के पार्षद पप्पू विलास राव घाडगे का कहना है कि मनोज कोई पुजारी संत नहीं है, बल्कि उसने पुजारी के भेष में मंदिर समिति पर कब्जा करने की कोशिश की थी। जिसको लेकर अब समिति भंग कर दी गई है। उसका मामला भी विचार अधीन है।

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    भोपाल में लगातार झीलों के किनारे बढ़ रहा है अतिक्रमण

    पार्षद पप्पू विलास का कहना है कि भोपाल की पहचान झीलों से है, इसलिए इसे झीलों की नगरी भी कहा जाता है, लेकिन अब यहां पर झीलों के किनारे तेजी से अतिक्रमण बढ़ रहा है। जिससे झीलों को नुकसान पहुंच रहा है। अभी कुछ महीने पहले कलियासोत नदी के किनारे अतिक्रमण को लेकर एनजीटी ने नोटिस जारी किया था। इसके बाद नगर निगम ने 700 अतिक्रमणकारियों को नोटिस थमा दिया था। लेकिन निगम तीन-चार अतिक्रमण पर ही कार्रवाई कर पाया। बाकी के निर्माण जस के तस बने हुए हैं।

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    उन्होंने कहा कि अब इस मामले को निगम परिषद की बैठक में उठाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर निगम के अफसर समय रहते जगे नहीं तो, वह दिन दूर नहीं, जब राजधानी भोपाल को झीलों की नगरी की जगह अतिक्रमण की नगरी कहा जाएगा।

    एनजीटी का कानून और खटलापुरा मंदिर विवाद: मनोज उर्फ मन्नू पर नोटिस जारी

    एनजीटी (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) के कानूनी प्रावधानों के तहत, अवैध निर्माण और पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन एक गंभीर मामला है। विशेषकर धारा 14, 15, 16, 17 और 18(1) के अंतर्गत, तालाबों, भोज वेटलैंड्स और अन्य पर्यावरणीय संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के निर्माण को गैरकानूनी माना जाता है।

    एनजीटी की धारा और प्रावधान

    • धारा 14: यह धारा एनजीटी को पर्यावरणीय नियमों और संहिताओं के उल्लंघन से संबंधित मामलों पर सुनवाई और निर्णय लेने का अधिकार देती है।
    • धारा 15: यह धारा एनजीटी को अस्थायी आदेश जारी करने का अधिकार प्रदान करती है, ताकि पर्यावरणीय क्षति को रोका जा सके।
    • धारा 16: इसके तहत एनजीटी पर्यावरणीय नीतियों और कानूनों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए आदेश जारी कर सकती है।
    • धारा 17: यह धारा एनजीटी को पर्यावरणीय क्षति के लिए उचित मुआवजा निर्धारित करने का अधिकार देती है।
    • धारा 18(1): यह धारा किसी भी अवैध निर्माण या अन्य पर्यावरणीय उल्लंघनों पर कठोर दंड और जुर्माना लगाने का अधिकार देती है।
    • मनोज उर्फ मन्नू का मामला

    अधिवक्ता हाई कोर्ट संभाव सोगानी के अनुसार, मनोज उर्फ मन्नू ने खटलापुरा मंदिर में अवैध निर्माण किया है, जो एनजीटी के नियमों का उल्लंघन है। मन्नू ने स्व प्रेम दास वर्मा की समाधि का निर्माण किया, जबकि मंदिर समिति ने उन्हें कभी भी पुजारी नियुक्त नहीं किया था। इसके अलावा, निर्माण क्षेत्र तालाब और वेटलैंड के दायरे में आता है, जहां एनजीटी के नियमों के तहत निर्माण की अनुमति नहीं है।

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    मंदिर समिति और विवाद

    मंदिर समिति का कहना है कि मनोज उर्फ मन्नू को कभी भी मंदिर का पुजारी या सहमंत्री नियुक्त नहीं किया गया था। इससे सवाल उठता है कि, अगर वह आधिकारिक रूप से मंदिर का हिस्सा नहीं थे, तो उन्होंने समाधि निर्माण की अनुमति कैसे प्राप्त की? क्या धर्म के नाम पर चंदे की दुकान चल रही है? यह गंभीर सवाल उठ रहा है, और यह आरोप लगाया जा रहा है कि मन्नू ने धार्मिक भावना का उपयोग करके व्यक्तिगत लाभ प्राप्त किया है।

    एनजीटी का आदेश

    एनजीटी ने इस विवादित मामले पर गंभीरता से ध्यान दिया है और मन्नू को 6 हफ्तों के भीतर स्वयं हाजिर होकर जवाब देने का आदेश दिया है। इस समयावधि में मन्नू को यह स्पष्ट करना होगा कि उसने किस आधार पर और किस अनुमति से अवैध निर्माण किया। एनजीटी का यह कदम पर्यावरणीय कानूनों के पालन को सुनिश्चित करने और धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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