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world cancer day: आहार नली के कैंसर से घबराएं नहीं, इलाज कराएं, एम्स भोपाल में 62 वर्षीय मरीज का सफल ऑपरेशन

Bhopal AIIMS Cancer News: भारत में 2020 में 7,70,230, 2021 में 7,89,202, और 2022 में 8,08,558 लोगों की कैंसर से मौत हो गई है। साल 2022 में देश में कुल 14,61,427 कैंसर के मामले रिपोर्ट किए गए हैं। यह गंभीर बीमारी बच्चों, युवाओं, और बुजुर्गों को सभी प्रभावित कर रही है। बहुत से मरीज इस लड़ाई में हार जाते हैं, लेकिन कई ऐसे भी हैं जो अपनी जीवनशैली और साहस से इस बीमारी को परास्त करते हैं और दूसरों के लिए प्रेरणा के स्रोत बनते हैं।

आज विश्व कैंसर दिवस के मौके पर, हम आपको एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बताएंगे जिन्होंने 12 महीने के परेशानी के बाद एम्स भोपाल में इलाज कराया और अब वे खुशी के साथ जीवन जी रहे हैं।

Dont be afraid of esophageal cancer, get treatment, successful operation of 62 year old patient in AIIMS Bhopal

62 वर्षीय एक मरीज पिछले 12 महीनों से सीने में जलन और पेट के ऊपरी हिस्से में परेशानी से पीड़ित था । उनकी बाहर जांच की गई और ऊपरी जीआई एंडोस्कोपिक जांच के दौरान पता चला कि मरीज की आहार नली की बीच में गाठ बनी हुई है। उन्होंने इसे हटाने के लिए भोपाल के अन्य अस्पतालों में भी इलाज कराया था और कीमोथेरेपी के साथ-साथ रेडिएशन भी लिया था। लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली, फिर मरीज इसी तरह की परेशानी के साथ एम्स भोपाल में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी ओपीडी में गया।

एम्स भोपाल में क्लिनिकल और रेडियोलॉजिकल जांच के बाद यह पाया गया कि बीमारी ग्रासनली तक ही सीमित थी और ऑपरेशन योग्य थी और मरीज को ठीक करने के लिए एम्स भोपाल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ नीलेश श्रीवास्तव ने सर्जरी करने का फैसला लिया।

बढ़ती उम्र और खासकर छाती के बीच में बीमारी की स्थिति को देखते हुए सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी। सर्जरी से पहले रोगी को फेफड़ों के व्यायाम और प्रोटीन की खुराक देकर उसमें सुधार किया गया। 10 दिनों के बाद उसकी सर्जरी की गई । 9 घंटे चले इस ऑपरेशन को डॉ नीलेश श्रीवास्तव, डॉ सोनवीर गौतम, वरिष्ठ रेजिडेंट और डॉ हरीश कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर एनेस्थीसिया की टीम ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

सर्जरी के दौरान रोगी को एक फेफड़े के वेंटिलेशन पर रखा गया था और ग्रासनली को हटाने के बाद पेट से एक पाइप बनाकर उसे शेष ग्रासनली से जोड़कर पाचन तंत्र की निरंतरता को फिर से बनाए रखा गया। ऑपरेशन के बाद क्रिटिकल केयर आईसीयू में अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. सौरभ सहगल द्वारा 3 दिनों तक उनका अच्छी तरह से प्रबंधन किया गया।

ग्रासनली एक बहुत ही सामान्य ट्यूमर होता है, जिसका निदान आमतौर पर एडवांस स्टेज तक नहीं हो पाता है। हालांकि, इसे सर्जरी के बाद कीमोथेरेपी और रेडिएशन से नियंत्रित किया जा सकता है। तीन चरणों की एसोफेजक्टोमी एक लंबी सर्जरी होती है और इसके सम्बंध में विशेष कैंसर सर्जरी प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है।

इस प्रक्रिया में पहले वक्ष को खोलना होता है और ग्रासनली के रोगग्रस्त हिस्से को हटाना होता है, उसके बाद पेट को खोलना होता है और पेट को एक नली के आकार में संशोधित करना होता है ताकि इसे ग्रासनली की तरह बनाया जा सके और अंत में इस नली को वक्ष से होते हुए गर्दन तक ले जाना होता है जहां इसे शेष ग्रासनली से जोड़ना होता है । इस प्रक्रिया को एम्स भोपाल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग द्वारा किया जाता है, जिसके प्रमुख डॉ. विनय कुमार है> मरीज अब ठीक है और उसे छुट्टी दे दी गई है।

एसोफैगल कैंसर कैसे होता है?

इस कैंसर के होने के पीछे सबसे अहम कारण में तंबाकू का सेवन शामिल है। तंबाकू का सेवन किसी भी रूप में किसी भी तरह की जोखिम से कम नहीं है। इसके अलावा, गरम तरल पदार्थों का सेवन, शरीर में मोटापा, ज्यादा मसाले वाला खाद्य, और स्मोक्ड फूड खाना भी इस कैंसर के लिए आम जोखिम कारक हो सकते हैं। इस तरह की जीवनशैली को बनाए रखने से आहार नली कैंसर होने की संभावना बढ़ सकती है।

यह होते हैं लक्षण

यदि किसी को खाना निगलने में परेशानी होती है और ऐसा 10 से 15 दिन तक लगातार रहता है, तो उसे तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। आहार नली की एंडोस्कोपी से इसका पता लगाया जा सकता है, जिसके बाद वहां से एक छोटा सा नमूना लेकर उस टुकड़े की बायोप्सी की जाती है। इससे पता चलता है कि क्या उसे कैंसर है या नहीं। इसके बाद कैंसर का फैलाव और उसकी स्थिति को जानने के लिए सीटी स्कैन किया जाता है। इन प्रक्रियाओं के बाद उपचार शुरू किया जाता है।

अगर किसी का कैंसर शुरूआती स्टेज में है तो उसे सर्जरी से ठीक किया जा सकता है। लेकिन अगर कैंसर दूसरी या तीसरी स्टेज में है या फिर कैंसर दूसरी जगह पर फैल गया है, तो मरीज को सर्जरी से पहले रेडिएशन थेरेपी या कीमोथेरेपी या फिर दोनों का संयोजन दिया जाता है। इससे उस बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है और सर्जरी के बाद उसे ठीक किया जा सकता है।

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