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MP News: 'ठठरी बार दूंगा'- दामोदर यादव ने लगाया धीरेंद्र शास्त्री पर गालियां और मारने की धमकी का आरोप

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शुक्रवार को एक ऐसा विवाद गरमाया, जो सनातन धर्म की एकता से लेकर सामाजिक सद्भाव तक को चुनौती दे रहा है। बागेश्वर धाम के विवादास्पद पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर दलित-पिछड़ा समाज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष दामोदर यादव ने गंभीर आरोप लगाए हैं।

यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि शास्त्री ने हरियाणा के एक मंच पर उन्हें गालियां दीं और 'ठठरी बार' देकर जिंदा जलाने की धमकी दी।

Damodar Yadav accused Dhirendra Shastri of abusing and threatening to kill him

दामोदर यादव ने शास्त्री की प्रस्तावित 'सनातन एकता पदयात्रा' को रोकने के लिए सोमवार (3 नवंबर 2025) को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर करने का ऐलान किया है। उन्होंने राष्ट्रपति को पहले ही पत्र लिखा था, लेकिन जवाब न मिलने पर कोर्ट का रुख अपनाने का फैसला लिया।

यादव का कहना है कि यह यात्रा संविधान की भावना के विरुद्ध है और सांप्रदायिकता फैला रही है। दूसरी ओर, शास्त्री के समर्थक इसे हिंदू एकता का प्रतीक बता रहे हैं। यह विवाद जातिवाद, धार्मिक एकता और राजनीतिक ध्रुवीकरण के मुद्दों को फिर से उछाल रहा है, खासकर 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के नजदीक आते हुए।

'नालायक की भाषा, जला देने की धमकी'

भोपाल के एक होटल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दामोदर यादव ने शांत लेकिन गुस्से भरे लहजे में कहा, "धीरेंद्र शास्त्री ने हरियाणा के एक मंच पर मुझे गालियां दीं। उन्होंने कहा, 'जो श्रीमान हमारी यात्रा रोकना चाहते हैं, मेरे पास उसका मोबाइल नंबर नहीं है, नहीं तो मैं फोन करके मोबाइल पर ही ठठरी बार देता।' " यादव ने बुंदेलखंडी शब्दावली का हवाला देते हुए स्पष्ट किया, "ठठरी बार देने का मतलब होता है आदमी को जिंदा जला देना। यह किसी नालायक की भाषा हो सकती है। वे कहते हैं कि 'अछूत हमसे दूर हो जा'। मैं बुंदेलखंड से आता हूं, ऐसी धमकियां हमें डराती नहीं, बल्कि जगाती हैं।"

यादव ने वीडियो क्लिपिंग भी दिखाई, जिसमें शास्त्री हरियाणा में कथा के दौरान बोलते नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह धमकी मंगलवार (28 अक्टूबर 2025) को उनकी यात्रा रोकने की मांग के पलटवार में दी गई। यादव ने शास्त्री पर भू-माफिया होने और सांप्रदायिकता फैलाने के पुराने आरोप भी दोहराए। "धीरेंद्र शास्त्री पहले भी ऐसी यात्राएं निकाल चुके हैं, लेकिन इस बार नाम 'सनातन एकता' रखकर वे हिंदू राष्ट्र की मांग कर रहे हैं। भारत संविधान के अनुसार धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। यह गैर-संवैधानिक है।" उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यात्रा नहीं रुकी, तो भोपाल में बड़ा आंदोलन होगा।

सनातन एकता पदयात्रा: धीरेंद्र शास्त्री का 'करो या मरो' का ऐलान

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री 7 नवंबर से 16 नवंबर 2025 तक दिल्ली के छतरपुर से वृंदावन तक लगभग 170 किलोमीटर लंबी 'सनातन हिंदू एकता पदयात्रा' निकालने वाले हैं। यह यात्रा जात-पात, क्षेत्रवाद और भाषावाद के भेद मिटाने का दावा करती है। शास्त्री ने हाल ही में मथुरा के अक्षत महोत्सव में कहा था, "हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा है। सड़क पर उतरने की जरूरत है। भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना है, तो एकजुट हो जाओ।" यात्रा में लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है, और भाजपा नेता वीडी शर्मा जैसे प्रमुख हस्तियां भी जुड़ चुकी हैं।

लेकिन दामोदर यादव ने इसे 'देश तोड़ने वाली साजिश' बताया। उन्होंने कहा, "आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी का मानना है कि यह यात्रा सांप्रदायिकता फैला रही है। हमने राष्ट्रपति को पत्र लिखा, लेकिन जवाब न आने पर कोर्ट जाएंगे।" यादव के संगठन ने धरना-प्रदर्शन की तैयारी भी शुरू कर दी है।

बुधवार को हरियाणा कथा: शास्त्री का पलटवार और विवादित बयान

विवाद की जड़ 29 अक्टूबर 2025 को हरियाणा में शास्त्री की कथा है। दामोदर की यात्रा रोकने की मांग के जवाब में शास्त्री ने कहा, "लोग कोर्ट जाने की धमकी दे रहे हैं। उन्हें पता ही नहीं कि हम बहुत टेढ़े आदमी हैं। उन्हें छेड़ना नहीं चाहिए था, छेड़ा है तो हम छोड़ेंगे भी नहीं। आज वो 20 प्रतिशत हैं, आप 9 राज्यों में अल्पसंख्यक हो गए। जिस दिन वो 50 प्रतिशत पहुंच जाएंगे, तो आपके ब्रज में भी वही टोपी वाले दिखाई पड़ेंगे। भारत को बचाना है, अपनी संस्कृति को बचाना है, तो जातिवाद और भेदभाव से ऊपर उठकर सनातनी बनना है।"

शास्त्री के 'टोपी वाले' वाले बयान को विपक्ष ने मुस्लिम-विरोधी बताया। दामोदर ने इसे 'भड़काऊ' करार दिया, जबकि शास्त्री के समर्थकों ने इसे 'सांस्कृतिक चेतावनी' कहा। एक वीडियो में शास्त्री कहते दिखे, "मोबाइल नंबर होता तो ठठरी बार देता" - जिसे यादव ने धमकी के रूप में पेश किया।

शास्त्री की पुरानी यात्राएं और विवाद

धीरेंद्र शास्त्री ने हाल ही में 21-29 नवंबर 2024 में बागेश्वर धाम से ओरछा तक 160 किमी की 'सनातन हिंदू एकता पदयात्रा' निकाली थी, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। इसमें भाजपा नेता राकेश सिंह और कांग्रेस के जयवर्धन सिंह जैसे नाम भी थे। शास्त्री ने कहा था, "यह शोभायात्रा नहीं, जागृति यात्रा है। जागो हिंदुओं, वरना अल्पसंख्यक हो जाओगे।" लेकिन यात्रा के दौरान झांसी में किसी ने उन पर मोबाइल फेंक दिया, जिसे शास्त्री ने 'श्रद्धालु की गलती' बताया।

शास्त्री पर अंधविश्वास फैलाने, 'सर तन से जुदा' जैसे नारों को बढ़ावा देने के आरोप पहले भी लगे हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "हम मुस्लिम-विरोधी नहीं, लेकिन हिंदू एकता जरूरी है।" दामोदर यादव ने इन्हीं बयानों को आधार बनाकर याचिका की तैयारी की है।

सोशल मीडिया पर बवाल: समर्थन और विरोध की बाढ़

भाजपा ने यात्रा का खुला समर्थन किया। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा, "यह हिंदू एकता का प्रतीक है।" लेकिन कांग्रेस और आजाद समाज पार्टी ने इसे 'राजनीतिक साजिश' बताया। दामोदर ने कहा, "शास्त्री योगी आदित्यनाथ के नक्शेकदम पर चल रहे हैं।" विशेषज्ञों का मानना है कि यह 2027 यूपी चुनावों से जुड़ा है।

हाईकोर्ट याचिका: क्या होगा असर?

यादव की याचिका में यात्रा को 'सार्वजनिक शांति भंग करने वाली' बताया जाएगा। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) और 51ए (सद्भाव) के बीच संतुलन बिठाएगा। यदि याचिका स्वीकार हुई, तो यात्रा रुक सकती है। फिलहाल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश पुलिस अलर्ट हैं।

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