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MP News: ओबीसी आरक्षण को लेकर कांग्रेस का ऐलान, सड़क से सदन तक लड़ेगी आरपार की लड़ाई

MP News: मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27% आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर सियासी और सामाजिक तूफान का केंद्र बन गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बीजेपी सरकार पर ओबीसी समाज के साथ "धोखाधड़ी, विश्वासघात और शर्मनाक अन्याय" का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है।

एक संयुक्त प्रेस वार्ता में दोनों नेताओं ने बीजेपी की ओबीसी विरोधी नीतियों को उजागर करते हुए ऐलान किया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर सड़क से लेकर सदन तक आरपार की लड़ाई लड़ेगी। यह प्रेस वार्ता 4 जुलाई 2025 को भोपाल में आयोजित की गई, जिसमें पूर्व मंत्री सचिन यादव, मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक, वरिष्ठ वकील वरुण ठाकुर सहित कई कांग्रेसी नेता मौजूद रहे।

Congress will fight a do-or-die battle for OBC reservation in MP Jeetu Patwari Umang Singhar

बीजेपी पर गंभीर आरोप, संविधान का अपमान, ओबीसी का हक छीनने की साजिश

जीतू पटवारी ने प्रेस वार्ता में बीजेपी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "बीजेपी का ओबीसी विरोधी चेहरा अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। यह सरकार मध्य प्रदेश की 50% से अधिक ओबीसी आबादी के संवैधानिक हक को कुचल रही है। संविधान में स्पष्ट है कि विधायिका द्वारा बनाए गए कानून को लागू करना कार्यपालिका की जिम्मेदारी है, लेकिन मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के बार-बार के निर्देशों को पैरों तले रौंद रही है।"

पटवारी ने बीजेपी पर संविधान के मूल ढांचे के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया और कहा, "यह सरकार ओबीसी समाज को गुलाम बनाए रखने और उनके बच्चों का भविष्य छीनने की साजिश रच रही है। बीजेपी के झूठे वादों और खोखले नारों में न आएं। हम ओबीसी समाज के साथ मिलकर प्रदेशव्यापी आंदोलन की आंधी छेड़ेंगे और बीजेपी के इस घिनौने चेहरे को बेनकाब करेंगे।"

उमंग सिंघार का तीखा हमला, बीजेपी की मनुवादी सोच

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बीजेपी को आड़े हाथों लेते हुए कहा, "पहले शिवराज सिंह चौहान और अब मोहन यादव, दोनों ओबीसी मुख्यमंत्री होने के बावजूद ओबीसी समाज को और पिछड़ा कर रहे हैं। बीजेपी की मनुवादी सोच, जो आरएसएस से प्रेरित है, दलितों, आदिवासियों, ओबीसी, और अल्पसंख्यकों को उनका हक देने से रोक रही है।" उन्होंने राहुल गांधी का जिक्र करते हुए कहा, "राहुल जी जातिगत जनगणना की बात करते हैं, ताकि हर वर्ग को उसका उचित हक मिले। लेकिन बीजेपी और आरएसएस की नीति सामाजिक न्याय को कुचलने की है।"

सिंघार ने सरकार से तत्काल 27% ओबीसी आरक्षण लागू करने और 13% होल्ड पदों पर भर्तियां शुरू करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी, "यदि सरकार ने ओबीसी समाज के हक को तुरंत लागू नहीं किया, तो कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक आरपार की लड़ाई लड़ेगी।"

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसले: बीजेपी के बहाने फेल

कांग्रेस नेताओं ने कोर्ट के हालिया फैसलों का हवाला देते हुए बीजेपी की टालमटोल नीति को उजागर किया। उन्होंने बताया:

  • 26 फरवरी 2025: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि 27% ओबीसी आरक्षण पर कोई कानूनी रोक नहीं है। इस फैसले ने सरकार के सभी बहानों को खारिज कर दिया।
  • 7 अप्रैल 2025: सुप्रीम कोर्ट ने 'यूथ फॉर इक्वलिटी' की याचिका को खारिज करते हुए दोहराया कि 27% ओबीसी आरक्षण लागू करने में कोई कानूनी अड़चन नहीं है।
  • 25 जून 2025: सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए सवाल किया, "जब 13% पद होल्ड पर हैं और कोई कानूनी बाधा नहीं है, तो 27% आरक्षण लागू करने में देरी क्यों?"
  • इन फैसलों के बावजूद, बीजेपी सरकार ने 27% आरक्षण को लागू करने में कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिसे कांग्रेस ने "संवैधानिक अपराध" करार दिया है।

2019 का क्रांतिकारी फैसला और बीजेपी की साजिश

जीतू पटवारी ने 2019 के उस ऐतिहासिक फैसले को याद किया, जब तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने कमलनाथ के नेतृत्व में ओबीसी आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% करने का बिल पास किया था। यह बिल विधानसभा और कैबिनेट से मंजूरी के बाद लागू हुआ था, जिसे मध्य प्रदेश की 50.09% ओबीसी आबादी के लिए सामाजिक न्याय की दिशा में क्रांतिकारी कदम माना गया। पटवारी ने कहा, "यह फैसला ओबीसी समाज के उत्थान और समानता का प्रतीक था। लेकिन बीजेपी ने सत्ता में आने के बाद इस हक को छीनने का षड्यंत्र रचा और 87:13 फॉर्मूले के तहत भर्तियों को रोककर ओबीसी युवाओं के सपनों को कुचल दिया।"

87:13 फॉर्मूला और होल्ड पदों का विवाद

2019 में हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने 87:13 फॉर्मूले को अपनाया, जिसमें 87% पदों पर भर्तियां की जा रही हैं, जबकि 13% पदों को होल्ड रखा गया है। इन होल्ड पदों पर चयनित ओबीसी उम्मीदवारों की नियुक्तियां लंबित हैं, जिससे हजारों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सरकार से सवाल किया कि इन 13% पदों पर नियुक्तियों में क्या दिक्कत है, लेकिन सरकार ने अभी तक कोई ठोस जवाब नहीं दिया।

कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि इन होल्ड पदों पर तत्काल नियुक्तियां शुरू की जाएं, ताकि चयनित उम्मीदवारों को उनका हक मिल सके। उमंग सिंघार ने कहा, "इन पदों पर चयनित युवा सालों से इंतजार कर रहे हैं। बीजेपी उनकी जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रही है।"

ओबीसी समाज का आक्रोश और कांग्रेस का आंदोलन

जीतू पटवारी ने ओबीसी समाज से एकजुट होकर सड़कों पर उतरने की अपील की। उन्होंने कहा, "यह समय खामोश रहने का नहीं है। बीजेपी की साजिश को उजागर करने के लिए हर ओबीसी भाई-बहन को आगे आना होगा।" उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस पूरे प्रदेश में आंदोलन शुरू करेगी, जिसमें रैलियां, प्रदर्शन, और धरने शामिल होंगे। उन्होंने कहा, "हम बीजेपी के इस ओबीसी विरोधी चेहरे को हर गांव, हर शहर में बेनकाब करेंगे।"

उमंग सिंघार ने भी ओबीसी समाज को आश्वस्त किया कि कांग्रेस उनकी हर लड़ाई में साथ देगी। उन्होंने कहा, "बीजेपी ने ओबीसी समाज को केवल वोट बैंक समझा है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि ओबीसी समाज को उसका हक मिले, चाहे इसके लिए कितनी भी बड़ी लड़ाई क्यों न लड़नी पड़े।"

बीजेपी का पक्ष, टालमटोल या प्रतिबद्धता?

बीजेपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया है कि वह 27% ओबीसी आरक्षण लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले का इंतजार कर रही है। सरकार के वकील और Advocate General प्रशांत सिंह ने कहा कि 13% होल्ड पदों पर नियुक्तियां सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद ही संभव होंगी, ताकि भविष्य में कोई कानूनी अड़चन न आए। हालांकि, कांग्रेस ने इसे सरकार की टालमटोल नीति का हिस्सा बताया और कहा कि बीजेपी कोर्ट के फैसलों का बहाना बनाकर ओबीसी समाज को ठग रही है।

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