MP News: बिहार में CM मोहन यादव का प्रचार, महागठबंधन पर कही बड़ी बात, क्या BJP को मिलेगा फायदा? जानिए
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए प्रचार का शोर चरम पर है, और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को बगहा, सिकटा और सहरसा में NDA प्रत्याशियों के समर्थन में जोरदार जनसभाएं कीं। उनके भाषणों में मिथिला की पवित्र धरती, भगवान श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र और PM नरेंद्र मोदी की उपलब्धियों का बखान था।
सीएम ने बिहार की जनता को 'वोट की ताकत' को सुदर्शन चक्र से जोड़ते हुए कहा, "जैसे श्रीकृष्ण ने शिशुपाल की 100वीं गलती पर सुदर्शन चक्र से अंत किया, वैसे ही मतदान वाले दिन आपकी ऊंगली पर सुदर्शन चक्र आएगा। इस नापाक महागठबंधन को उखाड़ फेंकें!" उन्होंने राम मंदिर, महादलित-OBC आयोग, और NDA के सुशासन को गिनाया, जबकि कांग्रेस और RJD पर परिवारवाद और देश को बदनाम करने का आरोप लगाया।

लेकिन क्या मोहन यादव का यह प्रचार बिहार में NDA को जिताने का 'सुदर्शन चक्र' साबित होगा? आइए, इस प्रचार की पूरी कहानी-प्रभाव, संदेश और चुनौतियों को समझते हैं।
जनसभाओं का जोश: बगहा, सिकटा, सहरसा में 'सुदर्शन चक्र' की गूंज
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को बिहार के तीन विधानसभा क्षेत्रों-पश्चिम चंपारण के बगहा, सिकटा और सहरसा में-NDA प्रत्याशियों के लिए प्रचार किया। उनकी सभाओं में हजारों लोग उमड़े, और 'मोदी-मोहन' के नारे गूंजे। बगहा में उन्होंने कहा, "यह पवित्र धरती श्रीकृष्ण के पुत्र सांब की है, जिन्होंने सूर्य मंदिर बनवाया। माता सीता की जन्मस्थली और भगवान राम के दामाद की धरती पर महागठबंधन का कोई हक नहीं।" सिकटा में उन्होंने गौतम बुद्ध और जैन तीर्थंकर महावीर की कर्मभूमि का जिक्र कर बिहारियों की बुद्धिमत्ता की तारीफ की, "बिहार से अच्छे लोग कहीं नहीं। IAS, IPS, डॉक्टर, इंजीनियर-सब बिहार से!"
सहरसा में उनका भाषण और तीखा था। उन्होंने RJD और कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा, "जिन्होंने आपातकाल में बिहार के नेताओं को जेल भेजा, उसी कांग्रेस के शहजादे के साथ RJD खड़ा है। लालू जी ने मीसा नाम रखा, लेकिन अब वह कांग्रेस की गोद में।" उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि 6-11 नवंबर के मतदान में NDA को जिताकर 'गुंडाराज' को खत्म करें।
'सुदर्शन चक्र' का संदेश: वोट की ताकत से 'महागठबंधन का अंत'
डॉ यादव ने बिहार की जनता को 'सुदर्शन चक्र' से प्रेरित किया। "श्रीकृष्ण ने शिशुपाल की 99 गलतियां माफ कीं, लेकिन 100वीं पर सुदर्शन चक्र चला। आपकी ऊंगली पर वोट का चक्र है-महागठबंधन को उखाड़ फेंकें!" यह संदेश बिहार के ग्रामीण मतदाताओं, खासकर OBC और दलित समुदायों को लुभाने की रणनीति था। उन्होंने PM मोदी की उपलब्धियां गिनाईं:
महादलित और OBC आयोग: "मोदी जी ने बिहार को ये सौगात दी।"
- राम मंदिर: "कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में रोड़े अटकाए, लेकिन मोदी जी ने अयोध्या में भव्य मंदिर बनवाया।"
- आदिवासी गौरव: "द्रौपदी मुर्मु को पहली आदिवासी राष्ट्रपति बनाया।"
- उन्होंने NDA के सुशासन की तारीफ की, "पूर्णिया का एयरपोर्ट, सड़कें, स्कूल, अस्पताल-यह सब NDA की देन। पहले बिहार में गुंडाराज था, लोग सूरज डूबने से पहले घर लौटते थे।"
कांग्रेस-RJD पर तंज: 'परिवारवाद और देश का अपमान'
मोहन यादव ने कांग्रेस और RJD को 'परिवारवादी' करार दिया। "नेहरू, इंदिरा, राजीव, सोनिया, और अब राहुल-कांग्रेस में सत्ता एक परिवार में। लेकिन मोदी जी कहते हैं, पूरा देश मेरा परिवार।" उन्होंने राहुल गांधी पर विदेश में 'भारत को बदनाम' करने का आरोप लगाया, "हमारी सेना आतंकियों को घर में घुसकर मारती है, लेकिन राहुल उसका अपमान करते हैं।" RJD पर तंज कसते हुए कहा, "आपातकाल का विरोध करने वाले अब कांग्रेस की गोद में। मीसा का नाम रखा, लेकिन अब वह उसी का साथ दे रहे।"
उन्होंने लालू यादव के परिवार पर भी निशाना साधा, "RJD में सत्ता लालू के परिवार तक सीमित। बिहार का युवा इससे ज्यादा चाहता है।" यह बयान बिहार के युवा वोटरों को NDA की ओर खींचने की कोशिश थी।
बिहार की तारीफ: 'सबसे बेहतर लोग, माता सीता की धरती'
डॉ. यादव ने बिहार की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को जमकर सराहा। "माता सीता की जन्मस्थली, भगवान राम के दामाद की धरती। बुद्ध, महावीर की कर्मभूमि। IAS, IPS, डॉक्टर, इंजीनियर-बिहार से बेहतर कोई नहीं।" उन्होंने बिहारियों के व्यापारिक कौशल की तारीफ की, "जो करते हैं, सबसे बेहतर करते हैं।" यह संदेश स्थानीय गर्व को जगाने और NDA को 'बिहार के अपने' के रूप में पेश करने की रणनीति थी।
प्रचार का प्रभाव: क्या NDA को मिलेगा बूस्ट?
मोहन यादव का प्रचार बिहार में NDA के लिए कितना प्रभावी होगा? विशेषज्ञों का कहना है कि उनका OBC बैकग्राउंड (यादव समुदाय) और धार्मिक-सांस्कृतिक संदेश RJD के कोर वोट बैंक (यादव, मुस्लिम) को टारगेट कर सकता है। बगहा और सिकटा में OBC-दलित वोटरों की बहुलता है, जहां NDA के प्रत्याशी मजबूत हैं। सहरसा में भी उनकी सभाओं में भीड़ उत्साहजनक थी।
चुनौतियां: बेरोजगारी, पलायन और महागठबंधन का जवाब
बिहार में बेरोजगारी (15% बेरोजगारी दर) और पलायन बड़ा मुद्दा है। महागठबंधन इन मुद्दों पर NDA को घेर रहा है। तेजस्वी यादव की रैलियों में युवा भीड़ जुट रही है, और RJD का वादा है-10 लाख नौकरियां। मोहन यादव के धार्मिक और सांस्कृतिक संदेश ग्रामीण वोटरों को लुभा सकते हैं, लेकिन शहरी और युवा वोटरों में कितना असर होगा, यह सवाल है।












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