छिंदवाड़ा कांड: मृतक बच्चों के परिजनों को सरकार देगी 4-4 लाख की सहायता, पूर्व मंत्री ने की पोस्टमॉर्टम मांग
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से निकले कफ सिरप कांड ने अब राज्य सरकार को कटघरे में ला खड़ा किया है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के सख्त निर्देश पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 'कोल्ड्रिफ सिरप' की बिक्री, वितरण और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। सिरप में पाए गए 48.6% डायथिलीन ग्लाइकॉल जैसे जहरीले पदार्थ ने 9 मासूम बच्चों की जान ली, और अब मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने के आदेश जारी हो गए हैं।
डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने कहा, "दोषियों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।" लेकिन विपक्ष ने इसे "शिवराज सरकार की नाकामी" करार देते हुए पोस्टमॉर्टम की मांग की है। मध्य प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने तीखा प्रहार किया - "यह हादसा नहीं, लापरवाही का जीता-जागता सबूत है। ड्रग कंट्रोल एजेंसी सो क्यों रही थी?"

मुख्यमंत्री का त्वरित एक्शन: सिरप बैन, 4 लाख सहायता और दोषियों पर शिकंजा
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग को सख्त निर्देश दिए, और शुक्रवार को आदेश जारी हो गया। स्वास्थ्य आयुक्त की ओर से सभी जिलाधिकारियों और ड्रग कंट्रोलर को भेजे गए आदेश में साफ कहा गया: "सिरप के नमूने मिलावटी पाए गए हैं, क्योंकि इसमें डायथिलीन ग्लाइकॉल (48.6% w/v) है जो जहरीला पदार्थ है जो सामग्री को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बना सकता है।" तमिलनाडु लैब की रिपोर्ट ने पुष्टि की कि सिरप में यह रसायन घातक स्तर पर मौजूद था, जो किडनी को नष्ट कर देता है।
मुख्यमंत्री ने मृतक बच्चों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की तत्काल सहायता राशि देने का ऐलान किया। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने कहा, "यह दुखद घटना है। दोषी कंपनियों और जिम्मेदारों को बख्शा नहीं जाएगा। ICMR रिपोर्ट का इंतजार, लेकिन कार्रवाई तेज।" आदेश में 6-सूत्री प्लान है: सिरप फ्रीज करें, बिक्री रोकें, नमूने लें, निर्माता के सभी उत्पाद जांचें, और आवाजाही पर नजर। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर में छापेमारी शुरू - 50+ दुकानों से सिरप जब्त।
परिजनों की प्रतिक्रिया सकारात्मक, लेकिन गुस्सा बरकरार। एक मां ने कहा, "पैसे से बच्चा वापस नहीं आएगा। सिरप क्यों बिका? जांच पूरी हो।"
कांग्रेस का तीखा हमला: "शिवराज सरकार की लापरवाही, पोस्टमॉर्टम कराएं"
मध्य प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने छिंदवाड़ा पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने कहा, "9 मासूमों की मौत ने मध्य प्रदेश को झकझोर दिया। यह सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि शिवराज सरकार की नाकामी और लापरवाही का जीता-जागता सबूत है। तमिलनाडु सरकार की जांच में साफ हो चुका कि कफ सिरप में 48.6% डायथिलीन ग्लाइकॉल था। सवाल यह है कि मध्य प्रदेश की ड्रग कंट्रोल एजेंसी और स्वास्थ्य विभाग सो क्यों रहे थे? क्या सरकार की जिम्मेदारी सिर्फ सत्ता बचाने तक सीमित रह गई? बच्चों की मौत का गुनाहगार कौन? भाजपा सरकार को बताना होगा कि जहरीली दवाइयों की जांच, निगरानी और नियंत्रण में इतनी बड़ी चूक क्यों हुई।"
नायक ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सार्वजनिक करने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस ने राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया - "बच्चों की मौत पर काला दिवस।" कमलनाथ ने ट्वीट किया, "मोहन सरकार, जवाब दो!" भाजपा ने बचाव किया - "त्वरित बैन लगाया। विपक्ष सियासत कर रहा।"
डायथिलीन ग्लाइकॉल - मीठे स्वाद का घातक जाल
डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) - एक सस्ता रसायन जो ग्लिसरीन की जगह दवाओं को मीठा बनाने में डाला जाता है। लेकिन WHO के अनुसार, यह किडनी को घातक नुकसान पहुंचाता है। 2018 के उत्तर प्रदेश कांड में 100+ मौतें हुईं। डॉ. राकेश मिश्रा ने कहा, "वायरल इंफेक्शन से शुरू, लेकिन सिरप ने किडनी डैमेज की। 48.6% DEG - हत्या जैसा।" निर्माता श्रीसन फार्मास्युटिकल (कांचीपुरम) पर CDSCO ने नोटिस। तमिलनाडु में फैक्ट्री सील। राजस्थान में भी सिरप बैन। परिजनों ने बताया, "सस्ता सिरप लिया, बच्चा ठीक लग रहा था। लेकिन रात में सांसें थम गईं।" 9 मौतें - सभी 1-7 साल।












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