भोपाल में धूमधाम से मनाया गया भगवान झूलेलाल का जन्म उत्सव, बीजेपी नेता केसवानी और विरानी ने की प्रार्थना

भोपाल में भगवान झूलेलाल के जन्म उत्सव पर मनाया गया चेतीचांद का पर्व। भाजपा नेता डॉ‍ दुर्गेश केसवानी और विकास विरानी ने शीतलदास बगिया में पहुंचकर पूजा-अर्चना की।

भोपाल में धूमधाम से मनाया गया भगवान झूलेलाल का जन्म उत्सव

राजधानी भोपाल में आज सिंधी समुदाय का प्रमुख त्यौहार चेतीचांद बड़े धूमधाम के साथ मनाया गया। बता दे ये पर्व सिंधी समाज के आराध्य देवता भगवान झूलेलाल की जयंती पर मनाया जाता है। भोपाल के बैरागढ़ में भगवान झूलेलाल के जन्म उत्सव पर भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया। इस दौरान जुलूस भी निकाला गया। जिसमें सिंधी समाज के लोगों ने जमकर डीजे पर डांस किया।

भोपाल में गुरुवार को चेतीचांद के अवसर पर शहर में जगह जगह धार्मिय यात्राएं और कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में शीतलदास की बगिया पर हर्षोल्लास के साथ सिंधी समाज के अनुयायियों ने छैज नृत्य करते हुए भगवान झूलेलाल की पूजा अर्चना की और बहिराणा साहिब का विसर्जन किया। इस अवसर पर विशेष रूप भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ दुर्गेश केसवानी और पूर्व जिलाध्यक्ष विकास विरानी उपस्थित रहे। डॉ केसवानी ने बताया कि चैतीचांद के अवसर पर विशेष रूप से जल और ज्योति की पूजा अर्चना कर भगवान झूलेलाल का स्मरण किया जाता है।

की गई प्रदेश के सुख समृद्धि की प्रार्थना

इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान झूलेलाल साहिब से प्रेम, शांति व सद्भाव के लिए प्रार्थना की। इसी के साथ प्रदेश को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने, बीमारियों से बचाने के साथ सब की सुख-शांति, समृद्धि व संपन्नता की भी प्रार्थना की गई। सभी ने पल्लव पहनकर विशेष अरदास की।

संत झूलेलाल की पूजा का ये है महत्व

धार्मिक मान्यता है कि भगवान झूलेलाल वरुण देव के अवतार हैं कहते हैं कि चैतीचंद के दिन भगवान झूलेलाल की पूजा से सुख समृद्धि का वरदान मिलता है और व्यापार में कभी कोई रुकावट नहीं आती उपासक भगवान झूलेलाल को उदेरोलाल घोड़ेवारो, जिंदपीर, लालसाईं, पल्लेवारों, ज्योतिनवारो, अमरलाल आदि के नामों से भी पूजते हैं।

भगवान झूलेलाल के अवतार के पीछे की वजह

संवत 1007 में पाकिस्तान में सिंध प्रदेश के ठट्टा नगर में मिरखशाह नामक एक मुगल सम्राट हुकूमत करता था। उसने जुल्म करके हिंदू आदि अन्य धर्मों के लोगों को इस्लाम स्वीकार करने के लिए मजबूर कर दिया। उसके आतंक से तंग आकर सभी ने सिंधु नदी के किनारे इकट्ठा होकर भगवान का स्मरण किया। इसके बाद भक्तों की तपस्या के परिणाम स्वरूप नदी में मछली पर सवार एक अद्भुत आकृति नजर आई और फिर ठीक 7 दिन बाद चमत्कारी बालक ने श्रीरत्नराय नारायण लोहाना के घर जन्म लिया, इन्हें ही भगवान झूलेलाल कहा जाता है।

मिरख शाह को हराया

बताया जाता है कि मिरख शाह ने उस बालक को मारने की कई बार कोशिश की, लेकिन वह नाकाम रहा। बालक ने मिरखशाह को कई बार हिंदुओं पर अत्याचार न करने की चेतावनी भी दी, लेकिन वह माना नहीं। जिसके बाद अवतारी युगपुरुष भगवान झूलेलाल ने मिरख शाह को हरा दिया। वहीं एक मान्यता है कि प्राचीन काल में जब सिंधी समाज के लोग व्यापार से संबंधित जल मार्ग से यात्रा कर रहे थे, तब यात्रा को सफल बनाने के लिए जल देवता झूलेलाल से प्रार्थना करते थे और यात्रा सफल होने पर भगवान झूलेलाल का आभार व्यक्त किया जाता था। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए चैतीचांद का त्यौहार मनाया जाने लगा।

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