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Bhopal News: ‘नो हेलमेट, नो पेट्रोल’ आदेश हवाहवाई: बैरसिया में तीन पंपों पर FIR, लेकिन शहर में कब होगी सख्ती?

MP Bhopal News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन ने 'नो हेलमेट, नो पेट्रोल' आदेश लागू किया, लेकिन यह नियम लागू होने के दूसरे दिन ही हवाहवाई साबित हो रहा है। भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने 30 जुलाई 2025 को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किया था, जिसके तहत 1 अगस्त से बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चालकों को पेट्रोल या सीएनजी नहीं दी जानी थी।

पहले दिन सख्ती दिखी, लेकिन 2 अगस्त को कई पेट्रोल पंपों पर नियम की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं। बैरसिया में तीन पेट्रोल पंपों पर उल्लंघन के लिए FIR दर्ज की गई, लेकिन शहर के अन्य हिस्सों में कार्रवाई का इंतजार है। भोपाल में आज से 'नो हेलमेट, नो पेट्रोल' नियम लागू। बिना हेलमेट के टूव्हीलर्स चालकों को नहीं मिलेगा पेट्रोल।ॉ

Bhopal No helmet no petrol order is a hoax FIR against three pumps in Berasia in mp

आदेश का पहला दिन: सख्ती और जागरूकता

भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने 30 जुलाई 2025 को आदेश जारी किया कि बिना ISI मार्क हेलमेट के दोपहिया वाहन चालकों को पेट्रोल या सीएनजी नहीं दी जाएगी। यह नियम 1 अगस्त से 29 सितंबर 2025 तक लागू रहेगा और इसका उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

पहले दिन, 1 अगस्त को, कई पेट्रोल पंपों पर सख्ती दिखी। पंप कर्मचारियों ने बिना हेलमेट वालों को पेट्रोल देने से मना कर दिया, और कुछ स्थानों पर समझाइश भी दी गई। हालांकि, कुछ चालकों ने जुगाड़ निकाला-लोग एक-दूसरे से हेलमेट उधार लेकर पेट्रोल भरवाने लगे। शहर के कई पंपों पर लोग हेलमेट की अदला-बदली करते या किराए पर हेलमेट लेते देखे गए।

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दूसरे दिन: नियम की धज्जियां, जांच में खुलासा

1 अगस्त को सख्ती के बाद, 2 अगस्त को नियम का पालन कमजोर पड़ गया। OneIndia Hindi ने 2 अगस्त 2025 को अयोध्या पास सहित पांच पेट्रोल पंपों की पड़ताल की, जिसमें चार पंपों पर कर्मचारी बिना हेलमेट वालों को पेट्रोल देते पाए गए। केवल एक पंप ने नियम का सख्ती से पालन किया। पेट्रोल पंप कर्मचारियों ने बताया कि ग्राहकों के साथ विवाद से बचने के लिए वे दबाव में पेट्रोल दे रहे हैं।

लोग 'इसकी टोपी उसके सर' जुगाड़ अपना रहे हैं, जहां चालक दूसरे से हेलमेट उधार लेकर पेट्रोल भरवा रहे हैं। एक मामले में, रीगल चौराहा के खादीवाला पंप पर कर्मचारी इशारों में हेलमेट उपलब्ध करवा रहे थे। कुछ स्थानों पर बैनर और स्लोगन तो लगे, लेकिन जमीनी स्तर पर नियम का पालन नहीं हुआ।

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बैरसिया में कार्रवाई: तीन पंपों पर FIR

2 अगस्त 2025 को प्रशासन ने बैरसिया क्षेत्र के पेट्रोल पंपों पर औचक निरीक्षण किया। जांच में तीन पंपों-जिनके नाम सार्वजनिक नहीं किए गए-पर कर्मचारी बिना हेलमेट वालों को पेट्रोल देते पाए गए। इनके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और कलेक्टर के आदेश के उल्लंघन के तहत FIR दर्ज की गई। भोपाल कलेक्टर ने कहा, "नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। हम पंप संचालकों को चेतावनी दे चुके हैं।"

हालांकि, बैरसिया में कार्रवाई के बावजूद, भोपाल शहर के अन्य हिस्सों में उल्लंघन जारी है। मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने कहा, "आदेश का पालन जरूरी है, लेकिन कर्मचारियों को ग्राहकों के गुस्से और मारपीट का डर है। प्रशासन को प्रत्येक पंप पर होमगार्ड या पुलिस तैनात करनी चाहिए।"

सुप्रीम कोर्ट और प्रशासन की पहल

यह आदेश सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष और पूर्व न्यायाधीश अभय मनोहर सप्रे के निर्देशों के बाद जारी किया गया। सप्रे ने 29 जुलाई को इंदौर में जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में हेलमेट और सीटबेल्ट नियमों की सख्ती से पालना करने को कहा था। भोपाल में सड़क हादसों में बढ़ती मृत्यु दर-विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों में-के कारण यह कदम उठाया गया। मध्य प्रदेश मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 129 के तहत हेलमेट अनिवार्य है, और इसका उल्लंघन करने पर ₹1,000 से ₹25,000 तक का जुर्माना हो सकता है।

भोपाल और इंदौर में हेलमेट की मांग 10% बढ़ गई है, लेकिन लोग सस्ते और गैर-ISI हेलमेट खरीद रहे हैं, जो सुरक्षा के लिए अपर्याप्त हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि मेडिकल आपातकाल या विशेष परिस्थितियों में यह नियम लागू नहीं होगा।

शहर में कार्रवाई की चुनौतियां

भोपाल में करीब 192 पेट्रोल पंप हैं, जहां प्रतिदिन 21 लाख लीटर पेट्रोल और डीजल की खपत होती है। इतने बड़े पैमाने पर नियम लागू करना चुनौतीपूर्ण है। 4 फरवरी 2025 को मऊ के ग्रामीण इलाकों का उदाहरण दिया, जहां 'नो हेलमेट, नो फ्यूल' नियम केवल कागजी साबित हुआ। भोपाल में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है। कई पंपों पर बैनर लगे हैं, लेकिन कर्मचारी ग्राहकों के दबाव में नियम तोड़ रहे हैं।

पेट्रोल पंप डीलर्स ने सुझाव दिया कि प्रशासन सीसीटीवी फुटेज के जरिए बिना हेलमेट वालों पर चालान करे, ताकि पंप कर्मचारियों पर बोझ कम हो।

अन्य राज्यों में स्थिति

यह नियम मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश में भी 8 जनवरी से 'नो हेलमेट, नो फ्यूल' नियम लागू है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इसका पालन नहीं हो रहा। हापुड़ में 26 जनवरी से यह नियम सख्ती से लागू किया गया, जहां सीसीटीवी निगरानी और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।

चुनौतियां और भविष्य

  • यह हादसा कई सवाल खड़े करता है:
  • निगरानी की कमी: भोपाल के 192 पेट्रोल पंपों पर नियमित निरीक्षण के लिए कितनी टीमें हैं?
  • जागरूकता: क्या प्रशासन स्कूलों और कॉलेजों में हेलमेट जागरूकता अभियान चलाएगा?
  • जुर्माना: बिना हेलमेट पेट्रोल लेने वालों पर चालान की प्रक्रिया कब शुरू होगी?
  • पंप कर्मचारियों की सुरक्षा: विवादों से बचाने के लिए क्या होमगार्ड तैनात किए जाएंगे?

भोपाल और इंदौर में कलेक्टरों ने निरीक्षण के लिए टीमें गठित की हैं, लेकिन अभी तक शहरव्यापी कार्रवाई सीमित है। बैरसिया में तीन FIRs एक शुरुआत हैं, लेकिन शहर के अन्य हिस्सों में सख्ती का इंतजार है।

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