"किन्नर" समुदाय के लिए भोपाल में मनाया जाता है त्योहार
भोपाल। उच्चतम न्यायायल के बाद किन्नरों को सम्मान दिया है तो वर्तमान परिद्रश्य को देखते हुए भोपाल ने दिया है। भोपाल में किन्नर समुदाय के लिए अलग से विशेष तौर पर त्योहार मनाया जाता है। इसकी शुरूआत आज से नहीं बल्कि राजाभोज के जमाने में हो चुकी थी। आज भी यह त्योहार उसी हर्षोल्लास से मनाया जाता है। राखी के दो दिन बाद इस त्योहार को मनाते हैं। इसकी तैयारी रक्षाबंधन के आठ दिन पहले से ही शुरू हो जाती है। इसमें किन्नरों को अपने पसंदीदा कपड़े पहनकर और नाचने-गाने का मौका मिलता यही नहीं, किन्नर समुदाय इसी दौरान अपने खुशियों को महसूस कर पाता है। आइए देखिए फोटो में कुछ विशेष बातें-

किन्नरों के लिए त्योहार
बताया जाता है कि मध्य प्रदेश में राजाभोज के समय में आकाल पड़ा था। उस दौरान किन्नरों ने दुआएं की थीं। जिसके बाद आकाल और दुख दर्द से छुटकारा मिला था। इसकी खुशी में राजा ने किन्नरों को भुजरिया यानी परम्परा अनुसार त्योहार मनाने के लिए कहा। बस तभी से ही यह त्योहार मनाया जा रहा है।

किन्नरों दुनिया
राखी के दो दिन बाद इस त्योहार को मनाते हैं। इसकी तैयारी रक्षाबंधन के आठ दिन पहले से ही शुरू हो जाती है। इसमें किन्नरों को अपने पसंदीदा कपड़े पहनकर और नाचने-गाने का मौका मिलता यही नहीं, किन्नर समुदाय इसी दौरान अपने खुशियों को महसूस कर पाता है।

तीसरी लिंग श्रेणी हैं किन्नर
उच्चतम न्यायालय ने गत दिनों दिए अपने एक आदेश में किन्नर समुदाय को जीने की आजादी दी थी। उच्चतम न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला देते हुए कहा था कि किन्नरों को शिक्ष व आरक्षण दें क्यों वह तीसरी लिंग श्रेणी में आते हैं।

कार्निवाल
किन्नर, इस त्योहार के मौके पर इतने खुश नजर आते हैं कि वह खुशी से झूम उठते हैं। देश में मध्य प्रदेश एक ऐसा राज्य है जहां पर किन्नरों को समाज में अच्छा समझा जाता है।












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