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भोपाल में बैंक मित्रों का प्रदर्शन: बिचौलियों का अंत, कर्मचारी दर्जा की मांग– अंबेडकर पार्क में हजारों की भीड़

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के अंबेडकर पार्क में आज बैंक मित्रों और आउटसोर्स कर्मचारियों का जोरदार प्रदर्शन हुआ। मध्य प्रदेश बैंक मित्र संघ के बैनर तले हजारों की संख्या में बैंक मित्रों ने अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। मुख्य मांग - कर्मचारी का दर्जा, बिचौलियों (कंपनियों) का खात्मा और समान वेतन।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि "सरकार कंपनियों को मोटी रकम देती है, लेकिन हमें मिलती है सिर्फ मजदूरी जैसी तनख्वाह।" बैंकिंग सिस्टम की रीढ़ बताते हुए उन्होंने कहा, "हमारा शोषण कब तक चलेगा?" अगर मांगें न मानी गईं, तो राज्यभर में आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई।

Bank Mitras protest Demanding an end to middlemen and employee status thousands gather at Ambedkar Park

यह प्रदर्शन मध्य प्रदेश के 50 हजार से अधिक बैंक मित्रों की लंबे समय से चली आ रही पीड़ा का प्रतीक है, जो ग्रामीण बैंकिंग को मजबूत करने वाले इन 'असली हीरोज' को ठेकेदारों का गुलाम बनाने वाली सरकारी नीतियों पर सवाल खड़े कर रहा है।

यह आंदोलन हाल ही में आउटसोर्स कर्मचारियों के प्रदर्शन का विस्तार है, जहां स्वास्थ्य, शिक्षा और पंचायत क्षेत्र के बाद अब बैंकिंग सेक्टर के कर्मचारी भी मैदान में हैं। विपक्ष ने इसे "मोहन यादव सरकार की श्रम-विरोधी नीति" बताते हुए समर्थन का ऐलान किया, जबकि सरकार ने "वार्ता का आश्वासन" दिया। लेकिन प्रदर्शनकारियों का आक्रोश ठंडा पड़ने का नाम नहीं ले रहा - क्या बैंक मित्रों को अब भी सिर्फ ठेकेदारों का गुलाम समझा जाएगा?

सुबह से शाम तक का हंगामा

प्रदर्शन सुबह 9 बजे अंबेडकर पार्क में सभा के साथ शुरू हुआ। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, सागर और रतलाम जैसे जिलों से सैकड़ों वाहनों में भरकर बैंक मित्र पहुंचे। बैंक मित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष रामस्वरूप पटेल ने मंच से कहा, "हम ग्रामीण इलाकों में जन-धन खाते खोलते हैं, पेंशन बांटते हैं, लेकिन वेतन 8-10 हजार रुपये मासिक - जो एक दिहाड़ी मजदूर से कम है।" नारे गूंजे - "बिचौलियों का अंत करो!", "कर्मचारी दर्जा दो!"।

दोपहर में मार्च निकाला गया, जिसमें महिलाएं और युवा बैंक मित्र प्रमुख थे। एक बैंक मित्र मीना बाई ने बताया, "हम सुबह 6 बजे से शाम 8 बजे तक गांव-गांव घूमते हैं, लेकिन कंपनियां 50% कटौती कर लेती हैं। सरकार CSC (कॉमन सर्विस सेंटर) को करोड़ों देती है, लेकिन हमारा हिस्सा मजदूरी।" प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन भारी पुलिस बल तैनात था। शाम को पटेल ने चेतावनी दी, "15 दिनों में मांगें न मानीं, तो राज्यव्यापी हड़ताल। बैंकिंग सेवाएं ठप हो जाएंगी।"

Bank Mitras protest Demanding an end to middlemen and employee status thousands gather at Ambedkar Park

बैंक मित्रों की प्रमुख मांगें: शोषण के खिलाफ पुकार

बैंक मित्र मध्य प्रदेश में ग्रामीण बैंकिंग का चेहरा हैं - वे 20,000 से अधिक गांवों में बैंकिंग सेवाएं पहुंचाते हैं। लेकिन ठेकेदार कंपनियों के जाल में फंसे हैं। नीचे उनकी मुख्य मांगें:

क्रमांक,मांग,विवरण

  • 1,कर्मचारी दर्जा,बैंक मित्रों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा; संविलियन और पेंशन।
  • 2,बिचौलियों का खात्मा,कंपनियों/CSC को हटाकर सीधा सरकारी भुगतान; 50% कटौती बंद।
  • 3,समान वेतन व सुविधाएं,"न्यूनतम 25,000 रुपये मासिक वेतन, DA, PF, ग्रेच्युटी; रेगुलर कर्मचारियों जैसा।"
  • 4,एरियर भुगतान,6-12 महीने का अटका वेतन; हाईकोर्ट आदेशों का पालन।
  • 5,नौकरी सुरक्षा,छंटनी रोक; ट्रेनिंग और प्रमोशन।
  • 6,श्रम कानून पालन,"ओवरटाइम, बीमा, मातृत्व अवकाश; केंद्र के PMJDY नियमों का अनुपालन।"

ये मांगें बैंक मित्र संघ और ऑल इंडिया बैंक मित्र एसोसिएशन की हैं। पटेल ने कहा, "हम बैंकिंग की रीढ़ हैं, लेकिन शोषण का शिकार।"

बैंक मित्रों का लंबा संघर्ष

बैंक मित्र योजना 2014 में शुरू हुई, जब RBI और केंद्र सरकार ने ग्रामीण बैंकिंग के लिए स्थानीय एजेंट नियुक्त किए। मध्य प्रदेश में 50,000 से अधिक बैंक मित्र हैं, जो जन-धन, PMJJBY और APY जैसी योजनाओं को अमल देते हैं। लेकिन ठेकेदार कंपनियां (जैसे CSC-SPV) वेतन का बड़ा हिस्सा काट लेती हैं।

हाल की घटनाएं:

  • अगस्त 2025: इंदौर में 500 बैंक मित्रों ने वेतन वृद्धि पर धरना।
  • जून 2025: हाईकोर्ट ने न्यूनतम वेतन 15,000 रुपये का आदेश दिया, लेकिन अमल में देरी।
  • अप्रैल 2025: जबलपुर में एरियर भुगतान के लिए मार्च; 100 करोड़ अटका।
  • फरवरी 2025: ग्वालियर में महिलाओं ने बिचौलियों के खिलाफ प्रदर्शन।
  • 2024: केंद्र ने 12,000 रुपये न्यूनतम वेतन तय किया, लेकिन MP में केवल 8,000 औसत।

संगठन का दावा: "सरकार CSC को 1,000 करोड़ देती है, लेकिन बैंक मित्रों को चूना लगता है।" RBI की 2024 रिपोर्ट में भी ग्रामीण एजेंटों के शोषण का जिक्र है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया: विपक्ष का साथ, सरकार की सफाई

कांग्रेस ने प्रदर्शन का खुला समर्थन किया। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, "बैंक मित्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी हैं। मोहन सरकार का ठेकेदारी मॉडल भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है। हम आंदोलन में शामिल होंगे।" पूर्व CM कमलनाथ ने ट्वीट किया, "शोषण बंद हो। कर्मचारी दर्जा दो।" BJP ने इसे "व्यक्तिगत मांग" बताया। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा, "मांगों पर विचार होगा। जल्द बैठक बुलाएंगे।" लेकिन पटेल ने तंज कसा, "मीटिंग तो हर महीने होती है, एक्शन कहां?"

यह मुद्दा आगामी विधानसभा सत्र में गरमा सकता है, खासकर ग्रामीण वोट बैंक को देखते हुए।

बैंकिंग सेवाएं प्रभावित, सुधार की मांग

मध्य प्रदेश के 80% ग्रामीण बैंकिंग बैंक मित्रों पर निर्भर है। हड़ताल से पेंशन, खाता खुलवाना और लोन वितरण ठप हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना: "समान वेतन से 500 करोड़ का बोझ, लेकिन शोषण रुकेगा।" बैंक मित्रों का सवाल बिल्कुल सटीक है - क्या वे हमेशा ठेकेदारों के गुलाम रहेंगे?

रामस्वरूप पटेल की चेतावनी गंभीर: "हमारा सब्र टूट रहा। राज्यभर आंदोलन से व्यवस्था चरमरा जाएगी।" यह प्रदर्शन मध्य प्रदेश के श्रम आंदोलन को नई ऊंचाई दे सकता है। क्या सरकार सुनेगी, या सड़कें फिर गरमाएंगी? सभी की नजरें भोपाल पर।

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