Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

MP के भिंड में पत्रकारों पर पुलिस बर्बरता, जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं तो लोकतंत्र कैसे बचेगा, जानिए पूरा मामला

MP News Bhind: भिंड की घटना ने मध्य प्रदेश ही नहीं, पूरे देश में प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है। लोकतंत्र के जिस चौथे स्तंभ - पत्रकारिता - को सच्चाई की आवाज़ कहकर सम्मान दिया जाता है, अब उसी आवाज़ को कुचलने का प्रयास सीधे सत्ता के संरक्षण में दिखाई दे रहा है।

दरअसल, मध्य प्रदेश के भिंड जिले में पुलिस अधीक्षक (एसपी) असित यादव और उनके सहयोगियों पर पत्रकारों के साथ मारपीट और उत्पीड़न के गंभीर आरोपों ने राज्य में हड़कंप मचा दिया है। विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस (3 मई 2025) के दिन सामने आई इस घटना ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमले के रूप में सुर्खियां बटोरीं।

MP News Bhind Police brutality on journalists in Bhind Jeetu Patwari targeted Mohan Yadav government

क्या पुलिस अब गुंडों के रूप में काम करेगी?

पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि उन्हें चाय पर आमंत्रित कर पुलिस अधीक्षक के चैंबर में ले जाया गया और वहीं चप्पलों से पिटाई, जातिगत अपमान, धमकियां और वीडियो/ऑडियो सबूतों को मिटाने जैसी अमानवीय हरकतें की गईं। यह किसी जंगलराज का दृश्य नहीं, बल्कि उस राज्य की तस्वीर है, जहां खुद सरकार "गुड गवर्नेंस" का दावा करती है।

यह पूछना अब जरूरी है कि जब संविधान की शपथ लेकर वर्दी पहने अधिकारी सत्ता के आलोचकों को सबक सिखाने पर उतर आएं, तो कानून-व्यवस्था की उम्मीद किससे की जाए?

MP News Bhind: क्या है पूरा मामला?

भिंड जिले में पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि एसपी असित यादव ने उन्हें अपने कार्यालय में चाय के बहाने बुलाया और फिर कई थाना प्रभारियों व पुलिस कर्मियों के साथ मिलकर उनकी चप्पलों से पिटाई की। यह घटना 1 मई 2025 को शुरू हुई, जब कुछ पत्रकारों ने पुलिस की कथित अवैध वसूली, रेत खनन माफियाओं के साथ साठगांठ, और आम नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार की खबरें प्रकाशित की थीं। इन खबरों से नाराज एसपी ने पत्रकारों को सबक सिखाने की ठानी।

पत्रकारों का कहना है कि एसपी के चैंबर में उन्हें गाली-गलौज का सामना करना पड़ा, और फिर फूप, ऊमरी, भारौली, सिटी कोतवाली, देहात कोतवाली, और बरौही थानों के प्रभारियों ने मिलकर उनकी पिटाई की। इसमें दलित पत्रकारों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया, और उनकी जाति पूछकर अपमानित किया गया। एक पत्रकार, धर्मेंद्र ओझा, ने बताया कि रात 12 बजे पुलिस ने उनके घर को घेर लिया, उनका मोबाइल छीनकर सबूत डिलीट कर दिए, और झूठे केस में फंसाने की धमकी दी।

इस घटना का एक वीडियो और ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें पुलिस की बर्बरता साफ दिखाई दे रही है। पत्रकारों ने डर के मारे अपने परिवारों को भिंड से बाहर भेज दिया और भोपाल पहुंचकर डीजीपी कैलाश मकवाना से न्याय की गुहार लगाई।

MP News Bhind: जीतू पटवारी का सरकार पर हमला

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस घटना को लोकतंत्र पर हमला करार देते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने पीड़ित पत्रकारों से वीडियो कॉल पर बात की और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। पटवारी ने लिखा:

खनन माफियाओं को लेकर सवाल पूछने पर पत्रकारों को पुलिस द्वारा थाने में चप्पलों से पीटा जाता है, तो आम जनता की क्या बिसात बचती है? क्या भाजपा शासित मध्यप्रदेश में "नया लोकतंत्र" है? मुख्यमंत्री इस घटना पर कार्रवाई करेंगे या चुप्पी साधकर यह संदेश देंगे कि माफियाओं के संरक्षण में पुलिस की गुंडागर्दी मोहन यादव की सरकार में फल-फूल रही है?

पटवारी ने मुख्यमंत्री को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा, "आप लोकतांत्रिक राज्य के मुख्यमंत्री हैं या एक अघोषित तानाशाही के संचालक हैं? आपका राज विरोध को कुचलने, अभिव्यक्ति को दबाने और संविधान के मूल्यों को रौंदने का परिचायक बनता जा रहा है।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिस खाकी वर्दी को जनता की सुरक्षा के लिए पहनाया गया, वह अब आतंक और दमन का प्रतीक बन गई है।

MP News Bhind Police brutality on journalists in Bhind Jeetu Patwari targeted Mohan Yadav government

पत्रकारों की शिकायत और सबूत

पीड़ित पत्रकारों ने कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव को शिकायती आवेदन देकर अपनी आपबीती बताई। उन्होंने बताया कि एसपी असित यादव ने मारपीट के दौरान कहा, "जहां उंगली करनी है, करो। पुलिस के खिलाफ कुछ भी लिखा या दिखाया तो तुम्हारा हर बार यही हश्र होगा।" पत्रकारों ने कुछ सबूत, जैसे ऑडियो और वीडियो क्लिप, पुलिस से बचाकर रखे, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

एक दलित पत्रकार ने बताया कि उसे उसकी जाति (जाटव) के कारण विशेष रूप से निशाना बनाया गया। पत्रकारों ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने कलेक्टर से शिकायत की, तो एसपी और आक्रोशित हो गए और आधी रात को कई थानों की पुलिस भेजकर उनके घरों पर छापेमारी की।

पूर्व घटनाओं से विवादों में रहे हैं एसपी असित यादव

यह पहली बार नहीं है जब एसपी असित यादव विवादों में घिरे हैं। इससे पहले, जब वे बालाघाट में एसपी थे, तब उन पर आरएसएस जिला प्रचारक सुरेश यादव के साथ मारपीट का आरोप लगा था। उस घटना के बाद उन्हें बालाघाट से हटा दिया गया था। अब भिंड में पत्रकारों के साथ मारपीट का मामला सामने आने से उनकी कार्यशैली फिर से सवालों के घेरे में है।

विपक्ष और सामाजिक संगठनों का गुस्सा

इस घटना ने न केवल पत्रकारों, बल्कि विपक्षी नेताओं और सामाजिक संगठनों में भी आक्रोश पैदा किया है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला करार देते हुए कहा, "पत्रकारों को सिर्फ इसलिए पीटा गया क्योंकि उन्होंने पुलिस की अवैध वसूली और माफियाओं के साथ साठगांठ की खबरें दिखाईं। यदि रक्षक ही भक्षक बन जाएंगे, तो जनता की रक्षा कौन करेगा?"

कांग्रेस की युवा इकाई (आईवाईसी) और अन्य नेताओं ने भी सोशल मीडिया पर इस घटना की निंदा की। आईवाईसी ने लिखा, "यह सिर्फ हमला नहीं, बल्कि सच्चाई की आवाज को कुचलने की साजिश है।" कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने इसे प्रेस स्वतंत्रता पर हमला करार देते हुए कहा, "सच्चाई दिखाना आज कितना मुश्किल हो गया है।"

रेत खनन माफिया और पुलिस की भूमिका

पत्रकारों का आरोप है कि भिंड में रेत खनन माफियाओं का बोलबाला है, और पुलिस उनकी सहायता कर रही है। कई पत्रकारों ने हाल ही में रेत के अवैध खनन, ट्रकों से वसूली, और थानों में हो रही मनमानी की खबरें प्रकाशित की थीं। इन खबरों ने पुलिस प्रशासन को असहज कर दिया, जिसके बाद यह मारपीट की घटना सामने आई।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, भिंड में चंबल नदी के किनारे अवैध रेत खनन बड़े पैमाने पर चल रहा है, और इसमें कुछ स्थानीय नेताओं और अधिकारियों की भी मिलीभगत है। पत्रकारों की खबरों ने इस नेटवर्क को उजागर करने की कोशिश की, जिसके चलते उन्हें निशाना बनाया गया।

सरकार और प्रशासन की चुप्पी

मुख्यमंत्री मोहन यादव और गृह विभाग ने अभी तक इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। जीतू पटवारी ने इस चुप्पी को माफियाओं के संरक्षण का सबूत बताते हुए कहा, "मुख्यमंत्री की खामोशी यह संदेश दे रही है कि उनकी सरकार में पुलिस की गुंडागर्दी को बढ़ावा दिया जा रहा है।"

  • पत्रकारों ने डीजीपी कैलाश मकवाना से मुलाकात कर न्याय की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि:
  • इस मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच हो।
  • एसपी असित यादव और अन्य दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए।
  • पत्रकारों और उनके परिवारों को सुरक्षा प्रदान की जाए।

झूठे मुकदमों की धमकियां

1 मई 2025 को भिंड में जो कुछ हुआ, वह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि उस मानसिकता की अभिव्यक्ति है जिसमें सत्ता की आलोचना को अपराध समझा जाता है, और कलम पकड़ने वालों के हाथों में हथकड़ी डालने की तैयारी की जाती है। पत्रकारों के साथ हुई मारपीट, जातिगत अपमान, तकनीकी सबूतों की जब्ती और झूठे मुकदमों की धमकियां - यह सब संकेत करता है कि अब न केवल खबरों को दबाया जा रहा है, बल्कि सच्चाई दिखाने की कोशिश करने वालों को मिटाया जा रहा है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+