Karnataka Elections 2023: कौन हैं वोक्कालिगा? क्यों कर्नाटक की सियासत के लिए हैं अहम?
Karnataka Assembly election 2023: कर्नाटक विधानसभा चुनाव मई महीने के अंत में हो सकते हैं, राज्य में विधानसभा की 224 सीटे हैं।

Who are Vokkaligas: कर्नाटक विधानसभा चुनाव के ठीक पहले बीजेपी सरकार ने राज्य में 4 प्रतिशत मुस्लिम आरक्षण को कम करके उसे लिंगायत और वोक्कालिगा समुदाय में बांटकर बड़ा दांव खेला है। अब राज्य में वोक्कालिगा का आरक्षण 4 फीसदी से बढ़कर 6 फीसदी और लिंगायत समुदाय का आरक्षण 5 फीसदी से बढ़कर 7 फीसदी कर दिया गया है।
कर्नाटक की सियासत में खासी पहुंच
अब उसके इस फैसले का कर्नाटक के चुनावों पर क्या असर पड़ता है, ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा लेकिन इसमें कोई शक नहीं ये दांव चलकर उसने ये जता दिया है कि ये दोनों समुदाय कर्नाटक की सियासत में खासी पहुंच रखते हैं और राज्य में सरकार बनाने में इनका अहम रोल होता है।
किंगमेकर की भूमिका में वोक्कालिगा
लिंगायत सुमदाय के महत्व के बारे में हमने आपको अपने पिछले आर्टिकल में बताया था, अगर आपने उसे पढ़ा नहीं तो आर्टिकल के नीचे के लिंक पर क्लिक करके लिंगायत समुदाय के बारे में पढ़ा जा सकता है। आज हम आपको राज्य के दूसरे अहम समुदाय वोक्कालिगा के बारे में विस्तार से बताते हैं, जो कि राज्य में एक अहम स्थान रखते हैं।
मैसूर और साउथ कर्नाटक में आबादी ज्यादा
वोक्कालिगा समुदाय के लोग आदि शिव को ही अपना आराध्य मानते हैं। इनकी संख्या पूर्वी मैसूर और साउथ कर्नाटक में बहुत ज्यादा है, जबकि इस समुदाय के लोग पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में भी मिलते हैं।
कृषि और सामाजिक समूहों से जुड़ा वर्ग
आदिकाल से ये संप्रदाय कृषि और सामाजिक समूहों से जुड़ा हुआ है और इसी वजह से इस समुदाय के लोग आपको किसान और सोशल वर्कर ज्यादा मिलेंगे। मैसूर की पूर्व रियासत में वोक्कालिगा सबसे बड़ा समुदाय था और ये अपने परंपराओं और रिवाजों के प्रति काफी संवेदनशील भी माने जाते हैं। इतिहास में इनका वर्णन प्राचीन मैसूर में योद्धाओं और कृषकों के रूप में मिलता है।
राष्ट्रकूट और पश्चिमी गंग
कुछ इतिहासकार मानते हैं कि राष्ट्रकूट और पश्चिमी गंग के लोग वोक्कालिगा मूल के थे। कुछ जगहों पर तो ये भी प्रमाण मिलते हैं कि इस समुदाय के लोग विजयनगर साम्राज्य में कई प्रशासनिक पदों पर रहे हैं। कर्नाटक की राजनीति में इनका काफी प्रभुत्व रहा है इसलिए सरकार की पूरी कोशिश इस समुदाय के लोगों को खुश करने की होती है।
पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा वोक्कालिग्गा समुदाय से
कर्नाटक में वोक्कालिगा की आबादी 12 फीसदी है और इस समुदाय का सबसे बड़ा मठ चुनचनगिरी है, वैसे पूरे राज्य में इस समुदाय के करीब 150 मठ हैं जो कि शिक्षा भी देते हैं। मठों का प्रभाव साउथ कर्नाटक में बहुत ज्यादा है और इन्हें जनता दल (एस) का सपोर्टर भी माना जाता है, आपको बता दें कि भारत के पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा वोक्कालिग्गा समुदाय से ही आते हैं।
डीके शिवकुमार भी इसी समुदाय से
तो वहीं कर्नाटक में कांग्रेस का सबसे लोकप्रिय चेहरा और कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष डी के शिवकुमार भी इसी समुदाय से हैं। वोक्कालिगा समुदाय कर्नाटक में किंगमेकर का रोल प्ले करती है, देखते हैं इस बार ये समुदाय किसे सत्ता तक पहुंचाता है।












Click it and Unblock the Notifications