कार पर लिखा "भारत सरकार", घूम-घूम कर लगाया 2.3 करोड़ का चूना
बेंगलुरु। विभिन्न शिक्षण संस्थानों को मान्यता दिलाने के नाम पर करीब 2.3 करोड़ रुपए की ठगी करने वाले फर्जी विश्वविद्यालय के फर्जी वाइस चांसलर को बेंगलुरु में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने यह गिरफ्तारी चार दिन पहले की थी, जिसका खुलासा रविवार को किया। साथ ही इस रैकेट के अन्य सदस्यों की धरपकड़ के लिये एक स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया गया है।
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पुलिस के अनुसार बन्नरगट्टा रोड पर रहने वाले इस फर्जी वीसी का नाम संतोष लोहार है, जो मूल रूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला है। अपने कई साथियों के साथ मिलकर इन लोगों ने एक विश्वविद्यालय खोला, जो वास्तविक रूप से था ही नहीं। केवल वेबसाइट पर यह विश्वविद्यालय चल रहा था। संतोष जहां भी जाता था, अपनी मारूती एसएक्स4 में जाता था। कार पर भारत सरकार लिखवा रखा था, ताकि संस्थान के लोग उसे सही में एक अधिकारी समझें।
इस रैकेट के एक और आरोपी श्यामल दत्ता को मई में गिरफ्तार किया गया था। उसी से गहन पूछताछ के बाद संतोष का नाम सामने आया और पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। संतोष और उसके साथियों ने कर्नाटक, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के करी 44 संस्थानों के साथ फर्जीवाड़ा किया था। इस दौरान इन लोगों ने करीब ढाई करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की।
बैंगलोर साउथ के डीसीपी एस डी शरणप्पा ने बताया कि गिरफ्तारी के दौरान संतोष के घर से करीब 8 लाख नकद बरामद हुए। इस रैकेट के बारे में पश्चिम बंगाल पुलिस ने करीब दो महीने पहले अलर्ट जारी किया था। तभी से पुलिस ने अपना जाल बिछाना शुरू कर दिया था।
हुड़की देता था संतोष
संतोष अपनी कार पर भारत सरकार लिखवाने के बाद जहां भी जाता, वहां कहता मैं वाइस चांसलर हूं और मेरे संकर्प सीधे केंद्र सरकार से जुड़े हैं। तब तो हद ही हो गई, जब पिछले सप्ताह आरटीओ ने उसकी गाड़ी पकड़ी। आरटीओ को भी उसने उड़की दी और कहा कि मैं केंद्र सरकार का अधिकारी हूं और मेरी पहुंच दिल्ली तक है।
अप्रैल में छपा था विज्ञापन
अप्रैल में कुछ अखबारों में एक व्यक्ति ने यह विज्ञापन छपवाया था कि जिस विश्वविद्यालय का संचालन संतोष कर रहा है, वो फर्जी है। जब संस्थानों के अधिकारियों ने इस पर संतोष ने बात की, तो उसने उस विज्ञापन को झूठा करार दे दिया। लेकिन धोखाधड़ी में फंस चुके कुछ संस्थानों ने मिल कर संतोष व उसके साथियों के खिलाफ जेपीनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज करायी।












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