मध्य प्रदेश में बदला जा रहा है कांग्रेस का चेहरा

हाल ही में हुए राज्य विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को पराजय सामना करना पड़ा है। यह उसकी लगातार तीसरी हार है। इस चुनाव के नतीजे कांग्रेस के लिए पिछले विधानसभा चुनाव से भी बुरे रहे हैं। पिछले चुनाव में जहां कांग्रेस 230 में से 71 स्थानों पर जीती थी तो वर्ष 2013 के चुनाव में पार्टी 58 के आंकड़े पर आकर सिमट गई है।
विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी हार के बाद पार्टी आलाकमान से लेकर स्थानीय नेताओं की समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर वे क्या करें, कि राज्य में कांग्रेस की जड़ें एक बार फिर मजबूत हो जाए।
कांग्रेस परिवर्तन के दौर से गुजर रही है
दूसरी ओर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी लगातार एक संदेश देते रहे हैं कि वे कांग्रेस को बदलना चाहते हैं। उनके इस संदेश का असर मध्य प्रदेश में दिखने लगा है। पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव को बनाया गया है तो नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे, उप नेता बाला बच्चन और विधानसभा में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी डॉ. राजेंद्र सिंह को सौंपी गई है।
संगठन और विधानसभा में नए लोगों को जिम्मेदारी सौंपकर पार्टी ने कार्यकताओं को यह बता दिया है कि आगे आने वाले समय में बदलाव का दौर चलता रहेगा। एक तरफ जहां चार प्रमुख पद पर नए लोग लाए गए हैं तो महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष शोभा ओझा ने भी राज्य की प्रदेशाध्यक्ष अर्चना जायसवाल को हटाने का संकेत देते हुए कहा है कि फरवरी तक नए अध्यक्ष की नियुक्ति हो जाएगी।
वरिष्ठ पत्रकार शिव अनुराग पटैरिया का कहना है कि कांग्रेस परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। राज्य में पार्टी से बड़े गुट हो गए हैं, गुटों के बढ़ते प्रभाव के चलते कांगेस की स्थिति कहावत 'नाक से भारी नथनी' जैसी हो गई है। पार्टी को बनाए रखना है तो आने वाले दिनों में यह बदलाव और भी नजर आएगा।
आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर राज्य में चली बदलाव की बयार कांगेस को कितना लाभ देगी यह कहना अभी आसान नहीं है, मगर कार्यकर्ता इतना तो जान ही गए हैं कि जो पार्टी के लिए काम नहीं करेगा उसे पार्टी में महत्व भी नहीं मिलेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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