सात समंदर पार से अपने प्रेमी से मिलने आई अमेरिकन युवती, भारत को ही बना लिया अपना घर
अमृतसर। कहते हैं कि 'इश्क', 'प्यार', 'मोहब्बत' में कुछ भी नहीं दिखता। ऐसा करने वाले लड़का-लड़की किसी भी हद तक चले जाते हैं। कुछ ऐसा ही मामला पंजाब के अमृतसर से सामने आया है। यहां के एक युवक की अमेरिकन युवती से दोस्ती हो गई। वह युवती उस युवक के लिए हजारों किमी दूर से अमृतसर आ पहुंची। यहां दोनों में तय हुआ कि शादी करेंगे। उसके बाद उस युवती ने भारत को ही अपना घर बनाने की ठानी। लोगों के लिए यह 'सात समंदर पार से प्यार' होने वाली कहानियों जैसा है।

..तो पवन की जिंदगी की बदल गई
वह युवक अमृतसर के मजीठा रोड़ के तुगलकाबाद इलाके में रहने वाले स्कूटर मैकेनिक पवन कुमार है। जबकि, अमेरिकी युवती एमिनी वॉलिन की। दोनों में फेसबुक के जरिये जान-पहचान हुई थी, जो बाद में प्रेम में तब्दील हो गई। दोनों ने अपने प्रेम को जन्म-जन्म के बन्धन में बांधने का फैसला ले लिया। पवन ने बताया कि पहले एमिली ने उसे अमेिरका आने को कहा तो उसके पास जाने के लिये न तो पासपोर्ट था, न ही किराया। उसने मायूस होकर एमिली को ही कहा कि वह ही भारत आ जाये। फिर क्या था, एमिनी आ गई। तो पवन की जिंदगी की बदल गई।

एमिली से इशारों से ही बात कर रहे सास-ससुर
उस युवती ने पवन को अपने दिल की बात बता दी कि वह उससे शादी कर यहां ही रहेगी। उसके बाद दो दिन हिन्दू रीति रिवाज के साथ विवाह कर लिया। इस अवसर पर पास-पड़ोस के लोग भी शामिल हुये। मजीठा रोड स्थित तुंगबाला क्षेत्र में रहने वाले पवन कुमार के घर एमिनी दुल्हन के लिबास में पहुंची तो लोग दंग रह गए। मांग में सिंदूर, कलाइयों में चूड़ा व गुलाबी रंग का सूट पहने एमिली पूरी पंजाबी मुटियार लग रही थी। मगर, उसे पंजाबी भाषा का तनिक भी ज्ञान नहीं था। पवन व उसके माता-पिता एमिली से इशारों से ही बात कर रहे हैं।

15 अगस्त को एमिनी अमृतसर आई
पवन ने बताया कि एमिनी ने मुझे अमेरिका आने को कहा था, लेकिन मेेरे पास न तो पैसे थे और न ही पासपोर्ट एवं वीजा। मैंने उसे अपनी मजबूरी बता दी थी। इसके बाद 15 अगस्त को एमिनी अमृतसर आ गई। पवन के अनुसार मैंने अपने अभिभावकों का बता दिया था कि अमेरिका से मेरी एक दोस्त आ रही है और मैं उससे शादी करना चाहता हूं। अभिभावकों ने मुझे सहर्ष इसकी स्वीकृति दे दी थी।

पवन के मां-बाप तो नाम भी बताना नहीं चाहते
पवन की मां शकुंलता व पिता शेर चांद का कहना है कि उन्हें अंग्रेजी नहीं आती, इसलिए एमिनी से बात नहीं कर पा रहे। बच्चों की मर्जी इक दूजे के साथ रहने की है, इसलिए उनकी खुशी में हमारी खुशी है। धीरे-धीरे हम एमिनी की भाषा समझ लेंगे। उसे पंजाबी सिखा देंगे। हालांकि परिवार ने एमिनी के विषय में ज्यादा जानकारी देने से इंकार किया। वह तो अपनी बहू का नाम भी नहीं बताना चाहते थे।












Click it and Unblock the Notifications