Jaisalmer Water: राजस्थान में ये क्या हो रहा? जैसलमेर के बाद अब अलवर में नलकूप से निकला पानी का फव्वारा
Jaisalmer water: राजस्थान की धरती से अचानक पानी का फव्वारा फूटने की आश्चर्यजनक लगातार हो रही हैं। जैसलमेर के मोहनगढ़ जैसी घटना अब अलवर के बहरोड़ में हुई है। अलवर के एक बोरवेल से अप्रत्याशित रूप से पानी की धारा निकल आई। यह घटना जैसलमेर में 28 दिसंबर 2024 को नलकूप खुदाई के दौरान निकले पानी जैसी है।
जानकारी के अनुसार बहरोड़ के बिघाना गांव में पहले से खुद एक बोरवेल से अचानक बहुत तेज़ गति से पानी निकलने लगा। इस अप्रत्याशित घटना ने कई लोगों को हैरान कर दिया। जैसलमेर पानी की घटना की तरह अलवर के बहरोड़ की पानी वाले मंजर को भी लोगों ने मोबाइल कैमरे कैद कर लिया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
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जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ में नलकूप विक्रम सिंह भाटी के खेत में खोदा जा रहा था। 850 फीट की खुदाई की जा चुकी थी। पाइप वापस निकालते समय पानी की तेज जलधारा फूट निकली। वहीं, अलवर के बहरोड़ में नलकूप राजकुमार के खेत में बना हुआ था। अब बोरवेल के चारों ओर बहुत सारा पानी जमा हो गया।
Rajastha Water: राजस्थान में जल की कमी और अचानक प्रचुरता
बता दें कि जैसलमेर की तरह अलवर के बहरोड़ में राजकुमार के खेत के आस-पास का इलाका आम तौर पर पानी की कमी से जूझता है। यहां भूजल स्तर लगभग 1000 फीट नीचे है, जिससे निवासियों के लिए पीने के पानी तक पहुँच पाना मुश्किल हो जाता है। इस कमी के बीच, बंद पड़े नलकूप से अचानक पानी का फव्वारा निकलना ग्रामीणों के लिए चौंकाने वाला रहा।
अलवर में राजकुमार के खेत में नलकूप से पानी निकलने की घटना की खबर फैलते ही आस-पास के इलाकों से लोग यह नजारा देखने के लिए इकट्ठा हो गए। राजकुमार ने तुरंत स्थानीय अधिकारियों को इस स्थिति के बारे में सूचित किया। ग्रामीणों ने अनुमान लगाया कि दूसरे खेत में चल रही बोरिंग गतिविधियों के कारण भूमिगत दबाव रिसाव हो सकता है, जिसके कारण यह अप्रत्याशित फव्वारा बन गया।
Alwar Water: अलवर बहरोड़ नलकूप पानी वाली घटना की तुलना जैसलमेर से
बहरोड़ में हुई यह घटना जैसलमेर में हुई इसी तरह की घटना से मिलती-जुलती है। वहां बोरवेल खोदने के दौरान पानी इतनी जोर से फूटा कि नलकूप खुदाई में लगा ट्रक और 22 टन की बोरिंग मशीन नलकूप में ही समा गई। जैलसमेर वाले पानी को टेथिस सागर से जोड़ा जा रहा है जबकि बहरोड़ वाले नलकूप के पानी को किसी प्राचीन नदी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि वास्तविकता भूजल वैज्ञानिकों की जांच में सामने आएगी।
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