Aligarh: पूजा भी करता है और नमाज भी अदा करता है, इसलिए समुदाय के लोगों ने तोड़े सारे सम्बन्ध

उत्तर प्रदेश के अलीगढ से एक मामला सामने आया है जिसमे एक अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्ति के खिलाफ हिन्दू रीती रिवाजों से पूजा अर्चना करने की वजह से फतवा जारी कर दिया गया है।

Aligarh Worships offers Namaz community issued fatwa muslim man converted hindu

भारत ही मात्र एक ऐसा देश है , जहां विभिन्न विभिन्न जातियों के लोग रहते हैं एवं अपने अपने धर्म के अनुसार स्वतंत्र जीवन यापन करते हैं। आजादी के बाद से अल्पसंख्यक समुदाय एवं हिंदू धर्म के बीच जो दूरियां बड़ी है, उन दूरियों को कम करने के लिए भारत की संस्कृति एवं मान्यताओं को आदर्श मानकर लोग एक दूसरे के धर्म को अपना रहे हैं। वही एक ताजा मामले में उत्तर प्रदेश के अलीगढ से एक मामला सामने आया है जिसमे एक अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्ति के खिलाफ पूजा अर्चना करने की वजह से फतवा जारी कर दिया गया है।

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नमाज भी अदा करता है और पूजा भी करता है
दरअसल मामला अलीगढ़ के छर्रा नगर पंचायत का है । यहां के रहने वाले एक अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्ति ने हिंदू धर्म का दामन थामा है। छर्रा मोहल्ला सुनारान के रहने वाले सादिक अली ने बताया कि मैं पिछले सात आठ साल से पूजा अर्चना कर रहा हूं, मगर मै नमाज भी अदा करता हूं। इसलिए मेरे सभी सम्बन्धियों और मेरे समुदाय के लोगों ने मुझसे हर प्रकार का रिश्ता तोड़ दिया है। मुझसे कोई व्यक्ति संबंध नहीं रखता और ना ही कोई मेरे यहां आता है और न ही मुझे कोई बुलाता है। इसलिए मैंने योगी जी एवं मोदी जी को आदर्श मानते हुए हिंदू धर्म का दामन थामा है। मैं अपने घर पर रहकर नमाज भी अदा करता हूं और पूजा पाठ भी करता हूं। भारत ही एक ऐसा देश है जिसने लोगों को आजादी से जीने का अधिकार दे रखा है। मैं उसी नीति के चलते स्वतंत्र रूप से नमाज अदा करता हूँ और पूजा पाठ भी करता हूं।

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आखिर क्यों होता है विरोध
वैसे अगर इस मामले के दुसरे पहलु पर गौर किया जाए तो आप पाएंगे कि भारत में हिंदू और मुसलमान दोनों समाज के लोग हज़ारों साल से साथ में रहते चले आए हैं, लेकिन दोनों ही समुदाय के लोग अभी तक एक दूसरे को न तो समझ सके हैं और न ही समझना चाहते हैं। भारत में हिंदू मुस्लिम एकता के खूब नारे भी लगते हैं और खूब कोशिशें भी होती हैं। लेकिन नतीजा वही जस का तस रहता है। आप जो माहौल आज देख रहे हैं वह कोई नया माहौल बनकर तैयार नहीं हुआ है बल्कि भारत में हिंदू और मुस्लिम दोनों समाजों के बीच खाई बहुत पहले से है। हिंदू मुस्लिम की एकता का नारा भी कोई आज का नारा नहीं है बल्कि ये तो मुगलों से भी पहले का नारा है।
ऐसे में अगर कोई व्यक्ति इस हिन्दू मुस्लिम एकता के नारे को चरिर्तार्थ करने का काम करता है तो उसकी सरहाना की जानी चाहिए न की उसके खिलाफ फतवा जारी कर समाज से अलग थलग कर फेंक देना चाहिए। यह भारत के लोकतंत्र और विविधता के लिए बेहद ही खतरनाक साबित हो सकता।

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