भारत के इतिहास में सबसे बड़ी सजा: अहमदाबाद ब्लास्ट के 13 साल बाद इंसाफ, आजतक क्या-कैसे हुआ जानिए
Timeline Of 2008 Ahmedabad Serial Blast Case Verdict in Hindi | ahmedabad blast case verdict | Ahmedabad Serial Blasts: What Happened On July 26, 2008? A Timeline Of Events On The Day Of Attacks (what happened since 2008
अहमदाबाद। गुजरात के सबसे बड़े शहर अहमदाबाद में वर्ष 2008 सीरियल बम ब्लास्ट के गुनहगारों को सजा सुनाई जा चुकी है। अदालत ने 38 दोषियों को मौत की सजा और 11 को उम्रकैद दी। यह फैसला ऐतिहासिक है, क्योंकि देश के इतिहास में पहली बार एकसाथ 38 लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई है। इससे पहले केवल राजीव गांधी हत्याकांड ही था, जिसमें एकसाथ 26 लोगों को सजा सुनाई गई थी। आइए, डालते हैं नजर- अहमदाबाद बम धमाकों के बाद से कैसा रहा 13 साल लंबा सफर.. दोषियों को सजा का फैसला आने तक की टाइमलाइन...

26 जुलाई 2008 था वो काला दिन
अहमदाबाद के इतिहास में 2008 की 26 जुलाई, वो दिन थी जब 70 मिनट के दौरान 21 बम धमाकों ने गुजरात के सबसे बड़े शहर की रूह को हिलाकर रख दिया। 20 जगहों पर हुए इन धमाकों में 56 लोगों की जान गई, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हुए। उस वक्त मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे।

27 जुलाई को भी बम धमाके की कोशिश
अहमदाबाद में ब्लास्ट करने के बाद आतंकी जहां-तहां छुप गए। यहां हुए धमाकों के दूसरे दिन, यानी 27 जुलाई को आतंकियों ने सूरत में भी सीरियल ब्लास्ट की कोशिश की, लेकिन टाइमर में गड़बड़ी की वजह से बम फट नहीं पाए थे। वहीं, पुलिस ने 28 जुलाई और 31 जुलाई 2008 के बीच शहर के अलग-अलग इलाकों से 29 बम बरामद किए थे, जिनमें से 17 वराछा इलाके के और अन्य कतारगाम, महिधरपुरा और उमरा इलाके के थे। शुरूआती जांच में पता चला कि, गलत सर्किट और डेटोनेटर की वजह से इन बमों में विस्फोट नहीं हो पाया।
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अहमदाबाद और सूरत दोनों शहरों में FIR
सीरियल ब्लास्ट के बाद पुलिस ने अहमदाबाद में 20 एफआईआर दर्ज की थीं। जबकि 15 अन्य एफआईआर सूरत में दर्ज की गईं, जहां भी विभिन्न स्थानों से जिंदा बम बरामद किए गए थे। पुलिस ने कहा कि, आतंकी दूसरे शहरों में भाग गए।
19 दिन में पकड़े गए 30 आतंकी
अहमदाबाद और सूरत की घटना के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की जांच-पड़ताल कई साल चली और करीब 80 आरोपियों पर मुकदमा चला। जुलाई 2008 में धमाकों की जब पुलिस ने जांच शुरू की थी तो कुछ आतंकी पाकिस्तान चले गए थे। स्पेशल टीम ने महज 19 दिनों में 30 आतंकियों को दबोचा। उन्हें पकड़कर जेल भेज दिया गया।

अन्य शहरों में शुरू हुई धर-पकड़
30 की गिरफ्तारी के बाद बाकी आतंकी देश के अलग-अलग शहरों से पकड़े जाते रहे। पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों ने कोर्ट में बताया कि, अहमदाबाद में हुए धमाकों में इंडियन मुजाहिदीन का हाथ था। अहमदाबाद से पहले इंडियन मुजाहिदीन की इसी टीम ने जयपुर और वाराणसी में भी धमाकों को अंजाम दिया था। खूफिया इनपुट के बाद देश के कई राज्यों की पुलिस उन्हें पकड़ने में लग गईं, लेकिन वे एक के बाद एक ब्लास्ट करते चले गए।

मोदी ने गठित कराई थी स्पेशल टीम
देश के अलग-अलग शहरों में हो रहे हमलों के बीच गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पेशल टीम गठित कराई। उनके आदेश पर JCP क्राइम के नेतृत्व में अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की एक विशेष टीम का गठन किया गया। DGP आशीष भाटिया ने इस टीम को लीड किया। इस टीम में अभय चुडास्मा (DCP क्राइम) और हिमांशु शुक्ला (ASP हिम्मतनगर) शामिल थे। इसके अलावा मामलों की जांच तत्कालीन DSP राजेंद्र असारी, मयूर चावड़ा, उषा राडा और वीआर टोलिया को सौंपी गई।

15 अगस्त को गिरफ्तारी का पहला सेट बना
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की स्पेशल टीम ने 19 दिनों में मामले का पर्दाफाश किया और 15 अगस्त 2008 को गिरफ्तारी का पहला सेट बनाया था। DGP आशीष भाटिया के नेतृत्व में बनाई गई स्पेशल टीम में अभय चुडास्मा (DCP क्राइम) और हिमांशु शुक्ला (ASP हिम्मतनगर) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सभी 35 FIR को एक साथ जोड़ा गया
अदालत की ओर से सभी 35 FIR को एक साथ जोड़ने का आदेश दिया गया। पुलिस ने जांच में पाया कि, IM के आतंकियों ने 2002 में गोधरा कांड के बाद हुए दंगों से जल-भुनकर अहमदाबाद में यह बम विस्फोट किए। इस मामले के एक अन्य आरोपी यासिन भटकल पर पुलिस ने नए सिरे से केस चलाने की तैयारी की।

दिसंबर 2009 में 78 पर मुकदमे की शुरुआत
पुलिस के मुताबिक, देश के अलग-अलग शहरों से कुल 78 लोगों को अरेस्ट किया गया। अदालत की ओर से सभी 35 FIR को एक साथ जोड़ देने के बाद ब्लास्ट मामले में दिसंबर 2009 में इन 78 आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की शुरुआत हुई। इनमें से एक आरोपी बाद में सरकारी गवाह बना। मामले में बाद में 4 और आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया, लेकिन उनका मुकदमा शुरू नहीं हो पाया।

1100 गवाहों का परीक्षण किया गया
इस मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने 1100 गवाहों का परीक्षण किया। सरकारी वकीलों में एचएम ध्रुव, सुधीर ब्रह्मभट्ट, अमित पटेल और मितेश अमीन, जबकि बचाव पक्ष से एमएम शेख और खालिद शेख आदि शामिल रहे।
51 लाख पेज की चार्जशीट थी
पुलिस की ओर से बताया गया कि, पूरे मामले पर कुल 51 लाख पेज की चार्जशीट बनी। जिसमें 1163 गवाहों की गवाही को वैध रखा गया। 2009 से इसकी सुनवाई रोजाना हुई।

सितंबर 2020 में मुकदमे की कार्यवाही खत्म हुई
अदालत ने 77 अभियुक्तों के खिलाफ पिछले साल सितंबर में मुकदमे की कार्यवाही खत्म की। जहां सरकारी वकील ने बताया कि, इस मामले की सुनवाई बिना रुके चली। जो लॉकडाउन में भी नहीं रुकी। फिर इस साल 2022 में 8 फरवरी को अहमदाबाद की सिटी सिविल कोर्ट ने इस मामले में अहम फैसला सुनाया। 78 में से 49 आरोपियों को UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत दोषी करार दिया। वहीं, 29 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी किया।

पीड़ितों के लिए आर्थिक मदद का ऐलान
अदालत ने बम धमाकों में मारे गए लोगों के परिजनों को 1 लाख, गंभीर घायलों को 50 हजार और मामूली घायलों को 25 हजार रुपए की सहायता देने का आदेश दिया। उसके बाद, 16 फरवरी 2022, सोमवार के दिन अदालत में अभियोजन पक्ष ने दलीलें खत्म कीं और अभियुक्तों को अधिकतम सजा देने का अनुरोध किया।

1 दोषी जांच में मदद करने के लिए बरी किया गया
सभी आरोपितों में से एक 'अयाज सैयद' को जांच में मदद करने के लिए बरी कर दिया गया। उसके अलावा 29 आरोपी 8 फरवरी 2022 को सबूतों के अभाव में बरी किए गए।
पुलिस ने बताया कि, जो आरोपी अहमदाबाद की कोर्ट से बरी हुए हैं, उनमें से ज्यादातर जेल से बाहर नहीं निकल पाएंगे, क्योंकि उन पर अन्य राज्यों में भी केस चल रहे हैं।
आरोपी 7 राज्यों की जेलों में हैं बंद
जिन आरोपियों को पकड़ा गया, वे मुंबई, दिल्ली, बेंगुलुरू, जयपुर और केरल समेत 7 राज्यों की जेलों में कैद हैं।

8 अन्य आरोपियों की तलाश जारी
बताया गया कि, ब्लास्ट में शामिल 8 अन्य आरोपियों की तलाश अभी भी जारी है। वहीं, सीरियल बलास्ट का मास्टर माइंड यासीन भटकल दिल्ली की जेल में, जबकि अब्दुल सुभान उर्फ तौकीर कोचीन की जेल में बंद है।

आज आया ऐतिहासिक फैसला
अंतत: आज शुक्रवार के दिन, सुबह 11.30 बजे.. वो वक्त था जब अदालत ने 13 साल तक आतंक से मिले जख्मों का दर्द सहने वाले अहमदाबाद को इंसाफ दिया। अदालत ने धमाकों के 49 गुनहगारों को सजा सुनाई। 38 के लिए सजा-ए-मौत मुकर्रर की गई। जबकि, 11 दोषी ताउम्र कैद में रहेंगे। पढ़िए: कहां-कहां के रहने वाले हैं आतंकी?
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