कोविड फंड में 2.5 लाख रु. दान करने वाले की मां को हॉस्पिटल में नहीं मिला बेड, पूछा- अब और कितना दूं?
अहमदाबाद। सरकार महामारी से निपटने के लिए "पर्याप्त" व्यवस्थाओं का दावा कर रही है, लेकिन हकीकत में कोरोना से जूझ रहे लोगों को कई स्थानों पर अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन और दवाएं नहीं मिल पा रहीं। गुजरात में अहमदाबाद के विजय पारेख नामक शख्स ने सरकारी (कोरोना मरीजों की मदद को शुरू किए गए) "पीएम केयर फंड" में 2 लाख 51 हजार रुपए डोनेट किए थे। जब कोरोना की दूसरी लहर में उनकी मां बीमार हुई तो वो इलाज के लिए दर-दर भटकती रही, लेकिन उन्हें अस्पतालों में कहीं बेड नहीं मिला।
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इस वजह से विजय पारेख खफा हो गए। विजय पारेख ने अपने ट्विटर अकाउंट पर आक्रोश व्यक्त किया है। ट्वीट में उन्होंने अपनी 10 जुलाई 2020 को जमा की गई रकम की रसीद शेयर की, और लिखा कि, "मैंने पीएम केयर फंड में 2.51 लाख रुपए की रकम जमा की। लेकिन मौत के द्वार पर खड़ी मेरी मां को बेड उपलब्ध नहीं हुआ। अब मुझे बताएं कि कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए मैं कहां मदद करूं, जिससे कि मुझे बेड मिल सके। और मुझे किसी अपने को न खोना पड़े।"

विजय पारेख का यह ट्वीट लोगों की नजर में आया तो उस पर तेजी से प्रतिक्रियाएं आने लगीं। अब तक उनके ट्वीट को 36 हजार से ज्यादा लोग लाइक चुके हैं, जबकि 14 हजार बार रीट्वीट भी किया गया है। 1 हजार से ज्यादा लोगों ने विजय के सपोर्ट में कमेंट किए हैं। कई लोगों कुछ इसी तरह अपनी भावनाएं व्यक्त कीं..
क्रितांश अग्रवाल नाम के एक यूजर ने लिखा- "मैंने भी डोनेशन दिया था। काश! कोई रिफंड पॉलिसी होती तो मैं अपने पैसे वापस ले लेता।"
सूर्या नाम के एक शख्स ने विजय पारेख को सलाह देते हुए लिखा कि "दान देने के ऐसे पुण्य वाले काम का ढिंढोरा उन्हें सोशल मीडिया पर नहीं पीटना चाहिए। ये सब लिखने के बजाए, उन्हें अपने इलाके में बेहतर मेडिकल सुविधाओं के लिए कुछ करना चाहिए।"
मोहित आनंद नाम के शख्स ने लिखा, "आपको हुई क्षति के लिए सॉरी! बस अब यह सुनिश्चित करें कि आप और आपके जानने वाला कोई भी व्यक्ति कभी भी भाजपा को वोट न दे। यही एकमात्र मदद है जो अब आप हमें बचाने के लिए कर सकते हैं।"












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