लॉकडाउन में चली गई दिव्यांग दंपति की नौकरी, दिल दुखी नहीं किया, नमकीन बेचकर यूं हुए आत्मनिर्भर
अहमदाबाद। कोरोनावायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश में मार्च महीने से लॉकडाउन लागू कर दिया गया था। आमजन के लिए यह एक इमरजेंसी जैसा दौर साबित हुआ। जिसमें यातायात से लेकर बाजार, उद्योग-धंधे सब ठप हो गए। लाखों लोगों की नौकरियां चली गईं। करोड़ों बेरोजगार हो गए। ऐसे में काफी लोग अपने-अपने गांव-कस्बे लौटने को मजबूर हुए। इस दौरान कई लोगों की भूख-प्यास से जान भी चली गई।
ऐसा ही यहां एक दिव्यांग दंपति के साथ भी हुआ। लॉकडाउन में पति-पत्नी का काम छूट गया। ऐसे समय में भी उन्होंने खुद पर से विश्वास नहीं खोया। फिर दोनों एक दूसरे की मदद से नमकीन बेचने लगे। अब वे खुद को आत्मनिर्भर मानते हैं।

संवाददाता ने बताया कि, पति अश्विन ठक्कर नेत्रहीन है। वो कहते हैं कि, हम एक होटेल में टेलीफोन ऑपरेटर का काम करते थे, लेकिन लॉकडाउन में होटल बंद होने के कारण अपनी नौकरी गंवानी पड़ी। इतना ही नहीं काफी प्रयासों के बावजूद दूसरा कोई काम नहीं मिल रहा था। इस कारण उन्होंने रसीले गुजराती आम का व्यापार शुरू किया।

आम का सीजन खत्म होने के बाद अब नमकीन बेचते हैं। हमने पहले कभी किसी चीज का व्यापार करने के बारे में नहीं सोचा था। नेत्रहीन होने के कारण काफी मुश्किलें भी आ रही थीं। लेकिन इस दौरान पत्नी गीता का पूरा सपोर्ट मिलने के कारण यह संभव हुआ है। नमकीन बनाकर बेचने के साथ दोनों एकदूसरे का हाथ थामकर उसकी डिलीवरी भी करते हैं। आने वाले दिनों में दशहरा व दिवाली का त्यौहार होने के कारण मिठाई का स्टॉल खोलेंगे।












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